धन्यवाद माँ (Dhanyavad Maa ) : गुरु शिक्षक
हर पल मेरे सपनो में रंग भरने का, धन्यवाद माँ (Dhanyavad Maa ) मुझे इतना काबिल बनाने का , […]
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हर पल मेरे सपनो में रंग भरने का, धन्यवाद माँ (Dhanyavad Maa ) मुझे इतना काबिल बनाने का , […]
पैरों में गिरकर अपनी जन्मदाती के , पकड़कर बोला माँ की कलाई , इस अनाथ-आश्रम में अब तुमको ना
सपनों का साथी-पिता (sapnon ka sathi-pita), सपनों को पूरा करता-पिता , पिता देखता है सपने आसमान से ऊँचें, मेरे उन
दुनिया से जाने के लिए कंई रास्ते हैं मगर, दुनिया में आने के लिए एक ही रास्ता है ,
माँ-बाप की आखिरी उम्मीद ( aakhari ummid ) भी , हमारा बेटा तोड़ गया है , ईश्वर के भरोसे
धूप में तपता एक सच्चा हीरो ( ek sachcha hero ), जिसने अपनी मेहनत से, मेरे जीवन को महकाया
घर की छत और माँ-बाप (ghar ki chhat aur maa-bap ), दोनों एक-सा जीवन पाएं, माँ-बाप का दर्द होता है
चार बेटों का पेट पाल लेती है माँ, जागकर रात सारी , चार बेटों के आलीशान महलों में ,
हम भूले से भी नहीं भुला सकते हैं, पिता का मौन संघर्ष (Pita ka maun sanghars ), कभी ना एहसान
एक संस्कारी परिवार की, ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan ) जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान, ये देखकर