ऐसा आंगन ढूंढना पापा (esa angan dundna papa) : बेटी के सपने
तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां, हंसती-खेलती रहती हैं पापा, ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे
तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां, हंसती-खेलती रहती हैं पापा, ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे
मैं नहीं जानता आपके माता-पिता पिता ने, किन नाजों से आपको पाला होगा, यकीन करो,मैं भी उसी राह पर
जहाँ पाँव रखना भी गंवारा नहीं है, वहाँ भी हाथ फैला देती है माँ, औलाद की खुशी (aulad ki khushi)के
उलझ गई जिंदगी(ualajh gai jindagi), एक बार आकर संवार दो ना माँ, बिखर गई हूँ टूटकर तिनके की तरह, एक
कहीं खो सा गया है आजकल, इंसानियत का उजला चेहरा,(ujla chehra), हर दिल में हो गया है लालच और भी
मैंने बोल दिया है गर्म हवाओं को, मुझसे दूर होकर गुजर जाना, मेरी माँ का जादुई हाथ (jadui hath) है
मैंने भी कर ली है तैयारी पापा, मुझे भी करनी है हाथी की सवारी(hathi ki savari), हाथी आने वाला है
पापा के बचपन का कोई किस्सा सुना दीजिए, जो बात आपके दिल को छू गई हो बड़ी माँ, वो बात
मुझे बड़ा आदमी बनाया है पढ़ा-लिखा कर, पिता का गुरुमंत्र (pita ka gurumantar) मैंने जीवन में रखा है अपनाकर,, जहाँ
बचपन के किस्से-कहानियों में, एक किस्सा मेरी नानी के घर का है, नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar