सुबह की फटकार (subah ki fatkar) : सुबह की प्यारी तकरार
सुबह-सुबह मत जगाया कर माँ, मुझे अच्छी नहीं लगती है, तुम्हारी सुबह की फटकार (subah ki fatkar), सुबह की […]
सुबह-सुबह मत जगाया कर माँ, मुझे अच्छी नहीं लगती है, तुम्हारी सुबह की फटकार (subah ki fatkar), सुबह की […]
माँ तब से जानती है मुझे मैं जब प्रैगनेंसी सटीक पर , एक लकीर(Ek lakeer)बनकर दिखता था, माँ तब
जब भी ढूंढना पापा मेरे लिए, तुम मेरे सपनों का राजकुमार (mere sapnon ka rajkumar), यदि मेरी कुछ शर्तों
मुझे अपने हाथों से तराशकर, पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए, अपनी डांट का खजाना पापा, आज फिर
तूं मेरी कंई जन्मों की कमाई हैं, यूं लगता है जैसे कोई परी मेरे लिए, आसमान से उतर कर आई
खिल-खिलाकर हंसना मना है, क्यों शोर मचाया बेवजह है, बेटी हो,रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ), मर्यादा
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ, माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ, बातें करती हुई बहुत हिलती
मैं अपनी बेटी को अपनी सखी बनाऊंगी, उसे नाजूक फूलों जैसी कोमल नहीं, मैं उसे तेज-तर्रार मधुमक्खी(tej trar madhumakkhi)
जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे, वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ), आज
जीवन बिल्कुल बदल गया है, आपके आने के बाद, एक रिश्ता ( Ek rishta )और बन गया है, आपका