रिश्तों का स्वर्णिम सफर(svarnim safar) : प्रेम से बस्ता घर
घर के सम्मान की रक्षा करना, एक पत्नी का पहला धर्म है, वैसे ही एक पत्नी के सम्मान की रक्षा […]
घर के सम्मान की रक्षा करना, एक पत्नी का पहला धर्म है, वैसे ही एक पत्नी के सम्मान की रक्षा […]
मैं तो रखता हूँ उसे फूलों की तरह, जो बोलना है जिसे बोलनें दो, उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
जितने बहते हैं आंसू (ansoo)आँखों से, तुम आज बह जाने दो, ये शुभ वेला है विदाई का, फिर ना छलकेंगे
जीवन बिल्कुल बदल गया है, आपके आने के बाद, एक रिश्ता ( Ek rishta )और बन गया है, आपका
आँखों में शर्म स्वभाव नर्म, चेहरे पर मोहिनी मुस्कान ( mohini muskan ) रखता है, बातों में जादू,जुबां पर काबू,
मुझे फूलों की तरह रखता है , ससुराल में मेरा पति, तो राजकुमारी बनाकर रखता था, मायके में मेरा
हमसफ़र की सादगी ( humsafar ki sadgi ) है, जैसे फूलों की ताजगी , मैं पल में दूर कर
ससुराल अमीर नहीं है तो कोई बात नहीं, लेकिन हमसफ़र दिल का अमीर ( dil ka amir ) चाहिए, मेरी