जहाँ सुनाते हैं सब अपनी-अपनी फरियाद,
पिता उस मंदिर के जैसा लगता है,
हर वक्त,हर मोड़ पर हाजिर रहता है,
सच में पिता जी इस दुनिया में,
एक टोल फ्री नंबर( toll free number)-सा लगता है,
हमारे लिए एक सपना हसीन बनकर रहता है,
हर घड़ी पैसों की मशीन बनकर रहता है,
उसकी जेब में कितना है,
वो कभी छुपाता नहीं है ,
उसके दिल में क्या है,वो कभी बताता नहीं है,
कभी पर्वत के जैसा लगता है,
वो कभी समंदर-सा दिखता है,
हर वक्त,हर मोड़ पर हाजिर रहता है,
सच में पिता जी इस दुनिया में,
एक टोल फ्री नंबर( toll free number)-सा लगता है,
* * * * * *
पिता हमारे लिए सपने खरीद लाता है,
अपने हसीन सपनों को बेचकर,
पिता हर सुबह कमाने लिए निकल जाता है,
घर में अपनों को छोड़कर,
आज जीने के लिए चाहिए पैसा भी है,
जो कभी भेदभाव ना समझे,
चाहिए एक रिश्ता ऐसा भी है,
हार को जीत में बदलना जाने,
हमारी एक छोटी सी आह! पर,पिंगलना जाने,
उसका स्वभाव कभी महीना जून का,
तो कभी दिसंबर सा लगता है,
हर वक्त,हर मोड़ पर हाजिर रहता है,
सच में पिता जी इस दुनिया में,
एक टोल फ्री नंबर( toll free number)-सा लगता है,
* * * * * *
जब सबके हाथ खड़े हों,
कभी अकेले राहों में चले हों,
फिर याद आती है इस टोल फ्री नंबर की,
कोई प्यारी चीज हाथों से जब छूटने लगे,
हर ओर सर टकराकर,जब हिम्मत टूटने लगे,
फिर याद आती है इस नीले अम्बर की,
फुरसत मिले तो कभी झांक कर देखना,
पिता के दिल के अंदर का नजारा,
जैसे धूल भरी हवाओं का,
कोई उठ रहा तुफानी बंवडर सा लगता है,
जहाँ सुनाते हैं सब अपनी-अपनी फरियाद,
पिता उस मंदिर के जैसा लगता है,
हर वक्त,हर मोड़ पर हाजिर रहता है,
सच में पिता जी इस दुनिया में,
एक टोल फ्री नंबर( toll free number)-सा लगता है,
* * * * * *
बात हो जब शिखर पर जाने की,
बात हो जब मन बहलाने की,
फिर वो टोल फ्री नंबर याद आता है,
जब दिल में डर का भाव हो,
सारी दुनिया को जेब में रखने का चाव हो,
फिर वो ही किस्मत जगाने वाला
कलंदर याद आता है,
एक पैगाम उस मसीहे के नाम,
मेरे सब खुशियां बने उसके सर की छाँव,
उसके रहते हमारा हर दिन,
बारीस के जैसे छम-छम सा लगता है,
हर वक्त,हर मोड़ पर हाजिर रहता है,
सच में पिता जी इस दुनिया में,
एक टोल फ्री नंबर( toll free number)-सा लगता है,
* * * * * *
जिंदगी का टोल फ्री नंबर ( toll free number) : पिता

वो थामकर रखता है,
हमारे जीवन की डोर है,
हमारी कामयाबी का वीजिटिंग कार्ड,
पिता ने बांट रखा है चारों ओर,
जब मन में उठते हों लाखों सवाल,
जब देखना हो उसके हाथों के जादू का कमाल,
फिर से एक ही टोल फ्री नंबर दिखता है,
मै हूँ सचमुच किस्मत का धनी,
क्योंकी मेरी किस्मत मेरा पिता लिखता है,
कभी लगता है बरगद की छाँव,
कभी नीला अम्बर सा लगता है,
जहाँ सुनाते हैं सब अपनी-अपनी फरियाद,
पिता उस मंदिर के जैसा लगता है,
हर वक्त,हर मोड़ पर हाजिर रहता है,
सच में पिता जी इस दुनिया में,
एक टोल फ्री नंबर( toll free number)-सा लगता है,
* * * * * *
मैं भी पडना चाहता हूँ इस प्यारी किताब को,
मैं चाहता हूँ सारी उम्र उसका सर पर हाथ हो,
इस किताब के हर पन्ने में,एक राज छुपा है,
इसका हर लफ़्ज़ मुंह से बोलता है,
पता नहीं ये कैसे-कैसे जोखिम झेलता है,
अपने मुंह से कभी गुणगान नहीं करता ,
पिता सोचता है,ये मेरा फ़र्ज़,ये मेरा कर्म है,
बेवजह कोई किसी पर एहसान नहीं करता,
पिता के साये में हमारा घर,
एक मंदिर सा लगता है,
हर वक्त,हर मोड़ पर हाजिर रहता है,
सच में पिता जी इस दुनिया में,
एक टोल फ्री नंबर( toll free number)-सा लगता है,
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वो देख नहीं सकता हमारे नयनों में पानी,
पिता क्षमा,दया की है एक जीती-जागती निशानी
गिने-चुने वो शौंक रखता है,
मेहनत की भट्ठी में वो हर दिन निखरता है,
उसे भी चाहिए कोई हाथ बंटाने वाला,
सबको सुलाता है नींद चैन की,
पर खुद को है सारी रात जगाने वाला,
कभी आँखों में गुस्से के बादल,
कभी खाने में नमक सा लगता है,
जहाँ सुनाते हैं सब अपनी-अपनी फरियाद,
पिता उस मंदिर के जैसा लगता है,
हर वक्त,हर मोड़ पर हाजिर रहता है,
सच में पिता जी इस दुनिया में,
एक टोल फ्री नंबर( toll free number)-सा लगता है,
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Creater- राम सैणी
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