पिता ही मेरा सच्चा परमेश्वर(sachcha parameshvar)
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है, हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है, पति से पहले पिता […]
जो हमारे अंदर संस्कारों का बीज बोता है, हमारी जिद्द को अपना फर्ज मानकर निभाता है, पति से पहले पिता […]
बाबुल का आंगन (baabul ka angan)छोड़ना एक बेटी के लिए, इतना भी आसान नहीं है , जहाँ गुजारा है बचपन
तेरे चेहरे पर मुस्कान यूं ही बरकरार रहे, चाहे कीमत कुछ भी चुकानी पडे माँ, तेरी खुशी ही मेरी पूजा
मुझे जितनी भी दुआएं मिली हैं वो सब आपको लग जाएं, मैं चाहती हूँ आपके नाम (apke naam), मेरे
जब पिता कमाकर लाता था, हम हर रोज गर्म रोटी (garam roti)खाते थे, आज हम खुद कमाने लगे हैं, लेकिन
हर कदम पर आपका आशीर्वाद (apka ashirvad)है, मुझे आपसे प्रेरणा मिलती है, मैं संभल-संभल कर चलती हूँ पापा, अब तो
माँ के होते हुए कोई हवा मुझे छू जाए , ऐसी हवा कभी चली ही नहीं, माँ के शक्तिशाली आँचल
घर के सम्मान की रक्षा करना, एक पत्नी का पहला धर्म है, वैसे ही एक पत्नी के सम्मान की रक्षा
पिता बरसता है तो बरस लेने दो दिल हलका हो जाएगा , थम जाएगा उनके पिता के भीतर का
मैं तो रखता हूँ उसे फूलों की तरह, जो बोलना है जिसे बोलनें दो, उसकी आँखोँ में नमी नहीं,