( Har dil ka tara )

हर दिल का ( Har dil ka tara ) तारा : प्यार भरा परिवार

Last updated on April 29th, 2026 at 06:45 pm

इस कविता को star दीजिए

मुझे ऐसे घर भेजना हे पालनहार,
जिस घर में बेटी का सत्कार हो,
मैं बनूं हर दिल का ( Har dil ka tara )तारा,
जिस घर में सब मुझको करते सच्चा प्यार हों,
जहाँ बेटी की एक किलकारी पर,
कोई नंगे पाँव दौडा चला आए,
जहाँ मुझे रोता हुआ देखकर,
कोई मुझे प्यार से गले लगाए,
मैं रुठ जाऊं तो मुझे मनाए,
जब मैं गुस्से से सर पर उठा लूं घर सारा,
मुझे ऐसे घर भेजना हे पालनहार,
जिस घर में बेटी का सत्कार हो,
मैं बनूं हर दिल का ( Har dil ka tara )तारा,
*    *      *      *        *    *

सर आँखों पर बिठाकर रखें,
मुझको सारा परिवार,
हाथ जोड़कर,सर को झुका कर,
मैं विनती करूं तुम से हे पालनहार,
जो हर पल तरसे बेटी का प्यार पाने को,
जो सावन की तरह बरसे ,
बेटी पर प्यार जताने को,
बेटे-बेटी का भेदभाव ना के बराबर हो,
जहां बेटी को भी बोलने का हक हो,
जहां मेरे प्यार के साथ-साथ,
मेरी नाराज़गी का भी ध्यान रखते हों,
जिस घर में मीठी सब जुबान रखतें हों,
जहां हर एक का नर्म व्यवहार हो,
मुझे ऐसे घर भेजना हे पालनहार,
जिस घर में बेटी का सत्कार हो,
मैं बनूं हर दिल का ( Har dil ka tara )तारा,
जिस घर में सब मुझको करते प्यार हों,
*    *      *      *        *    *
उस परिवार से जोड़ना नाता मेरा,
जहाँ बात -बात पर कोई,
दिल ना दुखाता हो मेरा,
एक छोटे-से प्रहार से,
बहुत दुखता है दिल मेरा,
मुझको नाजुक बहुत बनाया है तुमने,
कुछ भी छुपा नहीं सकता है दिल मेरा,
घर में छोटा हो या बड़ा,
सबके ऊपर मेरी ही चलती सरकार हो,
मुझे ऐसे घर भेजना हे पालनहार,
जिस घर में बेटी का सत्कार हो,
मैं बनूं हर दिल का ( Har dil ka tara )तारा,
जिस घर में सब मुझको करते प्यार हों,
*    *      *      *        *    *
ना भेजना उस घर मुझे जहाँ,
बेटियों को लम्बी कतार हो,
उस घर से रखना दूर मुझे,
जहाँ बेटियों का तिरस्कार हो,
ना मेरा हो कोई दुख बांटने वाला,
ना मेरा कोई पहरेदार हो,
मत रोलना मुझे किसी के पैरों में,
जहाँ दिल में मेरे लिए कोई जगह ना हो,
जिस घर में मुरझा जाएं चेहरे,
बेटी की सूरत देखकर,
जहां हर किसी को प्यार और सम्मान मिलता हो,
एक बेटी को छोड़कर,
मत भेजना ऐसे घर में से पालनहार,
जहां मुस्कराती बेटी को देखकर मुंह बना लेते हैं,
जैसे हो कोई फूला हुआ गुब्बारा,
मुझे ऐसे घर भेजना हे पालनहार,
जिस घर में बेटी का सत्कार हो,
मैं बनूं हर दिल का ( Har dil ka tara )तारा,
*    *      *      *        *    *

हर दिल का ( Har dil ka tara ) तारा : अपनेपन का संसार

 

( Har dil ka tara )
( Har dil ka tara )

किसी के दिल के गलियारों में,
बस इतनी कृपा बनाए रखना,
मेरा जीवन ना गुजरे दुख के अंधियारों में,
उस माँ की देना कोख मुझे,
जो कसी भी बात पर,
ना करने दे कोई शोक मुझे,
मेरी छोटी-छोटी गलतियों पर,
बेशक दे टोंक मुझे,
मुझे एक प्यारा घर चाहिए,
मुझे एक अपनापन चाहिए,
उसकी सांसें चलती हों मेरी सांसों के साथ,
जो भी मेरा पालनहार हो,
मुझे ऐसे घर भेजना हे पालनहार,
जिस घर में बेटी का सत्कार हो,
मैं बनूं हर दिल का ( Har dil ka tara )तारा,
*    *      *      *        *    *
जिस माँ की गोद हो खाली,
जो तेरे चरणों में रहे हर पल लेटी,
इस बात का उसे कोई पछतावा ना हो,
उसकी गोद में खेले बेटा हो चाहे बेटी,
मेरी झोली में क्यों डाल दी बेटी,
जिस माँ को कभी ये शिकवा ना हो,
जिसके माथे पर लकीरें आएं,
बेटी के मुख को देखकर,
ऐसी कोख से मेरा कभी कोई रिश्ता ना हो,
जहाँ माँ की आँखों में ,
कभी प्यार कम ना हो हमारा,
मुझे ऐसे घर भेजना हे पालनहार,
जिस घर में बेटी का सत्कार हो,
मैं बनूं हर दिल का ( Har dil ka tara )तारा,
*    *      *      *        *    *
जिस घर में पड़े मेरे पाँव,
मेरे सर पर रहे सदा उस घर की छाँव,
जिस माँ का आँचल तडफे मेरे लिए,
जो माँ सबसे लड ले मेरे लिए,
जो करें मेरी दिल से देखभाल,
मुझको उस माँ की झोली में डाल,
हे पालनहार, मुझे भेजना उसके द्वार,
जहाँ बेटी की आने की खुशी में,
झूमता सारा परिवार हो,
मुझे ऐसे घर भेजना हे पालनहार,
जिस घर में बेटी का सत्कार हो,
मैं बनूं हर दिल का ( Har dil ka tara )तारा,
*    *      *      *        *    *
creater-राम सैणी
Read more sweet poetry
Click here–> एक प्रार्थना ( ek prarthana) पिता के लिए
Click here–> बड़ी माँ का आशीर्वाद ( badi maa ka ashirvad ) : सच्चे रिश्ते

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Scroll to Top