दो पहलू (do pahloo ) : अनमोल रिश्ता
मेरे जीवन के दो पहलू (do pahloo ) हैं, दोनों हैं एक समान, हमसफ़र है मेरा एक मित्र के जैसे, […]
मेरे जीवन के दो पहलू (do pahloo ) हैं, दोनों हैं एक समान, हमसफ़र है मेरा एक मित्र के जैसे, […]
बेशुमार क़र्ज़ (beshumar karz) : मैं चुकाऊं कैसे माँ तेरे बेशुमार कर्ज (beshumar karz) हैं मुझ पर उधार ,
घर का बोझ अपने कांधों पर उठाना, क्यों बेटे की जिम्मेदारी है, ये है माँ तेरी बेटी की प्रतिज्ञा (beti
सब चाव पूरे कर लीजिए, जब तक माता-पिता का पहरा है, इस दुनिया में सब रिश्तों से बढ़कर , माता-पिता
हे ईश्वर, अगले जन्म भेजना माँ को, मेरे घर बेटी बनाकर, मैं रखुंगा उसे अपने सर का ताज बनाकर, *
कदम चूमती गई कामयाबी उसके, बेटा छूने लगा सितारे आसमान के (sitare aasman ke ), सब मिला गया धूल में
काश वो प्यार भरी यादें (pyar bhari yaaden ) , वो बचपन का सुहाना दौर, माँ फिर से आ जाए
मेरे जीवन का हर फैसला, उनको लेने का है अधिकार, होश संभाला है जिनकी बाँहों में , मिलता है
मांग लेती है हाथ जोड़कर माँ दुआएं हजार, सबको मालूम है माँ की दुआएं (maa ki duaayen ) तो ,
maayke ghar praai ( मायके घर पराई ) : भावनाओं की दास्तान बचपन से लेकर जवानी तक, मैं ये ही