(pathar se moorat)

पत्थर से मूरत(pathar se moorat)बना दो : डांट में छुपा अपनापन

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मुझे अपने हाथों से तराशकर,
पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए,
अपनी डांट का खजाना पापा,
आज फिर से मुझ पर लुटा दीजिए ,
मुझ पर प्यार लुटाते वाला चेहरा,
आज खामोश बनकर क्यों बैठा है,
मुझ पर सदा चिल्लाने वाला चेहरा,
कुछ खोया-खोया सा रहता है,
अगर मुझसे हुईं हैं कोई खता तो,
पापा मुझको बता दीजिए,
मुझे अपने हाथों से तराशकर,
पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए,
* * * * *
आप बुड़े नहीं समझदार हो रहें हैं,
आप रुखे नहीं मिलनसार हो रहें है,
जुबां बंद है आँखें कुछ बोल रही है,
शायद नीती कुछ खेल,खेल रही है,
कैसे शांत होगी आपके दिल की हलचल,
मुझे बताओ एक बार पापा,
आपका दिल है सबसे निर्मल,
मुझसे नज़रें मिलाओ पापा,
मेरे इस बेचैन दिल को,
आज आप चैन दिला दीजिए,
मुझे अपने हाथों से तराशकर,
पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए,
अपनी डांट का खजाना पापा,
आज फिर से मुझ पर लुटा दीजिए ,
* * * * *
आपका ना बोलना मुझे बहुत खटकता है,
आपका जाया पापा आजकल,
आपसे बातें करने को तरशता है,
मैं आपके दिल में सदा वास करना चाहता हूँ,
थोड़ी ही सही,मुझे कोई शिकवा नहीं,
लेकिन मैं आपसे बात करना चाहता हूँ,
शुरू तो कीजिए पापा अपनी मीठी जुबान से,
मैं आपके साये में पापा,
लड जाऊंगा इस नीले आसमान से,
जो भी मुझसे नाराजगी है आपको,
आज सब-कुछ दिल से मिटा दीजिए,
मुझे अपने हाथों से तराशकर,
पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए,
अपनी डांट का खजाना पापा,
आज फिर से मुझ पर लुटा दीजिए ,
* * * * *
तुम से क्या बोलूं मैं रोज-रोज,
अब तुम शयाने हो ग‌ए हो,
बचपन वाले तुम्हारे वो सुहावने पल,
शायद अब कहीं खो से ग‌ए हैं,
तुम मेरी बातों का बुरा मानने लगे हो,
शायद तुम अब जिंदगी को,
मुझसे भी ज्यादा जानने लगे हो,
मैं भी सांझा करना चाहता हूँ,
अपने दिल में दबे विचारों को,
मैं फिर से सुलझाना चाहता हूँ,
अपनी उलझी हुई जिंदगी को,
तुम कुछ सांझा करना चाहते हो,
अगर अपने जीवन के कीमती पल को,
तुम फिर से याद करना चाहते हो,
अगर मेरे बीते हुए कल को,
मैं समझुंगा की मेरे अच्छे कर्म जाग ग‌ए हैं,
मेरे जिंदगी में भी अब,
खुशियों के बादल छा गए हैं,
हमारे मन का अंधकार‌ अब कम हो ग‌या हैं,
ये सब पापा मेरी माँ को बता दीजिए
मुझे अपने हाथों से तराशकर,
पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए,
अपनी डांट का खजाना पापा,
आज फिर से मुझ पर लुटा दीजिए ,
* * * * *

पत्थर से मूरत(pathar se moorat)बना दो : खामोश पिता की पुकार

 

(pathar se moorat)
(pathar se moorat)

आज मेरा दिल हलका हो गया है,
आपसे बातें करने के बाद,
मुझे अपनापन सा लगने लगा है,
आपसे बातें करने के बाद,
मेरे दिल में उजाला फैलने लगा है,
मेरे दिल में आपके अपनेपन का,
मीठा-मीठा शोर उठने लगा है,
इस प्यारे चेहरे पर सूनापन ठीक नहीं है,
इस प्यारे चेहरे पर निराशा के बादल ठीक नहीं है,
मै आपके दिखाए रास्ते पर,
आँखें बंद करके चल रहा हूँ,
मै आपसे मिले नाम को,
इस जग में चमका रहा हूँ,
मै जब भी घर से निकलूं पापा,
आप थोडा सा मुस्करा दीजिए,
मुझे अपने हाथों से तराशकर,
पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए,
अपनी डांट का खजाना पापा,
आज फिर से मुझ पर लुटा दीजिए ,
* * * * *
मेरी जिंदगी की चाबी,
अपने हाथों में थाम लीजिए,
ये चेहरा गुलाबी अपने हाथों में थाम लीजिए,
मुझे बहुत सकून मिला है,
काफी समय के बाद,
पिता का साथ क्या होता है,
अब मुझे होने लगा है आभास,
इन मेहनती हाथों को पापा,
हमारे सर पर रख दीजिए,
आपके हाथों का थामने का,मन बनाया है,
हम पर बेवजह शक मत कीजिए,
एक बार फिर से मुझको गले लगा लीजिए,
मुझे अपने हाथों से तराशकर,
पत्थर से मूरत (pathar se moorat)बना दीजिए,
अपनी डांट का खजाना पापा,
आज फिर से मुझ पर लुटा दीजिए ,
* * * * *
Creater– राम सैणी
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