बेटी है घर की शान ( Ghar ki shan ) : रिश्तों की डोर
बेटी है घर की शान ( Ghar ki shan ), फिर बेटी क्यों पराई है, मेरे दिन बदलने लगे […]
बेटी है घर की शान ( Ghar ki shan ), फिर बेटी क्यों पराई है, मेरे दिन बदलने लगे […]
चाँदनी-सा माँ का प्यार (chandani sa maa ka pyar) लगता है, माँ ही सारा संसार लगता है, सच में,ये
मेरे लिए सर झुकाकर दुआ मांगती माँ( dua mangti maa ), मुझे सफलता की सीडी चढ़ाकर मानती है माँ,
जब तक बागों में नाचे मोर , कोयल गीत सुनाती रहे, मैं ईश्वर से करता हूँ ये ही प्रार्थना,
माँ कितना सोचती है मेरे लिए, मैं कौन-कौन से सुनाऊं उसके किस्से, सोने का हक़ ( sone ka haq
हर पल मेरे सपनो में रंग भरने का, धन्यवाद माँ (Dhanyavad Maa ) मुझे इतना काबिल बनाने का ,
पैरों में गिरकर अपनी जन्मदाती के , पकड़कर बोला माँ की कलाई , इस अनाथ-आश्रम में अब तुमको ना
सपनों का साथी-पिता (sapnon ka sathi-pita), सपनों को पूरा करता-पिता , पिता देखता है सपने आसमान से ऊँचें, मेरे उन
दुनिया से जाने के लिए कंई रास्ते हैं मगर, दुनिया में आने के लिए एक ही रास्ता है ,
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) भी , हमारा बेटा तोड़ गया है , ईश्वर के भरोसे