धूप में तपता एक सच्चा हीरो ( ek sachcha hero ) : मेरी ताकत
धूप में तपता एक सच्चा हीरो ( ek sachcha hero ), जिसने अपनी मेहनत से, मेरे जीवन को महकाया […]
धूप में तपता एक सच्चा हीरो ( ek sachcha hero ), जिसने अपनी मेहनत से, मेरे जीवन को महकाया […]
घर की छत और माँ-बाप (ghar ki chhat aur maa-bap ), दोनों एक-सा जीवन पाएं, माँ-बाप का दर्द होता है
चार बेटों का पेट पाल लेती है माँ, जागकर रात सारी , चार बेटों के आलीशान महलों में ,
हम भूले से भी नहीं भुला सकते हैं, पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ), कभी ना एहसान
एक संस्कारी परिवार की, ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan ) जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान, ये देखकर
माता-पिता की जिंदगी में आते हैं, ये दर्दनाक पल (Dardnak pal) दो बार , पहली बार जब बेटी जाती है
खुली हवाओं में सांस लेती बेटियां, वो भी चाहती है छूना आसमान, ऊँचे आसमान में हर दिन, उड़ान भरती
एक बाप के सिर का गुरुर हैं, माँ के चेहरे की मुस्कान है, वो घर सदा बुलंदियों पर रहता है,
माँ से प्यारी क्यों उसकी कमाई हो गई, आज दोनों बेटों में लड़ाई हो गई, कुछ दिन रहेगी माँ मेरे
ईश्वर ने अपनी मूरत, माँ के रूप में सजाई है, ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ,