नानी के घर की खुशबू(nani ke ghar ki khushboo): नानी का प्यार
बचपन के किस्से-कहानियों में, एक किस्सा मेरी नानी के घर का है, नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar […]
बचपन के किस्से-कहानियों में, एक किस्सा मेरी नानी के घर का है, नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar […]
एक कप चाय (ek cup chay) पीने का आज मेरा मन है, आओ पीते हैं बेटे एक साथ बैठकर, तुम्हारा
रब की कृपा से मिली है, मुझे दो प्यारी सौगात (do pyari saugat), अच्छा हमसफ़र और संस्कारी औलाद, मैं हाथ
श्याम तक काम करते-करते, माँ की पीठ थकावट से टूटी होती है, शनिवार हो या रविवार,धूप हो या छाँव, माँ
मैं एक प्रार्थना (ek prarthana har roj) हर रोज करती हूँ, ईश्वर की खोज हर रोज करती हूँ, हर दिन
जिस मंदिर के दरवाजे कभी बंद नहीं होते उस मंदिर का देवता पिता होता है , पिता है परिवार की
हर दिन खाने में नकल उतारता था, हर घड़ी बस माँ-माँ पुकारता था, मैं कितना बदल गया हूँ(main kitna badal
चाँद की तरह है शीतल स्वभाव, दिलों में शीतलता बिखेरने का काम मिला है, अपनी जादुई मुस्कान से सबका मन
मैंने मांगी है एक मन्नत, माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो, हमारा प्यारा घर रोशन, हंसता हुए मिले सदा मेरी
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है, आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का, प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया