सुबह की फटकार (subah ki fatkar) : सुबह की प्यारी तकरार
सुबह-सुबह मत जगाया कर माँ, मुझे अच्छी नहीं लगती है, तुम्हारी सुबह की फटकार (subah ki fatkar), सुबह की नींद […]
सुबह-सुबह मत जगाया कर माँ, मुझे अच्छी नहीं लगती है, तुम्हारी सुबह की फटकार (subah ki fatkar), सुबह की नींद […]
कुछ कच्ची कुछ पक्की,थोडी जली हुई, कुछ रोटियों का टेढ़ा-मेढ़ा आकार था, मेरी पहली रोटी ( pahli roti )को बडे
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं, प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर, प्यार से गले लगाना, हर चीज की दवा मिलती है,
खोल खजाने आज बड़ी माँ, तुम बादल की तरह बरस जाओ ना, मुझे चाहिए एक गुलाबी नोट( gulabi note ),
सब रंग फीके लगते हैं, माँ की दुआओं के रंग( maa ki duaon ke rang ) के आगे, मुझे
मैं तो रखता हूँ उसे फूलों की तरह, जो बोलना है जिसे बोलनें दो, उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
जब भी ढूंढना पापा मेरे लिए, तुम मेरे सपनों का राजकुमार (mere sapnon ka rajkumar), यदि मेरी कुछ शर्तों को
मुझे अपने हाथों से तराशकर, पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए, अपनी डांट का खजाना पापा, आज फिर से
खिल-खिलाकर हंसना मना है, क्यों शोर मचाया बेवजह है, बेटी हो,रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ), मर्यादा
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ, माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ, बातें करती हुई बहुत हिलती