Last updated on March 25th, 2026 at 08:57 pm
एक संस्कारी परिवार की,
ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan )
जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान,
ये देखकर बच्चों में भी संस्कार आते हैं,
वक्त आने पर बच्चे भी निभाएंगे अपना फर्ज,
अगर आप भी अपना फर्ज निभाते हैं।
बच्चों का मन है एक कोरा कागज,
जैसे लिखोगे वहीं नजर आएगा,
बच्चों का मन होता है एकदम निर्मल,
जैसा बोया है,वो लौटकर आएगा,
(पारिवारिक संस्कार) ही बनाते हैं बच्चों को महान,
एक संस्कारी परिवार की,
ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan )
जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान,
* * * * *
बच्चे होते हैं फूलों के जैसे कोमल,
दादा -दादी के प्यार से उनको ना वंचित रहने दो,
वो है एक ठण्डी छाँव जैसे,
बच्चों को उनकी ही छाँव में रहने दो,
दादा -दादी का जादुई प्यार ,
बच्चों का रौशन करें संसार,
उनके दिल में गीत खुशी के बजने लगते हैं,
दादा-दादी जब पोते-पोतियों को,
अपने गले से लगाते हैं,
एक संस्कारी परिवार की,
ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan )
जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान,
ये देखकर बच्चों में भी संस्कार आते हैं,
वक्त आने पर बच्चे भी निभाएंगे अपना फर्ज,
अगर आप भी अपना फर्ज निभाते हैं।
* * * * *
दादा-दादी के दिल को भी पहुँचती है ठंडक,
बच्चों संग हंसकर वक्त गुजारने में,
बच्चों को भी मिलती है बेशुमार खुशी,
उनको दादा -दादी पुकारने में,
दादा -दादी छोटे बच्चों पर अपना,
सबसे ज्यादा हक जताते है,
उनके दिल को मिलता है सकून,
जब बच्चे उनका दिल बहलाते हैं,
घर में बुजुर्गो का देखकर मान-सम्मान,
बच्चों में भी संस्कार आते हैं,
एक संस्कारी परिवार की,
ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan )
जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान,
ये देखकर बच्चों में भी संस्कार आते हैं,
वक्त आने पर बच्चे भी निभाएंगे अपना फर्ज,
अगर आप भी अपना फर्ज निभाते हैं।
* * * * *
मात-पिता को रखेंगे हम अगर पास,
तो इस जग में ना होगा हमरा कभी उपहास,
मात-पिता के एहसानों की,
ऋणी रहेगी हमारी हर श्वास,
अपने मात-पिता की कीजिए सेवा,
उनमें होता है ईश्वर का वास,
ये वक्त है सत्कर्म कमाने का,
ये मौका है धीरे-धीरे उनके दिल में उतर जाने का,
उनके दिल में उतर कर ही,
हम मात-पिता को समझ पाते हैं,
ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan )
जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान,
ये देखकर बच्चों में भी संस्कार आते हैं,
वक्त आने पर बच्चे भी निभाएंगे अपना फर्ज,
अगर आप भी अपना फर्ज निभाते हैं।
* * * * *
परिवार की सच्ची पहचान (sachchi pahchan ) : दादी का अनमोल प्यार

उनके प्यार का दीपक हमेशा
अपने दिल में जगाए रखना,
हर पल उनको अपने दिल में बसाए रखना,
(मात-पिता का सम्मान,)हमारी किस्मत संवार दे,
हमारे सर की बुरी बलाएं,
मात-पिता पल में उतार दे,
उनका हर आदेश पूरा करें,वो जो भी फरमाते हैं,
मात-पिता का देखकर मान-सम्मान,
बच्चों में भी संस्कार आते हैं,
ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan )
जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान,
ये देखकर बच्चों में भी संस्कार आते हैं,
वक्त आने पर बच्चे भी निभाएंगे अपना फर्ज,
अगर आप भी अपना फर्ज निभाते हैं।
* * * * *
मात-पिता संग रखिए अपना हरा-भरा परिवार,
इनके बिना सूना है हर घर का द्वार,
ये ही हैं हमारे जीवन के सच्चे पहरेदार,
ये सेवा का भाव बच्चों के कोमल मन पर,
एक गहरी छाप छोड़ते हैं,
वो संस्कारों में रहते हैं उम्रभर बंधकर,
दिल से दिल के नाते जोड़ते हैं,
बच्चे हमेशा बड़ों को देखकर सीखते हैं,
बच्चे होते हैं नादान,
एक संस्कारी परिवार की,
ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan )
जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान,
* * * * *
दादा-दादी के प्यार के समन्दर में नहाकर,
बच्चे फूलों के जैसे खिल जाते हैं,
मात-पिता हो जब संग अपने,
तो हमारे सारे संकट टल जातें हैं।
रिश्तों की कद्र कैसे करते हैं,
ये बच्चे भी जान पाएंगे,
कभी मत भूलना माता-पिता के चेहरे,
जो हमको उंगली पकड़कर चलना सिखाते हैं,
ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan )
जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान,
ये देखकर बच्चों में भी संस्कार आते हैं,
वक्त आने पर बच्चे भी निभाएंगे अपना फर्ज,
अगर आप भी अपना फर्ज निभाते हैं।
* * * * *
creater-राम सैणी
Read more emotional poetry
click here–> एक तोहफा ( Ek tohfa ) आपके लिए : मेरे पापा ,
click here–>कैसे बाँटोगे बलिदानी माँ ( kaise bantoge balidani maa )



