(apka ashirvad)

हर कदम पर आपका आशीर्वाद  (apka ashirvad) : मेरा आत्मबल

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हर कदम पर आपका आशीर्वाद  (apka ashirvad)है,
मुझे आपसे प्रेरणा मिलती है,
मैं संभल-संभल कर चलती हूँ पापा,
अब तो पाँव में चप्पल भी सीधी डालती हूँ,
फिर भी ना जाने,ठोकरें क्यों लगती हैं,
खुद को पहले से ज्यादा संभालती हूँ,
धीरे-धीरे उम्र बढ़ रही है हर पल,
लेकिन आज भी आपके कांधे की,
सवारी करने का मन करता है,
आपकी हर पल कमी लगती है,
जब लोगों का व्यवहार ज्यादा ही तंग करता है,
आज का दिन कैसे गुजरेगा,
मैं देखती हूँ बिल्कुल आप के जैसे,
जब भी सिक्का हवा में उछालती हूँ,
हर कदम पर आपका आशीर्वाद  (apka ashirvad)है,
मुझे आपसे प्रेरणा मिलती है,
*        *          *         *          *          *
आपकी बेटी अब शयानी हो रही है,
आपकी सिखाई‍ वो कीमती बातें,
मेरी ज़ुबानी हो ग‌ई हैं,
मैं सब जिम्मेदारियों से आजाद थी,
आपके पहरे में पापा,
लेकिन जीवन के सच्चे मोती मिलते हैं,
समंदर गहरे में पापा,
मैने अब शांत रहना सीख लिया है,
अब मैं बेवजह अपने दिमाग में,
गुस्से को नहीं पालती हूँ ,
हर कदम पर आपका आशीर्वाद  (apka ashirvad)है,
मुझे आपसे प्रेरणा मिलती है,
मैं संभल-संभल कर चलती हूँ पापा,
अब तो पाँव में चप्पल भी सीधी डालती हूँ,
*        *          *         *          *          *
मैं धीरे-धीरे पहचानने लगी हूँ,
दुनिया के असली रंग को,
आप से ही सीखा है पापा,
कैसे जीतना है जीवन की जंग को,
जीवन जीना आसान लगता था,
आपके पीछे-पीछे चल कर,
हमे बहुत आनंद आता था पापा,
आपसे आगे निकल कर,
मैं हमेशा याद रखती हूँ पापा,
आपका सिखाया जीवन का पाठ,
जब भी घर से बाहर पैर निकालती हूँ,
हर कदम पर आपका आशीर्वाद  (apka ashirvad)है,
मुझे आपसे प्रेरणा मिलती है,
मैं संभल-संभल कर चलती हूँ पापा,
अब तो पाँव में चप्पल भी सीधी डालती हूँ,
*        *          *         *          *          *
मुझे बचपन से आदत नहीं है पापा,
आपके बिना अकेले चलने की,
आज भी आदत नहीं है पापा,
आपके इस फूल को अकेले खिलने की,
बचपन की तरह फिर से,सर पर हाथ रख दो,
बचपन की तरह फिर से,मेरी शेरनी बोल दो,
मै भी आपके जैसे गहरे-गहरे सांस लेकर,
अपने डर को दिल से बहार निकालती हूँ,
हर कदम पर आपका आशीर्वाद (apka ashirvad) है,
मुझे आपसे प्रेरणा मिलती है,
मैं संभल-संभल कर चलती हूँ पापा,
अब तो पाँव में चप्पल भी सीधी डालती हूँ,
*        *          *         *          *          *

पापा आपका आशीर्वाद (apka ashirvad) : मेरी जीत

 

(apka ashirvad)
(apka ashirvad)

इतनी जल्दी क्यों बीत जाता है बचपन पापा,
अभी तो और रूठना-मनाना बाकी था,
माँ के सामने डांटना,फिर गले लगाना,
अभी तो कितना -कुछ बाकी था,
मुझे आज भी सोने की आदत नहीं है पापा,
आपकी मीठी-मीठी थपकी के बिना,
मेरी नींद आज भी पुरी नहीं होती है पापा,
एक छोटी सी झपकीं के बिना,
मैं आज भी सर्दी के दिनों में,
गर्म पानी से भांप लेती हूँ,
जब भी चुल्हे पर पानी उबालती हूँ,
हर कदम पर आपका आशीर्वाद  (apka ashirvad)है,
मुझे आपसे प्रेरणा मिलती है,
मैं संभल-संभल कर चलती हूँ पापा,
अब तो पाँव में चप्पल भी सीधी डालती हूँ,
*        *          *         *          *          *
माँ बहुत शिकायत करती हैं,
तूं बिल्कुल अपने पापा पर ग‌ई है,
दस बार बोलती हूँ तब कहीं एक काम करती है,
अपने पापा के जैसे ही धीरे-धीरे चलती हैं,
मैं किस-किस को संभालूंगी,
कैसे सबके नाक में नकेल डालूंगी,
माँ हर रोज एहसास कराती है मुझे,
बात-बात पर सुनाती है मुझे,
कुछ सीख ले मुझसे दुनियादारी,
मुझसे उधार ले लो कुछ समझदारी,
कुछ बातों को हवा में उडा देती हूँ,
कुछ बातों को दिल की किताब में लिख डालती हूँ
हर कदम पर आपका आशीर्वाद  (apka ashirvad)है,
मुझे आपसे प्रेरणा मिलती है,
मैं संभल-संभल कर चलती हूँ पापा,
*        *          *         *          *          *
एक बात याद रखना अपने पापा की,
जीवन जीने की कला सीख लो, अपने पापा की,
कुछ चीजों को नजर‌अंदाज कर दिया करो,
जो होता है चुपचाप कर दिया करो,
ज्यादा झमेले में मत पड़ना,
छोटी-छोटी बात पर मत लडना,
ठीक है पापा,आपका कहा मान लेती हूँ,
आपकी बातों पर थोडा ध्यान देती हूँ,
आपका चेहरा याद आ जाता है पापा,
मैं जब भी किसी न‌ए काम में हाथ डालती हूँ,
हर कदम पर आपका आशीर्वाद  (apka ashirvad)है,
मुझे आपसे प्रेरणा मिलती है,
मैं संभल-संभल कर चलती हूँ पापा,
अब तो पाँव में चप्पल भी सीधी डालती हूँ,
*        *          *         *          *          *
Creater- राम सैणी
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