एक प्रार्थना हर रोज (ek prarthana har roj) : आस्था का दीप
मैं एक प्रार्थना (ek prarthana har roj) हर रोज करती हूँ, ईश्वर की खोज हर रोज करती हूँ, हर दिन […]
मैं एक प्रार्थना (ek prarthana har roj) हर रोज करती हूँ, ईश्वर की खोज हर रोज करती हूँ, हर दिन […]
जिस मंदिर के दरवाजे कभी बंद नहीं होते उस मंदिर का देवता पिता होता है , पिता है परिवार की
हर दिन खाने में नकल उतारता था, हर घड़ी बस माँ-माँ पुकारता था, मैं कितना बदल गया हूँ(main kitna badal
चाँद की तरह है शीतल स्वभाव, दिलों में शीतलता बिखेरने का काम मिला है, अपनी जादुई मुस्कान से सबका मन
मैंने मांगी है एक मन्नत, माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो, हमारा प्यारा घर रोशन, हंसता हुए मिले सदा मेरी
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है, आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का, प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया
बेटियों की शिक्षा से आएगी, समाज में एक नई रोशनी(nai roshani), मैं रोशन ये सारा जग बनाऊंगा, मै हद में
हर रात को मुझे माँ सपने आते हैं, मुझे गहरी नींद से जगाते हैं, शायद मैं धनवान बनने वाला हूँ,
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है, हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है, पति से पहले पिता
बाबुल का आंगन (baabul ka angan)छोड़ना एक बेटी के लिए, इतना भी आसान नहीं है , जहाँ गुजारा है बचपन