दिल के सच्चे थे,घर कच्चे थे,
बड़ी माँ के पहरे में रहते बच्चे थे,
सर पर बड़ी माँ का आशीर्वाद ( badi maa ka ashirvad )था
नफरत कम दिलों में प्यार ही प्यार था,
पुराने जमाने में बड़ी माँ,
क्या हम-सब का बडा परिवार था,
पुराने जमाने में हर घर में,
बड़ी माँ का राज चलता था,
बड़े-बुजुर्गों की छाया में,
पुराने जमाने में समाज चलता था,
बड़ी माँ की गोद में खेलकर सारा दिन,
पहले खुश होते बच्चे थे,
दिल के सच्चे थे,घर कच्चे थे,
बड़ी माँ के पहरे में रहते बच्चे थे,
* * * * *
पुराने जमाने की बात ही निराली थी,
सबके चेहरे पर मुस्कान दिल में हरियाली थी,
एक-दूसरे पर जान वारने को,
सदा तैयार रहते थे,
मिलजुल कर प्यार से,
संयुक्त परिवार रहते थे,
सादगी भरा जीवन हुआ करता था,
हंसकर सब्र कर लेते थे,
जितना ईश्वर से मिला करता था,
सबसे ऊपर परिवार का प्यार था,
ये ही हम सबके जीने का आधार था,
दिल के सच्चे थे,घर कच्चे थे,
बड़ी माँ के पहरे में रहते बच्चे थे,
सर पर बड़ी माँ का आशीर्वाद ( badi maa ka ashirvad )था
नफरत कम दिलों में प्यार ही प्यार था,
* * * * *
लड़ना-झगड़ना तो जैसे कोई,
किसी से जानता ही नहीं था,
बड़े-बुजुर्गों के आगे सर झुकता था,
घर की बागडोर संभालता पिता था,
बड़ी माँ के आज्ञा के बिना,
घर से बाहर जाना मना था,
घर की बहू को अगर बाजार जाना था,
बड़ी माँ को जरूर साथ ले जाना था,
जुबान में रस बरसता था,
सबके घरों में एक बरगद का पेड़ दिखता था,
लंबे-लंबे और धूल भरे रस्ते थे,
दिल के सच्चे थे,घर कच्चे थे,
बड़ी माँ के पहरे में रहते बच्चे थे,
सर पर बड़ी माँ का आशीर्वाद ( badi maa ka ashirvad )था
नफरत कम दिलों में प्यार ही प्यार था,
* * * * *
तुम्हारे उम्र के बच्चे बड़ी माँ के,
सोने से पहले पाँव दबाया करते थे,
वो रात को अपनी बड़ी माँ के साथ,
चुपचाप सो जाया करते थे,
बड़ी माँ से कहानियां सुनकर,
वो मस्ती करते थे,
हर सवेरे घर के बच्चे,
बड़ी माँ के साथ ईश्वर की वंदना किया करते थे,
बडी माँ के दिए संस्कार,घर में चलते थे,
छोटे बच्चे बड़ी माँ की गोद में पलते थे,
घर की औरतों का पहनावा,
सीधा-साधा कमीज सलवार था,
दिल के सच्चे थे,घर कच्चे थे,
बड़ी माँ के पहरे में रहते बच्चे थे,
सर पर बड़ी माँ का आशीर्वाद ( badi maa ka ashirvad )था
नफरत कम दिलों में प्यार ही प्यार था,
* * * * *
बड़ी माँ का आशीर्वाद ( badi maa ka ashirvad ) : बड़ी माँ की दुनिया

सूरज उगने से पहले खेतों में,
सब लोग हल चलाया करते थे,
अपनी बड़ी माँ के साथ रोटी ले जाया करते थे,
घर में बच्चे शरारती नहीं हुआ करतें थे,
तुम्हारी तरह घर में बड़ी माँ को,
आँखें नहीं दिखाया करतें थे,
आज्ञाकारी बच्चे हुआ करते थे,
बिलकुल एकलव्य की तरह,
जुबान मीठी हुआ करती थी,
बिलकुल हमारी दिव्य की तरह,
हर दिन जैसे एक त्योंहार था,
दिल के सच्चे थे,घर कच्चे थे,
बड़ी माँ के पहरे में रहते बच्चे थे,
सर पर बड़ी माँ का आशीर्वाद ( badi maa ka ashirvad )था
नफरत कम दिलों में प्यार ही प्यार था,
* * * * *
बड़े-बुजुर्गों को पहले दिल से चाहते थे,
हर रिश्ते को मुस्कराकर निभातें थे,
बच्चे कब बड़े हो जाते थे ,
बड़े पापा-बडी माँ की गोद में खेलकर,
पता नहीं चलता था,
बड़े परिवार का फायदा क्या है,
ये तो सुख-दुख में पता चलता था,
सच कहा बड़ी माँ आपने,
आपके बिना अधूरा परिवार था,
दिल के सच्चे थे,घर कच्चे थे,
बड़ी माँ के पहरे में रहते बच्चे थे,
सर पर बड़ी माँ का आशीर्वाद ( badi maa ka ashirvad )था
नफरत कम दिलों में प्यार ही प्यार था,
* * * * *
हमारी बड़ी माँ भी एक पेड है बरगद का,
उनकी जुबान से निकलता है,
एक झरना मीठे शरबत का,
हंसती है,मुस्कराती है,जीवन जीती सादा है,
अपनी बड़ी माँ की देखभाल दिल से करूंगी,
ये घर की मंझली बेटी दिव्य का वादा है,
हमारे घर की पहचान है बड़ी माँ,
सबसे महान है बड़ी माँ,
उसका स्वभाव है सबसे मिलनसार-सा,
दिल के सच्चे थे,घर कच्चे थे,
बड़ी माँ के पहरे में रहते बच्चे थे,
सर पर बड़ी माँ का आशीर्वाद ( badi maa ka ashirvad )था
नफरत कम दिलों में प्यार ही प्यार था,
* * * * *
creation – राम सैणी
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