रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं,
प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर,
प्यार से गले लगाना,
हर चीज की दवा मिलती है,
मात-पिता हैं एक ऐसा दवाखाना,
रौनक गायब हो जब चेहरे की,
उदासी ने जब हमें घेरा हो,
माँ जब प्यार से गले लगाएं,
हम भूल जाते हैं हर पीडा को,
थोडा गुस्सा,थोडा डांटना,
प्यार से सर पर हाथ फिराना,
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं,
प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर,
प्यार से गले लगाना,
* * * *
कभी सर पर हो चिंताओं का भार,
गले में हो मुश्किलों का हार,
हमें याद आता है माँ का आंचल,
जोश कम हो जाए दिल का,
मन ना हो कभी जब हल्का,
हमे याद आता है माँ का आंचल,
इस आचल पर हक है मेरा,
ये आँचल है ममता का खज़ाना,
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं,
प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर,
प्यार से गले लगाना,
हर चीज की दवा मिलती है,
मात-पिता हैं एक ऐसा दवाखाना,
* * * *
जब चलते-चलते सुनसान राहों में,
कभी ठोकर लग जाए पाँव में,
झट से माँ का नाम जुबां पर आता है,
काम करते हुए थक कर आँख लग जाए,
कभी पीपल की घनी छाँव में,
झट से माँ का चेहरा ख्वाबों में आता है,
हमारी भौंहें खिल जाती हैं,
हर दर्द की दवा मिल जाती है,
माँ जब चूम ले माथे को प्यार से,
कभी थापी की मार,कभी बाल संवार,
कभी-कभी झूठ-मूठ का डराना ,
हर चीज की दवा मिलती है,
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं,
प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर,
प्यार से गले लगाना,
हर चीज की दवा मिलती है,
मात-पिता हैं एक ऐसा दवाखाना,
* * * *
जब परिवार चलाने का ख्याल आया,
अपनी जिम्मेदारी उठाने का ख्याल आया,
फिर पिता का चेहरा सामने आए,
जब सुनने पड़ते हैं दुनिया के ताने,
बिन पिता के जिंदगी के क्या है मायने,
ये सोचकर पिता की याद आए,
पिता का साथ बैठकर सलाह देना,
कभी रुठ जाऊं तो झट से मना लेना,
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं,
प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर,
प्यार से गले लगाना,
हर चीज की दवा मिलती है,
मात-पिता हैं एक ऐसा दवाखाना,
* * * *
प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash ) : ममता और स्नेह का मरहम

जब बिन रुके चलना पड़ता है,
घर से सवेरे निकलना पड़ता है,
याद आती हैं पिता की कही हुई बातें,
जब पिता बोले चिंता मत कर,
पीछे मुड़कर मत देखा कर,
हर दिन नए लोग नए तजुर्बे से होंगी मुलाकातें,
उनका साथ जैसे सावन की बरसात,
बेफिक्र होकर,सुबह उठते थे देर से सोकर,
पिता के हाथों में थी जब तक जीवन की डोर,
ईमानदारी से कमाई,काम आएगी सच्चाई,
हर रोज ये ही प्यार से समझाना,
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं,
प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर,
प्यार से गले लगाना,
हर चीज की दवा मिलती है,
मात-पिता हैं एक ऐसा दवाखाना,
* * * *
हर चीज की सुनवाई होती है,
ना की कोई गुंजाइश नहीं होती है,
कभी खाली हाथ नहीं मोड़ते,
मात-पिता अपने खजाने से,
बरसात दूआओं की,ठंडी हवाओं की,
हर घड़ी देते हैं दूआएं ,
वो किसी ना किसी बहाने से,
जब तक रहेंगे,बच्चों के लिए जिएंगे,
खुश होते हैं अपने हिस्से की खुशियां देकर,
धूल भरी राहों से बचाकर रखेंगे,
अपनी बाहों में उठाकर रखेंगे,
हमारे नाजुक पाँव में ना लगने देंगे वो ठोकर,
हर घड़ी अपने अनुभव से,
जीवन का रास्ता नेक दिखाना,
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं,
प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर,
प्यार से गले लगाना,
हर चीज की दवा मिलती है,
मात-पिता हैं एक ऐसा दवाखाना,
* * * *
हमारी गलतियों पर पर्दा डालेंगे,
हमारी कश्ती सदा मझधार से निकालेंगे,
हमें भरोसा है पूरा रब से ज्यादा,
अपने दिल के करीब सदा रखतें हैं,
जो कहते हैं वो करते हैं,
सदा रखतें हैं नेक इरादा,
कभी प्यार से बैठकर समझाना,
कभी अपने हाथों से खाना खिलाना,
रौनक,खुशियां,हौंसला,दुआएं,
प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash )बनकर,
प्यार से गले लगाना,
हर चीज की दवा मिलती है,
मात-पिता हैं एक ऐसा दवाखाना,
* * * *
Creater -राम सैणी
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