मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी,
उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं,
मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी(tej trar madhumakkhi) बनाऊंगी,
वो नजरें झुकाकर नहीं चलेगी,
वो मेरे सीने से लगकर नहीं पलेगी,
पुरानी परम्पराओं से थोडा उपर उठकर,
मैं पाबंदी नहीं लगाउंगी ज्यादा उस पर,
तीखे-तीखे कांटों वाली उसे कली बनाऊंगी,
मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी,
उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं,
मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी (tej trar madhumakkhi) बनाऊंगी,
* * * * * *
उसके व्यवहार में मीठापन भी होंगा,
उसकी बातों में बचपन भी होंगा,
मुस्कान मधुर,वाणी मधुर,
अभिमान से थोडा दूर रहेगी,
थोड़ी जिद्दी,थोड़े से नखरे वाली,
लेकिन मेरी आंखों का बनकर नूर रहेगी,
उसके गोल-मटोल चेहरे पर,
सूरज के जैसी लाली होगी,
मेरे लिए मेरी बेटी सदा नसीबों वाली होगी,
नयन-नक्ष बिल्कुल मुझे पर गए हैं,
बाल काले-घने बादल से हुए हैं,
उसकी बातों में तहज़ीब की झलक मिलेगी,
वो हर बात में सबसे अलग मिलेगी,
उसको देकर मैं अच्छे संस्कार,
जिंदगी उसकी सुखी बनाऊंगी,
मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी,
उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं,
मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी (tej trar madhumakkhi) बनाऊंगी,
* * * * * *
सौ-बार सोचेगा कोई कुछ बोलने से पहले,
एकदम तीखा जवाब मिलेगा,
किसी के मुंह खोलने से पहले,
प्यारे-प्यारे पंखों के साथ,
डंक मारने की कला भी होगी,
वो सीधे-सादे चेहरे वाली,
लेकिन अंदर से एक जलजला भी होगी,
जो बताए मुझे अपने मन की बातें,
कोई दीवार ना हो माँ-बेटी के बीच,
मैं उसको अपनी प्यारी सखी बनाऊंगी,
मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी,
उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं,
मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी (tej trar madhumakkhi) बनाऊंगी,
* * * * * *
कल तक मेरी गोद में खेलने वाली,
आज तुफानों से खेलने लगी है,
कल तक मेरी उंगली पकड़कर चलने वाली,
आज़ खुद के पंखों से उड़ने लगी है,
आंखों में बिजली सी चमकती है,
हाथों में उसके ज्वाला है,
वो आसमान में उड़ेगी बाज बनकर,
उसे कोई ना रोकने वाला है ,
माथे पर चंदन का टीका होगा,
उसके हाथों में रूद्राक्ष दो मुखी पहनाऊंगी,
मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी,
उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं,
मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी (tej trar madhumakkhi) बनाऊंगी,
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तेज-तर्रार मधुमक्खी(tej trar madhumakkhi) : निडर बेटी

हर किसी को परखना जान जाएगी,
सबकी नीयत पहचान पाएगी,
हर बात का जवाब होगा,
मेरा साथ बेहिसाब होगा,
अपनी दुआओं की माला को,
मैं उसके गले का हार बनाऊंगी,
छोटे-बड़ों से कैसे पेश आना है,
मैं उसको हर शिष्टाचार सिखाऊंगी,
मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी,
उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं,
मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी (tej trar madhumakkhi) बनाऊंगी,
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कांटों से बचकर चलना है,
घर से बाहर निडर होकर निकलना है,
अपने पंखों को इतना फैलाना,
एक पल में समुंदर को भी पार कर जाना है,
आंखों में होंगे काजल के डोरे,
बालों में महकते फूल खिलेंगे,
चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान,
उसकी पायल बजेगी छम-छम,
जब उसके दोनों पांव हिलेंगे,
वो अठखेलियां करेगी पानी के संग,
जब मैं अपने हाथों से उसको नहलाऊंगी,
मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी,
उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं,
मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी (tej trar madhumakkhi) बनाऊंगी,
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वो बातें शयानी करती है,
थोड़ी सी मनमानी करती है,
उसे लाड़-प्यार से पाला है,
इसलिए कुछ ज्यादा ही शैतानी करती है
वो नंगे पाँव घूमती रहती है,
अपने घर के आंगन में,
वो घर की चौखट को चूमती रहती है,
पता नहीं क्या चलता रहता है उसके मन में,
चेहरे से दयालु लगती है,
बातों से झगड़ालू लगती है,
लोग बोलते हैं गली-मोहल्ले में,
वो बिल्कुल अपनी माँ जैसी लगती है,
आवाज कड़क है,कच्ची सडक है,
सारा दिन वो धूल उड़ाती घूमती है,
प्यार से मानती है तो ठीक है,
वरना फिर एक थपकी लगाऊंगी,
मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी,
उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं,
मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी (tej trar madhumakkhi) बनाऊंगी,
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creater-राम सैणी
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