Last updated on March 7th, 2026 at 10:21 pm
हम भूले से भी नहीं भुला सकते हैं,
पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ),
कभी ना एहसान जताता है ना मुख से बताता है ,
जिम्मेदारियां लेकर चलता है अपने कांधों पर ,
पर खुद को भूल जाता है,
हमारे चेहरे की मुस्कान के लिए पिता,
हर सितम झेल जाता है।
* * *
उसके मन की कोई ना जाने,
पर वो सब के मन की जानता है,
पिता की बात चाहे कोई ना माने,
पर वो सब की मानता है,
बाहर से दिखता है पिता पत्थर के जैसा,
पर अन्दर से बहुत नरम है,
हमारी दुखती हर नब्ज का,
पिता के पास मरहम है,
वो हमारा हमदर्द,हमारा अन्नदाता कहलाता है ,
हम भूले से भी नहीं भुला सकते हैं,
पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ),
कभी ना एहसान जताता है ना मुख से बताता है ,
जिम्मेदारियां लेकर चलता है अपने कांधों पर ,
पर खुद को भूल जाता है,
हमारे चेहरे की मुस्कान के लिए पिता,
हर सितम झेल जाता है।
* * *
खुद ना जो कभी करें परवाह,
जिसके दिल से कभी ना निकले आह।
चाहे दिल में हो कितना भी तूफान,
पर चेहरे पर रहेगी हमेशा मुस्कान,
देखकर हम-सबको झूलता मस्ती में,
खुद भी मस्ती में झूल जाता है,
हम भूले से भी नहीं भुला सकते हैं,
पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ),
कभी ना एहसान जताता है ना मुख से बताता है ,
जिम्मेदारियां लेकर चलता है अपने कांधों पर ,
पर खुद को भूल जाता है,
हमारे चेहरे की मुस्कान के लिए पिता,
हर सितम झेल जाता है।
* * *
सर पर है अगर पिता का साया,
तो हम बनकर रहते हैं राज कुमार,
ना होती है परवाह हमें किसी चीज की,
खुशियां मिलती है बेसुमार,
उससे बड़ा ना है योद्धा कोई ,
जो हमारी करे हर पल देखभाल,
वो खुद सह लेते हैं मार वक्त की,
पर हमको रखते हैं मालामाल,
मेरी माँ की धड़कन चलती है ,
पिता की धड़कन के साथ ,
अपनी मांग में सिन्दूर लगाती है ,
माँ हर दिन लेकर पिता का नाम ,
अपने जीवन का मानती उसे देवता है ,
हम भूले से भी नहीं भुला सकते हैं,
पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ),
कभी ना एहसान जताता है ना मुख से बताता है ,
जिम्मेदारियां लेकर चलता है अपने कांधों पर ,
पर खुद को भूल जाता है,
हमारे चेहरे की मुस्कान के लिए पिता,
हर सितम झेल जाता है।
* * *
पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ) : पिता का मजबूत कंधा

सबकी ख्वाहिशे करते हैं पूरी,
अपनी ख्वाहिशों को मारकर,
सबका दिल जीत लेते हैं ,
अपना सब कुछ हारकर,
उसकी आँखों की घूर है बहुत मशहूर,
खुद को मानें चरणों की धूल,
हमको आँगन का फूल बताता है,
हम भूले से भी नहीं भुला सकते हैं,
पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ),
कभी ना एहसान जताता है ना मुख से बताता है ,
जिम्मेदारियां लेकर चलता है अपने कांधों पर ,
पर खुद को भूल जाता है,
हमारे चेहरे की मुस्कान के लिए पिता,
हर सितम झेल जाता है।
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पिता है सच्चा हमदर्द हमारा,
पिता से हमारी शान है,
वो हमारा सुख-दुख का साथी,
वो ही हमारा भगवान है,
जिसके कन्दे पर बैठकर हमने,
बचपन अपना गुजारा है,
जो हर पल खडा है साथ ,
बनकर हमारा सहारा है,
वो तपता है मेहनत की भट्ठी में ,
किस्मत को रखता है अपनी मुट्ठी में ,
जिसका चेहरा हमेशा गंभीर दिखता है ,
हम भूले से भी नहीं भुला सकते हैं,
पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ),
कभी ना एहसान जताता है ना मुख से बताता है ,
जिम्मेदारियां लेकर चलता है अपने कांधों पर ,
पर खुद को भूल जाता है,
हमारे चेहरे की मुस्कान के लिए पिता,
हर सितम झेल जाता है।
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पूरी जिंदगी निकल जाती है पिता की,
बच्चों की जिंदगी बनाने में,
आज -कल आती है शर्म बच्चों को,
मात-पिता को अपनाने में,
पिता का बलिदान भी है सबसे बड़ा,
जो हर पल सीना तानकर,
हमारी मुश्किलों के आगे है खडा,
ज़िन्दगी हो जाएगी उसकी फूलों के जैसी,
जो पिता के चरणों की धूल,माथे पर सजाता है,
हम भूले से भी नहीं भुला सकते हैं,
पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ),
कभी ना एहसान जताता है ना मुख से बताता है ,
जिम्मेदारियां लेकर चलता है अपने कांधों पर ,
पर खुद को भूल जाता है,
हमारे चेहरे की मुस्कान के लिए पिता,
हर सितम झेल जाता है।
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Creater-राम सैणी
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