Last updated on March 20th, 2026 at 01:32 pm
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) भी ,
हमारा बेटा तोड़ गया है ,
ईश्वर के भरोसे माँ-बाप को छोड़ गया है ,
हमारा आँखों का भ्रम भी दूर हो गया है ,
जब से बेटा पढ़-लिखकर मशहूर हो गया है,
हम देखते रह गए उसका चेहरा,
राम जाने,वो माँ-बाप से कब दूर हो गया है ,
* * * * * *
सब इच्छाएं की हैं उसकी पूरी ,
अपना मन मारकर,
पता नहीं था माँ-बाप को,
यूं रख देगा एक पल में,
अपने दिल से उतार कर,
हर पल रखा है उसको फूलों की छाँव में,
ईश्वर पर एतबार कर,
माँ-बाप से पता नहीं क्यों,
एक पल में मोह की डोर तोड़ गया है,
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) भी ,
हमारा बेटा तोड़ गया है ,
ईश्वर के भरोसे माँ-बाप को छोड़ गया है ,
हमारा आँखों का भ्रम भी दूर हो गया है ,
जब से बेटा पढ़-लिखकर मशहूर हो गया है,
हम देखते रह गए उसका चेहरा,
राम जाने,वो मात-पिता से कब दूर हो गया है,
* * * * * *
सोचा था एक दिन बेटा भी करेगा,
माँ-बाप का सम्मान,
पढ़-लिखकर वो बन बैठा,
माँ-बाप से अनजान,
पढ़-लिखकर क्यों भूल जाते हैं बच्चे,
अपने माँ-बाप के एहसान,
वो जैसे बचपन में था नादान,
हमारी नजर में वो आज भी है नादान,
बेटे ने आज मुंह मोड लिया है हम से,
पता नहीं वो किस नशे में चूर हो गया,
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) भी ,
हमारा बेटा तोड़ गया है ,
ईश्वर के भरोसे माँ-बाप को छोड़ गया है ,
हमारा आँखों का भ्रम भी दूर हो गया है ,
जब से बेटा पढ़-लिखकर मशहूर हो गया है,
हम देखते रह गए उसका चेहरा,
राम जाने,वो मात-पिता से कब दूर हो गया है,
* * * * * *
माँ-बाप के आँचल में ,
जिसने अपना बचपन गुजार दिया,
जिसे अपने दिल का टुकड़ा मानकर,
बचपन से प्यार किया,
उसकी हर एक ग़लती को ,
हंस कर टाल दिया,
तुमने क्या किया है मेरे लिए ,
बड़ी आसानी से वो बोल गया है,
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) भी ,
हमारा बेटा तोड़ गया है ,
ईश्वर के भरोसे माँ-बाप को छोड़ गया है ,
हमारा आँखों का भ्रम भी दूर हो गया है ,
जब से बेटा पढ़-लिखकर मशहूर हो गया है,
हम देखते रह गए उसका चेहरा,
राम जाने,वो मात-पिता से कब दूर हो गया है,
* * * * * *
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) : जब बेटा बदल गया

माँ-बाप का था ये ही अरमान,
वो बन जाए एक अच्छा इन्सान,
हमारी मेहनत का रंग,
अब फीका पड़ने लगा है,
पता नहीं क्यों अब वो हम से,
बात-बात पर लड़ने लगा है,
हमारे साये में रहा वो धनवानों की तरह,
कभी किसी चीज के लिए,
ना तरसने दिया उसको ,
घर में रहता था वो एकदम,
मेहमानों की तरह,
आज भी है हमारे लिए वो एक बच्चा है,
बेशक कद से बड़ा जरूर हो गया,
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) भी ,
हमारा बेटा तोड़ गया है ,
ईश्वर के भरोसे माँ-बाप को छोड़ गया है ,
हमारा आँखों का भ्रम भी दूर हो गया है ,
जब से बेटा पढ़-लिखकर मशहूर हो गया है,
हम देखते रह गए उसका चेहरा,
राम जाने,वो मात-पिता से कब दूर हो गया।
* * * * * *
कभी जिस आँगन में गुंजती थी,
बचपन में उसकी किलकारियां ,
जिस आँगन में खिलती थी,
उसके प्यार के फूलों की क्यारियां,
जिस घर में थिरकते थे ,
उसके नन्हें-नन्हे दो पाँव,
जिसे हर पल रहता था,
माँ के सीने से लिपटने का चाव,
आज उसे अपनी दौलत का सरूर हो गया है ,
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) भी ,
हमारा बेटा तोड़ गया है ,
ईश्वर के भरोसे माँ-बाप को छोड़ गया है ,
हमारा आँखों का भ्रम भी दूर हो गया है ,
जब से बेटा पढ़-लिखकर मशहूर हो गया है,
हम देखते रह गए उसका चेहरा,
राम जाने,वो मात-पिता से कब दूर हो गया है,
* * * * * *
आज वो ही मन्दिर के जैसा घर,
बिन उसके लगता है सुनसान,
जैसे बिना चाँद-सितारों के ,
खाली लगता है नीला आसमान,
जीवन की राहों में बेशक,
अकेले पड़ जाएं हम ,
किस्मत से कैसे लड जाएं हम,
जब से बेटा हमारी झोली में आया है,
हमें खुद पर गरूर हो गया है,
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) भी ,
हमारा बेटा तोड़ गया है ,
ईश्वर के भरोसे माँ-बाप को छोड़ गया है ,
हमारा आँखों का भ्रम भी दूर हो गया है ,
जब से बेटा पढ़-लिखकर मशहूर हो गया है,
हम देखते रह गए उसका चेहरा,
राम जाने,वो मात-पिता से कब दूर हो गया है ,
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creations –राम सैणी
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