(nai Roshani)

बेटियों की शिक्षा से नई रोशनी (nai Roshani) : पिता का संकल्प

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बेटियों की शिक्षा से आएगी,
समाज में एक न‌ई रोशनी(nai roshani),
मैं रोशन ये सारा जग बनाऊंगा,
मै  हद में रखुंगा अपनी जरूरतों को,
लेकिन अपनी बेटियों को जरुर पढ़ाऊंगा,
अपनी मेहनत के रंग से,
मैं उनके जीवन में उजाला लेकर आऊंगा,
कुछ ख़्वाहिशों पर लगाम लगाकर,
उनकी कामयाबी की ध्वजा,
ऊँचे आसमान में लहराऊंगा,
नापतोल कर रखुंगा एक -एक कदम,
साथ में उठाऊंगा अपनी जिम्मेदारियों का वज़न,
हर दिन आगे ही आगे कदम बढ़ाता जाऊंगा,
बेटियों की शिक्षा से आएगी,
समाज में एक न‌ई रोशनी(nai roshani),
मै  हद में रखुंगा अपनी जरूरतों को,
लेकिन अपनी बेटियों को जरुर पढ़ाऊंगा

*        *          *         *          *          *
हर चीज से समझौता हो सकता है,
लेकिन बेटियों की पडाई से नहीं,
उनको आगे कैसे बढ़ाना है,
उनको आगे कैसे पढ़ाना है,
सिर्फ इस बात पर ध्यान रहेगा,
बेवजह की लडाई पर नहीं,
शिक्षा का दीपक उनके दिल में जलाना है,
दुनिया का असली रंग उनको दिखाना है,
काबू में रखुंगा अपनी बेवजह की ख़्वाहिशों को,
नजरें उठाकर उन्हें चलना सिखाऊंगा,
बेटियों की शिक्षा से आएगी,
समाज में एक न‌ई रोशनी(nai roshani),
मैं रोशन ये सारा जग बनाऊंगा,
मै  हद में रखुंगा अपनी जरूरतों को,
लेकिन अपनी बेटियों को जरुर पढ़ाऊंगा
*        *          *         *          *          *
बेटी संवारेगी दो परिवार,
बेटी के हाथों में है दो परिवारों की पतवार,
वो पड़ती जाएंगी बिन रुके,
वो कामयाबी की राहों में चलती जाएगी,
बिन झुके,बिन रुके,
कभी सूट-बूट तो कभी नंगे पाँव भी चलना होगा,
कभी घर से बाहर वक्त पर तो,
कभी वक्त से पहले भी निकलना होगा,
एक हद में होंगे अपने शौंक पूरे,
मैं सबके लिए कामयाबी की मिसाल बन जाऊंगा
बेटियों की शिक्षा से आएगी,
समाज में एक न‌ई रोशनी(nai roshani),
मैं रोशन ये सारा जग बनाऊंगा,
मै  हद में रखुंगा अपनी जरूरतों को,
लेकिन अपनी बेटियों को जरुर पढ़ाऊंगा
*        *          *         *          *
ये उनका मौलिक अधिकार भी है,
ये बेटियों पर कोई उपकार नहीं है,
पढ़ाई से बढ़कर उनके लिए,
जीवन में कोई कीमती उपहार नहीं है,
अंधकार से उजाले की और जाना,
शिक्षा का पहला काम है,
बेटियों के पडने से ही चमकेगा,
अपने परिवार का नाम है,
वो उड़ेगी अपने पंख फैलाकर,
मैं उनका हौसला बढ़ाऊंगा,
बेटियों की शिक्षा से आएगी,
समाज में एक न‌ई रोशनी(nai roshani),
मैं रोशन ये सारा जग बनाऊंगा,
मै  हद में रखुंगा अपनी जरूरतों को,
लेकिन अपनी बेटियों को जरुर पढ़ाऊंगा
*        *          *         *          *          *

 बेटियों की शिक्षा से नई रोशनी (nai Roshani) : बेटियों की उड़ान

 

(nai Roshani)
(nai Roshani)

एक चमकता सूरज ही,
पुरे जग में उजाला फैला सकता है,
एक पढ़ा-लिखा इंसान ही दुनिया में,
जागृति का सैलाब ला सकता है,
जब पड़ेगी बेटियां तभी तो ,
आत्म निर्भर बनेगी बेटियां,
जब पड़ेंगी बेटियां तभी तो,
अन्याय के खिलाफ लड़ेंगी बेटियां,
मैं काबू में रखुंगा डर अपने दिल का,
लेकिन बेटियों को अन्याय के खिलाफ,
ढटकर खडना सिखाऊंगा,
बेटियों की शिक्षा से आएगी,
समाज में एक न‌ई रोशनी(nai roshani),
मैं रोशन ये सारा जग बनाऊंगा,
मै  हद में रखुंगा अपनी जरूरतों को,
लेकिन अपनी बेटियों को जरुर पढ़ाऊंगा
*        *          *         *          *          *
संस्कार भी चलेंगे साथ-साथ,
पढ़ना-लिखना भी जारी रहेगा,
बेटियों को पडाना-लिखाना,
पहली पसंद हमारी रहेगा,
अरमान दिल के एक दिन ज़रूर पूरे होंगे,
लेकिन बेटियों के शिक्षा के बिना,सब अधूरे होंगे,
एक जलते दीपक को देखकर,
हजारों  दीपक जल उठेंगे,
शिक्षा की नई रोशनी में,
बेटियों के चेहरे एकदम खिल उठेंगे,
मैं उनके कदमों से अपने कदम मिलाऊंगा,
बेटियों की शिक्षा से आएगी,
समाज में एक न‌ई रोशनी(nai roshani),
मैं रोशन ये सारा जग बनाऊंगा,
मै  हद में रखुंगा अपनी जरूरतों को,
लेकिन अपनी बेटियों को जरुर पढ़ाऊंगा
*        *          *         *          *          *
थोड़ी सोच,थोडा खुद को बदलना होगा,
बेटियों के लिए थोड़ा-थोड़ा,
हम सबको पिंगलना होगा,
हर सिक्के के होते हैं दो पहलू,
हमे दोनों को देखना होगा,
न‌ए जमाने के स्वागत के साथ,
बेटियों को मर्यादा का मोल भी समझना होगा,
मैं हद में रहना भी उनको सिखाऊंगा,
बेटियों की शिक्षा से आएगी,
समाज में एक न‌ई रोशनी(nai roshani),
मैं रोशन ये सारा जग बनाऊंगा,
मै  हद में रखुंगा अपनी जरूरतों को,
लेकिन अपनी बेटियों को जरुर पढ़ाऊंगा
*        *          *         *          *          *
Creater- राम सैणी
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