(ekta ka sangam )

एकता का संगम (ekta ka sangam ) : इंसानियत

Last updated on May 6th, 2026 at 05:22 pm

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अनाथ‌-आश्रम और वृद्ध-आश्रम को,
यदि एक परिवार में बदल डालें हम,
स‌च में हो जाएगा एकता का संगम ( Ekta ka sangam ),
बुजुर्गो को बच्चे मिल जाएंगे,
बच्चों को मात-पिता का संग,
दोनों साथ-साथ रहेंगे हरदम,
बच्चों संग बच्चे बनकर,
बीत जाएगा बुजुर्गो का जीवन,
माता-पिता का प्यार पाकर,
खुश हों जाएगा बच्चों का मन,
फिर सबके चेहरे पर मुस्कान होगी,
उनको छू भी नहीं पाएगा अकेलेपन का गम,
अनाथ‌-आश्रम और वृद्ध-आश्रम को,
यदि एक परिवार में बदल डालें हम,
स‌च में हो जाएगा एकता का संगम ( Ekta ka sangam ),
*    *      *      *   *    *     *      *

एकता का संगम (ekta ka sangam )

आज के ये मतलबी दौर है,
पैसे के पीछे पागलपन हर ओर है,
ये जरूरी नहीं समझते हर घर में,
माता-पिता को ईश्वर के जैसे जाए पूजा,
घूम कर देख लीजिए ये संसार,
माता-पिता की आँखों में मिल जाएंगे आंसू,
ऐसा मिल जाएगा हर घर दूजा,
धीरे-धीरे इंसानियत कहीं खो रही है,
माता-पिता के लिए अपनापन भी खो रहा है,
रिश्ते-नाते हैं बस नाम के,
हर घड़ी हो रहें हैं खत्म,
अनाथ‌-आश्रम और वृद्ध-आश्रम को,
यदि एक परिवार में बदल डालें हम,
स‌च में हो जाएगा एकता का संगम ( Ekta ka sangam ),
बुजुर्गो को बच्चे मिल जाएंगे,
बच्चों को मात-पिता का संग,
दोनों साथ-साथ रहेंगे हरदम
*    *      *      *   *    *     *      *

धीरे -धीरे हम सब मात-पिता को,
भूलते जा रहे हैं,
हम सब को ये पता नहीं,
हम किस नशे में झूमते जा रहे हैं,
मात-पिता को हम रखना चाहते नहीं हैं पास,
इसलिए हर पल रहते हैं हम उदास,
हमारे बच्चे कल हमारी सेवा करेंगें,
माता-पिता को समझने लगे हैं,
आजकल बोझ भारी-भरकम,
सोचते हैं हमे बिन सेवा के ही मेवा मिल जाए,
अनाथ‌-आश्रम और वृद्ध-आश्रम को,
यदि एक परिवार में बदल डालें हम,
स‌च में हो जाएगा एकता का संगम ( Ekta ka sangam ),
*    *      *      *   *    *     *      *
बिन मात-पिता के बच्चों की हालत,
ईश्वर के सिवा और कौन जाने,
उनके दिन कैसे गुजरते होंगे,
कौन जाने माता-पिता के बिन,
आज के दौर में मात-पिता,
अपने बच्चों संग रहते हैं ऐसे,
जैसे हम समंदर के पास खड़े हैं,
फिर भी हैं कंई जन्मों से प्यासे,
माँ के आँचल को हर पल तरसतें हैं वो भी,
आँखों से आंसू नहीं रूकेंगे,
यदि उनको तडफता देख ले जो भी,
बच्चों को भी चाहिए हर पल ममता का संगम,
अनाथ‌-आश्रम और वृद्ध-आश्रम को,
यदि एक परिवार में बदल डालें हम,
स‌च में हो जाएगा एकता का संगम ( Ekta ka sangam ),
*    *      *      *   *    *     *      *

एकता का संगम (ekta ka sangam ) : रिश्तों का नया घर

 

(ekta ka sangam )
(ekta ka sangam )

उन अनाथ बच्चों को भी,
हर पल रहती है ये ही आस,
कोई माँ आकर थाम ले उनका हाथ,
उनको भी लगाकर रखें अपने सीने के साथ,
क्या होता है माँ का प्यार,वो भी ये जान लें,
हम ईश्वर को नहीं ढूंढेंगे यहाँ-वहां,
यदि घर बैठे माता-पिता को ईश्वर मान लें,
ये शीश झुका रहें उनके क़दमों में हरदम,
अनाथ‌-आश्रम और वृद्ध-आश्रम को,
यदि एक परिवार में बदल डालें हम,
स‌च में हो जाएगा एकता का संगम ( Ekta ka sangam ),
*    *      *      *   *    *     *      *
माता-पिता बिन बच्चे अधूरे हैं,
बच्चों बिन माता-पिता,
यदि एक-दुजे का वो हाथ पकड़ लें तो,
दोनों को मिल जाएगी,
एक -दुजे की प्यार की छाँव,
ना बच्चे तरसेंगे माता-पिता के लिए,
ना मात-पिता तरसेंगी बच्चों के लिए,
दोनों बन जाएंगे एक-दुजे का सहारा,
फिर कोई ना रहेगा इस दुनिया में बेसहारा,
फिर छाई होगी दोनों के चेहरे पर,
हर दिन खुशियों की सरगम,
अनाथ‌-आश्रम और वृद्ध-आश्रम को,
यदि एक परिवार में बदल डालें हम,
स‌च में हो जाएगा एकता का संगम ( Ekta ka sangam ),
*    *      *      *   *    *     *      *
हम सब भी यदि ये प्रण लें,
जिस कोख से हम जन्म लें,
वो माँ खाक ना छाने अनजान राहों में,
उसको जकड़कर रखें अपनी बांहों में,
विद्या और संस्कार दोनों का होना जरूरी है,
इन दोनों के बिना जिंदगी अधूरी है,
इन दोनों के बिना छाया रहता है घर में मातम,
अनाथ‌-आश्रम और वृद्ध-आश्रम को,
यदि एक परिवार में बदल डालें हम,
स‌च में हो जाएगा एकता का संगम ( Ekta ka sangam ),
*    *      *      *   *    *     *      *
creater-राम सैणी
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