(maa kyon prai ho gai )

माँ क्यों पराई हो गई (maa kyon prai ho gai ): माँ का बंटवारा

Last updated on April 11th, 2026 at 06:07 pm

इस कविता को star दीजिए

माँ से प्यारी क्यों उसकी कमाई हो गई,
आज दोनों बेटों में लड़ाई हो गई,
कुछ दिन रहेगी माँ मेरे पास,
कुछ दिन रहेगी माँ तेरे पास,
एक पल में देखते ही देखते,
आज माँ क्यों पराई हो गई (maa kyon prai ho gai ),
माँ का बंटवारा भी कर लिया है,
घर की सम्पत्ति के साथ,
दोनों बेटे सहमत हो गए,
दो-दो सप्ताह माँ को रखने को अपने साथ,
जिस माँ ने बचपन में थामी थीं हमारी कलाई,
आज क्यों सुनी उसकी कलाई हो गई,
एक पल में देखते ही देखते,
आज माँ क्यों पराई हो गई (maa kyon prai ho gai ),

*       *         *        *       *

माँ की सब चीजों पर,
दोनों बेटों का हक हो गया सिवा माँ के,
सब चीजों को गले लगाया सिवा माँ के,
माँ ने अपनी मेहनत से,
उठाया था ऊँचा जिस घर को,
अपनी सब इच्छाओं को मारकर,
अपने प्यार के रंगों से सजाया था जिस घर को,
दोनों बेटे उस घर के न‌ए हकदार हो ग‌ए,
वो माँ को बारी-बारी रखने को तैयार हो गए,
माँ थी कभी उस घर की इकलौती निगेहबान,
भीगी आँखों से माँ सोचने लगी,
क्यों ये आज जग हंसाई हो गई,
माँ से प्यारी क्यों उसकी कमाई हो गई,
आज दोनों बेटों में लड़ाई हो गई,
कुछ दिन रहेगी माँ मेरे पास,
कुछ दिन रहेगी माँ तेरे पास,
एक पल में देखते ही देखते,
आज माँ क्यों पराई हो गई (maa kyon prai ho gai ),
*       *         *        *       *
माँ के भुलाकर एहसान
माँ को समझने लगे बोझ,
दोनों रहने लगे परेशान,
माँ की आँखों के आंसू,
आज धीरे-धीरे बह रहे हैं,
माँ के होंठ कांप रहे थे मगर,
उसके आंसू बहुत-कुछ कह रहे हैं,
घर की दीवार से माँ की तस्वीर उतारकर,
बहू-बेटे ने अपनी तस्वीर लगाई है,
माँ से प्यारी क्यों उसकी कमाई हो गई,
आज दोनों बेटों में लड़ाई हो गई,
कुछ दिन रहेगी माँ मेरे पास,
कुछ दिन रहेगी माँ तेरे पास,
एक पल में देखते ही देखते,
आज माँ क्यों पराई हो गई (maa kyon prai ho gai ),
*       *         *        *       *
अकेली बैठी देख रही थी,
परिवार का बिखराव,
अपने मन को समझा रही थी,
किस्मत का खेल मानकर,
धीरे-धीरे आंसू बहा रही थी,
माँ से ज्यादा दोनो बेटों ने,
घर की सम्पत्ति की कीमत लगाई है,
माँ से प्यारी क्यों उसकी कमाई हो गई,
आज दोनों बेटों में लड़ाई हो गई,
कुछ दिन रहेगी माँ मेरे पास,
कुछ दिन रहेगी माँ तेरे पास,
एक पल में देखते ही देखते,
आज माँ क्यों पराई हो गई (maa kyon prai ho gai ),
*       *         *        *       *

माँ क्यों पराई हो गई (maa kyon prai ho gai ): माँ का टूटता रिश्ता

 

(maa kyon prai ho gai )
(maa kyon prai ho gai )

मेरी ही कोख के जाये ,
आज मुझसे आँखें चुराने लगे हैं,
कितनी कद्र है मेरी उनकी आँखों में,
वे मुझको समझाने लगे हैं,
कितनी खुश थी मैं कभी ,
दो बेटों का साथ पाकर,
दोनों रखेंगे मुझे अपने सीने से लगाकर,
मुझे एक पल में करके पराया ,
दोनों ने आँखें चुराई हैं,
माँ से प्यारी क्यों उसकी कमाई हो गई,
आज दोनों बेटों में लड़ाई हो गई,
कुछ दिन रहेगी माँ मेरे पास,
कुछ दिन रहेगी माँ तेरे पास,
एक पल में देखते ही देखते,
आज माँ क्यों पराई हो गई (maa kyon prai ho gai ),
*       *         *        *       *
सीने में एक अरमान है बाकी,
जब तक जिस्म में जान है बाकी,
जब तक रहूँ सर उठाकर रहूँ,
हे ईश्वर तेरे हाथों में मेरे जीवन की कमान है,
मेरा सम्मान रहेगा क़ायम यूं ही,
जब तक तूं मेहरबान है,
सदा हाथ रखना बेटों  के सर पर,
इनके  सर रखना ‌कामयाबी के सेहरे,
इन सब में बेटों का कोई दोष नहीं,
होगा वही जो नशीब में लिखा है मेरे,
रखना सदा खुशहाल इन्हें,
कोई गम ना करें परेशान इन्हें
सुख ना हों इनसे पराया कभी ,
जैसे आज मैं पराई हो गई,
माँ से प्यारी क्यों उसकी कमाई हो गई,
आज दोनों बेटों में लड़ाई हो गई,
कुछ दिन रहेगी माँ मेरे पास,
कुछ दिन रहेगी माँ तेरे पास,
एक पल में देखते ही देखते,
आज माँ क्यों पराई हो गई (maa kyon prai ho gai ),
*       *         *        *       *
creater-राम सैणी
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