( maa jaisi baaten )

माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten ) : माँ की झलक बेटी में

इस कविता को star दीजिए

 

हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ,
माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ,
बातें करती हुई बहुत हिलती हूँ,
मैं फूली नहीं समाती उस पल,
जब लोग बोलते हैं गली-मोहल्ले में ,
मैं बिल्कुल अपनी माँ जैसे चलती हूँ,
छोटे बच्चे के जैसे मेरा चेहरा है,
गोल-मटोल दो आँखें हैं,
लंबे काले रेशम से बाल,
माँ के जैसे होंठो के नीचे,
एक बड़ा सा तिल मेरा है,
मैं छोटी-छोटी बातों पर दिनभर,
अपनी माँ के जैसे गुस्सा करती हूँ,
मैं फूली नहीं समाती उस पल,
जब लोग बोलते हैं गली-मोहल्ले में ,
मैं बिल्कुल अपनी माँ जैसे चलती हूँ,
* * * * *
माँ के साथ एक गहरा रिश्ता है,
ये हम दोनों के चेहरे से दिखता है ,
बातों में वजन,बुजुर्गो को नमन,
सीधा-सीधा सा अपना जीवन है,
मैं रहती हूँ बनकर माँ की परछाई,
ना सुनी कलाई,ना किसी और की बुराई,
इन बातों पर खास ध्यान है,
खाना अच्छे से पका हुआ,
सर हमेशा ढका हुआ,
इन बातों पर खास ध्यान है,
घर की चौखट को छूती हूँ,
में जब भी घर से निकलती हूँ,
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ,
माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ,
बातें करती हुई बहुत हिलती हूँ,
मैं फूली नहीं समाती उस पल,
जब लोग बोलते हैं गली-मोहल्ले में ,
मैं बिल्कुल अपनी माँ जैसे चलती हूँ,
* * * * *

बोली में थोडा तीखापन है,
माँ के जैसे मेरे तीखे नक्ष-नयन,
माँ की आदतें कुछ मुझमें आ गई हैं,
उसकी हंसी मेरे चेहरे में समा गई हैं,
सुबह-सुबह उठकर फिर सोने की आदत है,
बिखरे बालों से हमको नफरत है,
माँ अपनी जान से ज्यादा करती हिफाजत है,
मैं हर रोज सुबह-सुबह उठकर,
अपनी माँ से गले मिलती हूँ,
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ,
माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ,
बातें करती हुई बहुत हिलती हूँ,
मैं फूली नहीं समाती उस पल,
जब लोग बोलते हैं गली-मोहल्ले में ,
मैं बिल्कुल अपनी माँ जैसे चलती हूँ,
* * * * *
माँ के साथ मेरा रिशता,
बिल्कुल सखी-सहेली के जैसा है,
हमारा जीवन है एक बंद किताब,
एकदम किसी पहेली के जैसा है,
बहाने बनाना,ना कुछ छूपाना,
माँ से हर बात सांझा करती हूँ,
उनके कदमों से कदम मिलाना,
बात-बात पर हंसाना,
उनसे तूं -तूं, मैं-मैं ना बेवजह करती हूँ,
वो मुझे मेरी लाढो कहती है,
मैं माँ को अपनी जिंदगी कहती हूँ,
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ,
माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ,
बातें करती हुई बहुत हिलती हूँ,
मैं फूली नहीं समाती उस पल,
जब लोग बोलते हैं गली-मोहल्ले में ,
मैं बिल्कुल अपनी माँ जैसे चलती हूँ,
* * * * *

  माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten ) : माँ की छाप

 

( maa jaisi baaten )
( maa jaisi baaten )

वो मुझे एक गुड़िया के जैसे रखती है,
सुबह-शाम ईश्वर की भक्ति करती हैं,
हम गिरने से पहले एक-दूसरे का,
झट से हाथ थाम लेते हैं,
हम घर से निकले से पहले,
ईश्वर का नाम लेते हैं,
माँ के जैसे अपने बड़े-बुजुर्गों को,
हाथ जोड़कर नमन करती हूँ,
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ,
माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ,
बातें करती हुई बहुत हिलती हूँ,
मैं फूली नहीं समाती उस पल,
जब लोग बोलते हैं गली-मोहल्ले में ,
मैं बिल्कुल अपनी माँ जैसे चलती हूँ,
* * * * *
माँ ऊँची आवाज में जब भी,
मुझसे कभी बात करती है,
रात को पास आकर सोने से पहले,
मेरे सर पर हाथ रखती है,
मुझे गुस्सा आ गया था,
इसलिए तुम पर हाथ उठा था,
ये बोलकर मुझे गले लगा लेती है,
मैं हाथ जोड़कर माँ को मना लेती हूँ,
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ,
माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ,
बातें करती हुई बहुत हिलती हूँ,
मैं फूली नहीं समाती उस पल,
जब लोग बोलते हैं गली-मोहल्ले में ,
मैं बिल्कुल अपनी माँ जैसे चलती हूँ,
* * * * *
तुम बहुत परेशान करती हो,
जरा सा भी ध्यान नहीं रखती हो,
ये बोलकर आंसू बहाने लगती है,
फिर से ना होगी ये गलती दोबारा,
मुझे मुस्कराता हुआ देखना है,
ये प्यारा चेहरा तुम्हारा,
वो मेरा चेहरा झट से चूम लेती है,
फिर मैं खिल-खिलाकर हंसती हूँ,
हंस-हंसकर सबसे मिलती हूँ,
माँ जैसी बातें ( maa jaisi baaten )मीठी करती हूँ,
बातें करती हुई बहुत हिलती हूँ,
मैं फूली नहीं समाती उस पल,
जब लोग बोलते हैं गली-मोहल्ले में ,
मैं बिल्कुल अपनी माँ जैसे चलती हूँ,
* * * * *
creater- राम सैणी
read more sweet poetry
click here –>  मेरी दुनिया का चित्रकार(meri duniya ka chitarkar):खामोश हीरो ,
click here –> एक तोहफा ( Ek tohfa ) आपके लिए : मेरे पापा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Scroll to Top