प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash ) : ममता का चमत्कार
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं, प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर, प्यार से गले लगाना, हर चीज की दवा मिलती है, मात-पिता […]
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं, प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर, प्यार से गले लगाना, हर चीज की दवा मिलती है, मात-पिता […]
जहाँ सुनाते हैं सब अपनी-अपनी फरियाद, पिता उस मंदिर के जैसा लगता है, हर वक्त,हर मोड़ पर हाजिर रहता है,
कुछ कच्ची कुछ पक्की,थोडी जली हुई, कुछ रोटियों का टेढ़ा-मेढ़ा आकार था, मेरी पहली रोटी ( pahli roti )को
सुबह-सुबह मत जगाया कर माँ, मुझे अच्छी नहीं लगती है, तुम्हारी सुबह की फटकार (subah ki fatkar), सुबह की
माँ तब से जानती है मुझे मैं जब प्रैगनेंसी सटीक पर , एक लकीर(Ek lakeer)बनकर दिखता था, माँ तब
जब भी ढूंढना पापा मेरे लिए, तुम मेरे सपनों का राजकुमार (mere sapnon ka rajkumar), यदि मेरी कुछ शर्तों
मुझे अपने हाथों से तराशकर, पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए, अपनी डांट का खजाना पापा, आज फिर
तूं मेरी कंई जन्मों की कमाई हैं, यूं लगता है जैसे कोई परी मेरे लिए, आसमान से उतर कर आई
खिल-खिलाकर हंसना मना है, क्यों शोर मचाया बेवजह है, बेटी हो,रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ), मर्यादा
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ, माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ, बातें करती हुई बहुत हिलती