Last updated on August 26th, 2026 at 06:00 pm
माता-पिता है सच्ची पूंजी (sachchi poonji),
ये दोनों हैं सफलता की कूंजी,
माता-पिता के बिना क्या मजा है जीने में,
मैं फूल हूँ उस डाली का,
जिनका दिल धड़कता है मेरे सीने में,
जो नहीं देख सकते मेरे चेहरे पर,
कभी भी गम की लकीरों को,
मुझे पाने के लिए माता-पिता ने,
ना जाने भोजन खिलाया होगा,
हर दिन कितने ही फकीरों को,
मेरे जीवन के ये दो स्तम्भ हैं,
इन्हें रहते जीवन में आनंद ही आनंद है,
इनके साये में हमेशा सफलता मिलती है दूगनी,
माता-पिता है सच्ची पूंजी (sachchi poonji),
ये दोनों हैं सफलता की कूंजी,
* * * * *
माझी बिन नाव है क्या,
मात-पिता बिन सुख की छाँव है क्या,
वो है दरिया के दो किनारे,
जिन्होंने दुख हमारे लेकर ,
अपने सुख हम पर हैं वारे,
सपनो को हकीकत में बदलना जाने,
जीवन की मझधार से निकलना जाने,
ईश्वर पर अटूट विश्वास करते हैं,
तन-मन से पुरुषार्थ करते हैं,
हमारी भलाई के लिए ना जाने,
मुशिबते झेली हैं कितनी,
माता-पिता है सच्ची पूंजी (sachchi poonji),
ये दोनों हैं सफलता की कूंजी,
माता-पिता के बिना क्या मजा है जीने में,
मैं फूल हूँ उस डाली का,
जिनका दिल धड़कता है मेरे सीने में,
* * * * *
सूख जाते हैं वो बगीचे,
जिनका कोई रखवाला नहीं,
ना उन जैसा बलिदानी कोई,
उन के जैसा कोई हिम्मतवाला नहीं,
क्यों भूल जाते हैं हम उपकार उनके,
हमारी रग,-रग में बसे हैं संस्कार उनके,
दिन-रात करके मेहनत ,
जीवन हमारा संवार दिया,
टपकते हैं कीमती मेहनत के मोती,
मात-पिता के चेहरे के पसीने से,
माता-पिता है सच्ची पूंजी (sachchi poonji),
ये दोनों हैं सफलता की कूंजी,
माता-पिता के बिना क्या मजा है जीने में,
मैं फूल हूँ उस डाली का,
जिनका दिल धड़कता है मेरे सीने में,
* * * * *
मात-पिता बिन घर सुनसान ,
उनके बिना है जीवन पथ वीरान,
जब साथ सब छोड़ दें ,
माता-पिता हाथ पकड़ लेते हैं,
जब खुशियां मुंह हमसे मोड़ लें,
माता-पिता अपने आंचल में जकड लेते हैं,
अपने प्यार का पिटारा खोल देते हैं,
अपनी पारखी नजरों से हमें तोल लेते हैं,
हमारे जीवन की उलझी हुई डोर को,
एक पल में सूलझा देते हैं,
माता-पिता है एक ऐसी कंघी ,
माता-पिता है सच्ची पूंजी (sachchi poonji),
ये दोनों हैं सफलता की कूंजी,
माता-पिता के बिना क्या मजा है जीने में,
मैं फूल हूँ उस डाली का,
जिनका दिल धड़कता है मेरे सीने में,
* * * * *
माता-पिता है सच्ची पूंजी (sachchi poonji) : सबसे बड़ा सुख

जब दुख घेर लें चारों ओर से,
उम्मीद का दीपक बुझने लगे,
गर्दिश की आँधी के जोर से,
हाथ पकड़ लेते हैं आकर ,
बांका ना होने दें बाल,
खड जाते हैं तनकर दोनों,
बनकर पर्वत- सी ढाल,
मात-पिता का प्रेम हर पल ,
यूं बरसता है हम पर,
जैसे बादल बरसते हैं सावन के महीने में,
माता-पिता है सच्ची पूंजी (sachchi poonji),
ये दोनों हैं सफलता की कूंजी,
माता-पिता के बिना क्या मजा है जीने में,
मैं फूल हूँ उस डाली का,
जिनका दिल धड़कता है मेरे सीने में,
* * * * *
मात-पिता हैं प्रेम समन्दर,
प्रेम खजाना छिपा है,
मात-पिता के दिल के अन्दर,
हमारा जीवन है इनका कर्जदार ,
हमारे जीवन के हैं ये पहले हकदार,
जी करता है इनके पावन चरणों को चूम लूं,
जी करता की इनके रहते हुए,
हर घड़ी आनंद में झूम लूं,
शत-शत प्रणाम करुं मैं झूककर ,
शत-शत प्रणाम करें मेरा मन भी,
माता-पिता है सच्ची पूंजी (sachchi poonji),
ये दोनों हैं सफलता की कूंजी,
माता-पिता के बिना क्या मजा है जीने में,
मैं फूल हूँ उस डाली का,
जिनका दिल धड़कता है मेरे सीने में,
* * * * *
मात-पिता बिन सफलता कदम चूमेगी,
ये हमारी कल्पना है खाली,
बसते हैं जिनके मन में, मात-पिता हरदम,
समझो उसने सोई किस्मत है जगाली,,
मात-पिता हैं भगवान हमारे,
इनके बिना है दिल बेचैन हमारे,
जो खुशी मिलती है मात-पिता के चरणों में,
वो खुशी ना मिले किसी कीमती नगीने में,
माता-पिता है सच्ची पूंजी (sachchi poonji),
ये दोनों हैं सफलता की कूंजी,
माता-पिता के बिना क्या मजा है जीने में,
मैं फूल हूँ उस डाली का,
जिनका दिल धड़कता है मेरे सीने में,
* * * * *
creater-राम सैणी
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