( nai jeet)

हर दिन न‌ई जीत( nai jeet) : पापा का मजबूत सहारा

Last updated on May 10th, 2026 at 11:31 am

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हम हार जाएं तो वो फिर से जीता सकता है ,
हम गिर जाएं तो वो फिर से उठा सकता है,
सबसे अलग है एक पिता की प्रीत,
पिता का सहारा है हर दिन न‌ई जीत( nai jeet)
माँ के बाद हमारा सच्चा हमदर्द,
सिर्फ एक पिता ही हो सकता है,
आज सफल नहीं हुए तो कोई बात नहीं है,
ऐसा कहने वाला एक पिता होता है,
जिस का कोई सवेरा ना हो,
ऐसी कोई रात नहीं है,
ये समझाने वाला एक पिता होता है,
बच्चों को पंख लगाकर आसमान में,
एक पिता ही उडा सकता है,
हम हार जाएं तो वो फिर से जीता सकता है ,
हम गिर जाएं तो वो फिर से उठा सकता है,
सबसे अलग है एक पिता की प्रीत,
पिता का सहारा है हर दिन न‌ई जीत( nai jeet)
*     *       *        *       *       *

उम्रभर हमारा ख्याल रख सकता है,
कांदे पर अपने हमको बिठाकर,
कांटे हमारी राहों के हटाकर,
संघर्ष से सफलता कैसे मिलती है,
उसके मोटीवेशन से हिम्मत मिलती है,
फूल हमारी जीवन की राहों में,
एक पिता ही बो सकता है,
वो हर पल हमारे साथ चला है,
उबड़-खाबड़ हों चाहे जीवन के रस्ते,
आगे-आगे चलता था बचपन में पिता,
उठाकर हमारे स्कूल के बस्ते,
हमारे दोस्तों की तरह हमारे बस्ते,
एक पिता ही उठा सकता है,
हम हार जाएं तो वो फिर से जीता सकता है ,
हम गिर जाएं तो वो फिर से उठा सकता है,
सबसे अलग है एक पिता की प्रीत,
पिता का सहारा है हर दिन न‌ई जीत( nai jeet)
*     *       *        *       *       *
हाथ पकड़ कर स्कूल छोड आना,
कभी-कभी आँखें दिखाना,
थोडा नरम थोड़ा गर्म,
मेरे जख्मों का इकलौता मरहम,
वो साथ है तो जीत की राह है पक्की ,
हर वक्त मुस्कराना उनकी ये ही बात है अच्छी,
जो ना छाने दे मेरे जीवन में अंधेरा,
पिता है मेरे जीवन का उगता सवेरा,
अधूरा है उसके बिन सारा परिवार,
उसके संग है जीवन में रंग बेसुमार,
हंस तो लेता है पिता सबके सामने पर,
लेकिन दुख में अकेला सबसे छुपकर,
पिता ही रो सकता है,
हम हार जाएं तो वो फिर से जीता सकता है ,
हम गिर जाएं तो वो फिर से उठा सकता है,
सबसे अलग है एक पिता की प्रीत,
पिता का सहारा है हर दिन न‌ई जीत( nai jeet)
*     *       *       *
मेरे जीवन का हर पल हर लम्हा,
बिन पिता के है तन्हा,
पिता प्यार तो करता है पर दिखाता नहीं,
वो कितना भी अकेला हो ,
जीवन में पर किसी से कहता नहीं,
हार ना माने पिता कभी,
जो अपनी मस्त चाल में सदा चलता रहे,
रुकना उसका काम नहीं,
पिता सागर के जैसे सदा बहता रहे,
उस फ़रिश्ते का हर दिन देता है,
हम लोगों को एक नई सीख,
हम हार जाएं तो वो फिर से जीता सकता है ,
हम गिर जाएं तो वो फिर से उठा सकता है,
सबसे अलग है एक पिता की प्रीत,
पिता का सहारा है हर दिन न‌ई जीत( nai jeet)
*     *       *        *       *       *

हर दिन न‌ई जीत( nai jeet) :  जीत की ओर बढ़ते कदम

 

( nai jeet)
( nai jeet)

सबको रखें अपने आँचल की छाँव में,
पीछे मुड़कर ना देखे कभी,
चाहे कितने ही कांटे लगे उसके पाँव में,
परिवार को खुश देखकर,
उनका बढता है आत्मविश्वास,
वो हर सुबह नया जोश भर देते हैं,
जब हमारा चेहरा लगता है निराश,
मेरी कामयाबी है उसकी मेहनत का परिणाम ,
पिता की मुस्कान है मेरे जीवन का ईनाम,
मेरे जीवन की नाव जब फंस जाएं बीच मझधार ,
मेरी बांह पकड़ कर लगाए,
मुझ को उस मझधार से पार,
हम सबको सुलाए सदा चैन की नींद,
खुद एक पल भी कभी,
चैन की नींद नहीं सो सकता है,
हम हार जाएं तो वो फिर से जीता सकता है ,
हम गिर जाएं तो वो फिर से उठा सकता है,
सबसे अलग है एक पिता की प्रीत,
पिता का सहारा है हर दिन न‌ई जीत( nai jeet)
*   *     *      *     *
माँ के सर का अभिमान पिता है,
मेरे सपनों की जान पिता है,
ईश्वर पर उनका अटूट विश्वास है,
उनके चेहरे पर रहता सदा प्रकाश है,
मेरी रग-रग में बहता है उनका खून,
मेरे सपनों को पूरा करना है उनका जनून,
जीवन को मेरे दिया है एक नया मुकाम,
उसके नाम से जुडा है मेरा नाम,
अपने सपनों की आहूति दे देता है,
हमारी ख्वाहिशों के आगे,
तभी कहीं जाकर हमारे सपनों के दीये हैं जगे,
पिता के जैसा ना होगा,
इस जग में ना दुजा  कोई र‌ईस,
हम हार जाएं तो वो फिर से जीता सकता है ,
हम गिर जाएं तो वो फिर से उठा सकता है,
सबसे अलग है एक पिता की प्रीत,
पिता का सहारा है हर दिन न‌ई जीत( nai jeet)
*   *     *      *   *     *      *
वो अपनी आँखें ठंडी करता है,
हमारा चेहरा निहारकर,
हमे जोशिला बनाता है मेरा बच्चा पुकार कर,
वो रखता है खबर मेरे हर-पल की,
पिता करता है चिंता,
मेरे आने वाले कल की,
पिता मुझे बनाकर रखता है बादशाह,
उसे खुद ना है अपनी  परवाह कोई,
हर सितम झेल जाता है वो मसीहा,
उसके दिल से ना निकले आह कोई,
होंगे मेरे बहुत चाहने वाले पर,
उसके जैसा नहीं कोई हो सकता है,
हम हार जाएं तो वो फिर से जीता सकता है ,
हम गिर जाएं तो वो फिर से उठा सकता है,
सबसे अलग है एक पिता की प्रीत,
पिता का सहारा है हर दिन न‌ई जीत( nai jeet)
*           *            *            *           *
creater-राम सैणी
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