(ansoo)

आज बह जाने दो आँसू (ansoo) : मंगलमय नया जीवन

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जितने बहते हैं आंसू (ansoo)आँखों से,
तुम आज बह जाने दो,
ये शुभ वेला है विदाई का,
फिर ना छलकेंगे इन आँखों से आंसू(ansoo),
ये बोल रहा हूँ सौगंध उठाकर,
मैं अपनी अर्धांगिनी को,
इन नीली-नीली आँखों में,
आज से हमारा बसेरा है,
कल से एक न‌ए घर में होगा,
आपका महकता सवेरा है,
आज से  इस घर में तुम,
खुद को घुल-मिल जाने दो,
जितने बहते हैं आंसू (ansoo)आँखों से,
तुम आज बह जाने दो,
*      *       *        *         *
अपने बचपन का घर छोडना,
कोई आसान बात नहीं है,
अपने माता-पिता के बराबर,
सारे जहां में कोई महान नहीं है,
इस घर से ना जाने कितनी,
तुम्हारी यादें जुड़ी होंगी,
बचपन के कुछ किस्से-कहानियां,
तुम्हारे दिल के किसी कोने में,
अब भी जरूर पड़ी होंगी,
उन किस्से-कहानियों की सुगंध,
इस घर में भी बिखर जाने दो,
जितने बहते हैं आंसू (ansoo)आँखों से,
तुम आज बह जाने दो,
ये शुभ वेला है विदाई का,
फिर ना छलकेंगे इन आँखों से आंसू,
ये बोल रहा हूँ सौगंध उठाकर,
मैं अपनी अर्धांगिनी को,
*      *       *        *         *
बचपन के किस्से-कहानियों से,
पीछा छूडाना,एक पल में भूल जाना,
बडा मुश्किल लगता होगा,
मैं समझ सकता हूँ हाल-ए-दिल तुम्हारा,
अभी भी आपके दिल में यादों का,
वो ही मेला लगता होगा,
मन का बोझ हो जाएगा हल्का,
कुछ आंसूओं को आँखों से,
तुम आज निकल जाने दो,
जितने बहते हैं आंसू (ansoo)आँखों से,
तुम आज बह जाने दो,
ये शुभ वेला है विदाई का,
फिर ना छलकेंगे इन आँखों से आंसू,
ये बोल रहा हूँ सौगंध उठाकर,
मैं अपनी अर्धांगिनी को,
*      *       *        *         *
आँखों से बहते इन मोतियों की कसम,
मैं आज के बाद ना बहनें दूंगा,
इन आंसूओं को आपकी पलकों के पास,
फिर ना कभी मै रहने दूंगा,
बंद आंखों से करना विश्वास,
मेरी वजह से ना होगा,
ये प्यारा चेहरा कभी उदास,
वो घर भी होगा आपके मायके जैसा,
आपने जिया है जिस घर में अपने बचपन को,
जितने बहते हैं आंसू (ansoo)आँखों से,
तुम आज बह जाने दो,
ये शुभ वेला है विदाई का,
फिर ना छलकेंगे इन आँखों से आंसू,
ये बोल रहा हूँ सौगंध उठाकर,
मैं अपनी अर्धांगिनी को,
*      *       *        *         *

विदाई के आँसू (ansoo) : नई खुशियों की ओर

 

(ansoo)
(ansoo)

 

सास-ससुर होंगे मात-पिता के रूप में,
ना कोई डर है अपना घर है,
मैं हरदम खडा रहूंगा आपकी ढाल के रूप में,
मैं भी सिख रहा हूँ आपकी तरह,
घर को कैसे संभालना है,
वक्त सिखा देता है हाथ पकड़ कर,
जीवन को कैसे चलाना है,
रिश्ते होते हैं काँच के जैसे,
मुझे इन रिश्तों को संभालने दो,
जितने बहते हैं आंसू (ansoo)आँखों से,
तुम आज बह जाने दो,
ये शुभ वेला है विदाई का,
फिर ना छलकेंगे इन आँखों से आंसू,
ये बोल रहा हूँ सौगंध उठाकर,
मैं अपनी अर्धांगिनी को,
*      *       *        *         *
बात-बात पर दिल भर आता है,
मायके का मोह दिल से नहीं जाता है,
मुझे यकीं है,आप पूरा करोगे,
आपने जो सौगंध उठाई है,
अग्नि को साक्षी मानकर,
आपने थामी मेरी कलाई है,
मात-पिता के बाद,बस आप पर भरोसा है,
मायके के बाद अब ससुराल ही मेरी दुनिया है,
मुझे भी इस दुनिया का हिस्सा बन जाने दो,
जितने बहते हैं आंसू (ansoo)आँखों से,
तुम आज बह जाने दो,
ये शुभ वेला है विदाई का,
फिर ना छलकेंगे इन आँखों से आंसू,
ये बोल रहा हूँ सौगंध उठाकर,
मैं अपनी अर्धांगिनी को,
*      *       *        *         *
आपसे हमारा अब रिश्ता जुड़ा है,
मात-पिता के बाद मुझे पता है,
मेरा हमसफ़र मेरे साथ खडा है,
नया घर है नया परिवार,
थोडा तो वक्त लगेगा,
मायका छोड़कर नया संसार बसाना,
थोडा तो वक्त लगेगा,
अब तक रही हूँ बाबुल के दिल में,
अब अपनी पलकों में रहने दो,
जितने बहते हैं आंसू (ansoo)आँखों से,
तुम आज बह जाने दो,
ये शुभ वेला है विदाई का,
फिर ना छलकेंगे इन आँखों से आंसू,
ये बोल रहा हूँ सौगंध उठाकर,
मैं अपनी अर्धांगिनी को,
*      *       *        *         *
Creater- राम सैणी
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