तेरे नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( sirf khushiyan ) : मेरी बेटी
सारे जहां से खुशियां चुराकर, मैं भर देता बेटी के माथे की लकीरों में, उसके नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( […]
सारे जहां से खुशियां चुराकर, मैं भर देता बेटी के माथे की लकीरों में, उसके नसीब में सिर्फ खुशियाँ ( […]
अपने दुपट्टे के एक कोने में, खनकते सिक्के बांधकर रखती है, एक छोटा-सा मिनी बैंक ( minni bank ), मेरी
काला रंग ( kaala rang ) है ईश्वर की रचना, हर घड़ी बस ये ही मानकर हंसना, वो लोग होते
मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए सासु माँ बस अपनी बेटी बनाकर रख लेना, मुझे मेरी माँ की तरह थाम लेना
सब करते हैं मेरा अभिवादन, मुझे हर पल बांझ बोलकर, मैं पी जाती हूँ ये कड़वे घूंट ( kadve
मैं कैसे उतारूंगा बड़ी माँ, कर्ज इस जादुई स्नान ( jadui sanan ) का, आपके प्यारे हाथों से नहाना, आपके
ज्यादा नहीं मांगतीं बेटियां, वो धनी होती हैं नशीब की, कभी बहू बनाकर देखो , गरीब घर की बेटी (garib
निराला है बड़ी माँ तुम्हारा अंदाज, इस उम्र में भी इतना कड़क मिज़ाज ( kadak mijaj ), तुम मीठे बोल
अब खुद को थोडा विश्राम दो, आपके कांधों का भार माँ, चलो अब मैं संभाल लूं ( chalo ab main
मन्नत का धागा (mannat ka dhaga) : ममता की ताकत आज फल मिला है मेरी वर्षों की मन्नत का तूं