पापा का सीना (papa ka seena) : सबसे सकून भरा ठिकाना
पापा के सीने पर मैं बचपन में, बेख़ौफ़ होकर सो जाया करती थी, पापा का सीना (papa ka seena)था, मेरे […]
पापा के सीने पर मैं बचपन में, बेख़ौफ़ होकर सो जाया करती थी, पापा का सीना (papa ka seena)था, मेरे […]
मायके सा ससुराल ( mayke sa sasural) मिला है, परिवार एक दम खुशहाल मिला है, बढ़-चढ़ कर ससुराल की बातें
मुझे ढूंढने से भी नहीं मिलेगा, इस दुनिया में पिता के जैसा चित्रकार, वो है मेरे लिए सारा संसार
दूनिया की सबसे सुंदर रचना माँ ( Sabse sundar rachana-maa) तूं हर घड़ी यूं ही हंसना माँ, जब तूं
मेरे पास आओ बड़ी माँ, थोडा नीचे झुक जाओ बड़ी माँ, मैं कुछ कहना चाहती हूँ आपसे अकेले में, मेरी
मैं मनाना चाहता हूँ बड़ी हर्षो-उल्लास से, अपनी माँ का जन्मदिन ( maa ka janmdin ) धूमधाम से, मैं मनाना
मुझे कोई प्यार नहीं करता है, चेहरा देखकर सबका पता चलता है, ये सब देखती मैं हर रोज हूँ, जो
मात-पिता को बुढापे में रोटी ( budape me roti) मिलना, ये औलाद का नहीं संस्कारों का खेल है, उनके चेहरे
हमारी नानी का आंगन(Nani ka aangan ), सच में नानी की तरह महान है , नानी के घर में हमारी
माँ से सीखा है प्यार जताना, रिश्तों में मीठापन भी, प्यार बाँटते चलो ( pyar bantate chalo ) हंसकर मिलो