(pyara chashma)

बड़ी माँ का प्यारा चश्मा (pyara chashma) : मेरी मासूम गलती

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मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का,
प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया है,
मैंने बहुत संभाला था पापा,
बड़ी माँ ऐसे बैठी है रूठकर,
चश्मा नहीं जैसे कोई सोने का गहना टूट गया है,
बड़ी माँ ने मुझे आज घर से निकाला था,
उसके चश्में का रंग काला था,
काला रंग और बड़ी डंडी वाला,
आज का दिन रहेगा एकदम ठंडी वाला,
आपको क्या बताऊं पापा,
बड़ी माँ को समझाते-समझाते,
मेरा तो पसीना छूट गया है,
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का,
प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया है,
*        *          *         *          *          *
बड़ी माँ ने कितना डांट दिया है पापा,
एक छोटी सी लड़की को,
पचास बार उठक-बैठक करने को बोला है,
आपकी प्यारी चुटकी को,
रिश्तों की मिठास कहाँ खो गई है,
बड़ी माँ बासी कड़क रोटी खा-खाकर,
कुछ ज्यादा ही कडक हो गई है,
मेरे पास मत आना, मुझे मत छूना,
आज मुझसे बात किए बिना ही सो ग‌ई है,
मैंने बोला था,बड़ी माँ खाना ख‌ओगी,
मुझे अपनी बांहों में उठाओगी,
बड़ी माँ चारपाई पर लेट गई है,
जैसे कोई खजाना लुट गया है,
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का,
प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया है,
*        *          *         *          *
बड़ी माँ ने अपना हाथ हवा में उछाला,
मेरी गाल पर एक जोरदार तमाचा दे डाला,
मेरे दांत भी हिलने लगे हैं,
मुझे दिन में ही तारे दिखने लगे हैं,
रंग लाल हो गया है मेरे गालों का,
देखो पापा,क्या हाल हो गया है मेरे बालों का,
बड़ी माँ का चश्मा काँच का बना था,
अब मैं क्या कर सकती हूँ,
मेरे हाथों से छूट गया तो छूट गया है,
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का,
प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया है,
*        *          *         *          *
मेरे पास आकर बैठ जाओ,
पहले पापा को ठंडा पानी पिलाओ,
बड़ी माँ की चीजों को हाथ मत लगाया कर,
उनको ज्यादा मत सताया कर,
बड़ी माँ के साथ प्यार से पेश आया कर,
उनके साथ रेश मत लगाया कर,
बड़ी-बड़ी बातें नहीं करनी चाहिए,
एक छोटी सी लड़की को,
मैं बहुत प्यार करता हूँ,
अपनी प्यारी चुटकी को,
तुम दोनों की इस प्यारी नोंक-झोंक से,
जीवन रसीला हो गया है,
तुमहारा नाम बडी माँ के दिल पर लिखा है,
वो ऐसे ही थोडे मिट गया है,
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का,
प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया है,
*        *          *         *          *

बड़ी माँ का प्यारा चश्मा (pyara chashma) याद रहेगा

 

 (pyara chashma)
(pyara chashma)

तुम्हारी बड़ी माँ तुम्हें, प्यार भी तो करती है,
तुम्हारा चेहरा चूमकर वो घर से निकलती है,
मैं मानता हूँ की वो थोड़ी कडक मिजाज की है,
वो थोड़े पुराने हिसाब की है,
तुम्हारी बड़ी माँ की नाराज़गी सर‌आँखों पर,
मेरे नाम से ज्यादा तुम्हारा नाम रहता है,
तुम्हारी बड़ी माँ के मुख पर,
तुम्हारा नाम लिखा रखा है,
बड़ी माँ ने अपने दाएं हाथ पर,
मैं वो ही चश्मा लेकर आया हूँ,बाजार से,
जो सुबह तुम्हारे हाथों से छूट गया है,
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का,
प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया है,
*        *          *         *          *
तुम मत बताना बड़ी माँ को पापा,
अभी उनको और गुस्सा दिलाना है पापा,
मैं उनको कल सुबह -सुबह,
ये प्यारा उपहार दूंगी,
मैं उनको सूरज की पहली किरण के साथ,
बड़ी माँ को अपनी बांहों में जकड़कर,
भर-भरकर प्यार दूंगी,
अपना प्यारा उपहार पाकर बड़ी माँ के चेहरे से,
गुस्सा का बादल एकदम हट गया है,
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का,
प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया है,
*        *          *         *          *
बड़ी माँ को अचानक से एक तोहफा मिलेगा,
कांच की डिब्बी में बंद,
वैसा ही काले रंग का चश्मा मिलेगा,
अपने प्यारे चश्में को देखकर,
बडा हो जाएगा उनकी आँखों का आकार,
मेरा माथा चूमकर करेगी बड़ी माँ मुझे प्यार,
मैंने लकड़ी के मेज पर रख दिया है,
बड़ी माँ का काले रंग का चश्मा ,
बड़ी माँ खुश हो जाएगी देखकर ये करिश्मा,
मैंने बड़ी माँ को मनाने का तरीका ढूंढ लिया है,
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
मेरे हाथों से ना जाने कैसे छूट गया है,
आज सुबह-सुबह मुझसे बडी माँ का,
प्यारा चश्मा (pyara chashma)टूट गया है,
*        *          *         *          *
creation-राम सैणी
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