पत्थर से मूरत(pathar se moorat)बना दो : डांट में छुपा अपनापन
मुझे अपने हाथों से तराशकर, पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए, अपनी डांट का खजाना पापा, आज फिर […]
मुझे अपने हाथों से तराशकर, पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए, अपनी डांट का खजाना पापा, आज फिर […]
तूं मेरी कंई जन्मों की कमाई हैं, यूं लगता है जैसे कोई परी मेरे लिए, आसमान से उतर कर आई
खिल-खिलाकर हंसना मना है, क्यों शोर मचाया बेवजह है, बेटी हो,रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ), मर्यादा
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ, माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ, बातें करती हुई बहुत हिलती
मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी, उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं, मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी(tej trar madhumakkhi)
जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे, वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ), आज
जीवन बिल्कुल बदल गया है, आपके आने के बाद, एक रिश्ता ( Ek rishta )और बन गया है, आपका
माँ तुम्हारे हाथों से लिया हुआ, एक सिक्का( ek sikka ) गोल-गोल था, जो मुझे देती थी तुम बचपन
एक प्रार्थना ( ek prarthana) पिता के लिए , जिसने हम पर बेशुमार उपकार किए, हमारी प्रार्थनाओं में माँ का
दिल के सच्चे थे,घर कच्चे थे, बड़ी माँ के पहरे में रहते बच्चे थे, सर पर बड़ी माँ का आशीर्वाद