( gulabi note )

गुलाबी नोट ( gulabi note ) का जादू : पेटी में बंद खुशियाँ

इस कविता को star दीजिए

 

खोल खजाने आज बड़ी माँ,
तुम बादल की तरह बरस जाओ ना,
मुझे चाहिए एक गुलाबी नोट( gulabi note ),
आज मुझे भी उसकी सूरत दिखलाओ ना,
वो एक लकड़ी की पेटी में होगा,
शायद वो भी बाहर आने को तरसता होगा,
देखो कितनी गर्मी पड़ती है दिन-रात,
उसकी हालत हो जाएगी खराब,
उस नोट को तुम ने मोडा है कंईं बार,
उसको देखती रहती हो तुम बार-बार,
मुझ पर नहीं तो उसकी हालत पर,
थोड़ा-सा तुम तरह खाओ ना,
मुझे चाहिए एक गुलाबी नोट( gulabi note ),
आज मुझे भी उसकी सूरत दिखलाओ ना,
*         *           *            *            *
आपका चेहरा क्यों लटक गया है,
मेरा पैसे मांगना शायद कुछ खटक गया है,
हर बार नया बहाना नहीं चलेगा,
मुझे देखकर इधर-उधर भागना नहीं चलेगा,
वो चाबी का गुच्छा है कहाँ बड़ी माँ,
आप रास्ता रोके क्यों खड़ी हो बड़ी माँ,
कभी तो हंसकर दे दिया करो,
तुम अपने हाथों से चाबी,
कभी तो मुझको छूने दिया करो,
वो अपना जादुई नोट गुलाबी,
मुझे भी उसकी सूरत दिखलाओ ना,
खोल खजाने आज बड़ी माँ,
तुम बादल की तरह बरस जाओ ना,
मुझे चाहिए एक गुलाबी नोट( gulabi note ),
आज मुझे भी उसकी सूरत दिखलाओ ना,
*         *           *            *            *
एक बार मैं हाथों से छूना चाहती हूँ,
पैसे की खुशी क्या होती है,
मैं भी महसूस करना चाहती हूँ,
उसका चेहरा गुलाब के जैसा खिल जाता है,
जिसके पास है नोट गुलाबी,
वो आसमान में उडा-उडा सा रहता है,
जिसके पास है नोट गुलाबी,
वो जोशिला बनकर रहता है,
ये गुलाबी नोट एक बार बड़ी माँ,
मेरी आँखों के आगे घूमाओ ना,
खोल खजाने आज बड़ी माँ,
तुम बादल की तरह बरस जाओ ना,
मुझे चाहिए एक गुलाबी नोट( gulabi note ),
आज मुझे भी उसकी सूरत दिखलाओ ना,
*         *           *            *            *
आज फिर से पीछे पड़ गई हो,
मुझे बचालो इससे भगवान,
एक बार जो जिद्द पर आ ग‌ई,
फिर पीछे नहीं हटती ये शैतान,
बच्चों को पैसे से क्या काम,
घर में खाना-पीना मिलता है तमाम,
हमारे भोलेपन का हद से ज्यादा,
अब तुम फायदा उठाओ ना,
खोल खजाने आज बड़ी माँ,
तुम बादल की तरह बरस जाओ ना,
मुझे चाहिए एक गुलाबी नोट( gulabi note ),
आज मुझे भी उसकी सूरत दिखलाओ ना,
*         *           *            *            *

गुलाबी नोट ( gulabi note ) का जादू : बड़ी माँ के राज़

 

( gulabi note )
( gulabi note )

 

तुम बेटी हो खानदानी,
ये ठीक नहीं है करना नादानी,
हर वक्त पैसा मांगना गलत बात है,
खर्च उतना करना जितनी ओकात है,
तेरी हम‌ऊमर के बच्चे सारे,
छत पर पतंग उडाते हैं,
उनके खेल हैं कितने प्यारे,
कभी कुश्ती करते हैं कभी पंजे लडाते हैं,
मुझे खाने हैं मीठे अमरूद,
जाओ मंझली बेटी तोड़कर बाग से लाओ ना,
खोल खजाने आज बड़ी माँ,
तुम बादल की तरह बरस जाओ ना,
खोल खजाने आज बड़ी माँ,
तुम बादल की तरह बरस जाओ ना,
मुझे चाहिए एक गुलाबी नोट( gulabi note ),
आज मुझे भी उसकी सूरत दिखलाओ ना,
*         *           *            *            *
दांतों को दो थोडा आराम,
मीठे अमरूदों का मोह छोड़ दो,
जल्दी-जल्दी से उठो बड़ी माँ,
अब तो लक्ष्मण रेखा को तोड़ दो,
ये लो छडी अपने हाथों में थाम लो,
अब छोड भी दो,पैसे का मोह,
सुबह-शाम बस ईश्वर का नाम लो,
हर वक्त पैसा-पैसा करना ठीक नहीं है,
आनी-जानी चीज है पैसा,
उसे पकड़ कर रखना ठीक नहीं है,
इस पैसे को ज्यादा दिल से मत लगाओ ना,
खोल खजाने आज बड़ी माँ,
तुम बादल की तरह बरस जाओ ना,
मुझे चाहिए एक गुलाबी नोट( gulabi note ),
आज मुझे भी उसकी सूरत दिखलाओ ना,
*         *           *            *            *
आपके चेहरे पर क्यों बारह बजे,
थोडा सा मुस्करा कर,हौसला बढ़ाकर,
अब बतला भी दो वो कहाँ पड़े हैं,
मैं पीछे नहीं हटने वाली हूँ,
एक बात को बार-बार रटने वाली हूँ
कुछ खाने को मांग रही आज मेरी जिव्हा है,
हर घड़ी ध्यान रखती है बड़ी माँ,
आपकी सुरीली मंझली दिव्या है,
अब छोड़ो भी नाराजगी बड़ी माँ,
इस प्यारे चेहरे पर मुस्कान सजाओ ना,
खोल खजाने आज बड़ी माँ,
तुम बादल की तरह बरस जाओ ना,
मुझे चाहिए एक गुलाबी नोट( gulabi note ),
आज मुझे भी उसकी सूरत दिखलाओ ना,
*         *           *            *            *

Creater-राम सैणी
Read more sweet poetry
Click here –> प्रेम का अमृत कलश ( amrit kalash ) : ममता का चमत्कार
Click here–>सुबह की फटकार (subah ki fatkar) : सुबह की प्यारी तकरार

Scroll to Top