मैंने मांगी है एक मन्नत,
माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो,
हमारा प्यारा घर रोशन,
हंसता हुए मिले सदा मेरी माँ का चेहरा,
माँ की हंसी से गूंजे घर हमारा,
मैंने मांगी है ये ही मन्नत,
हर सुबह नंगें पाँव जाकर,
मेरी मन्नत में जीत के रंग भर देना,
जीवन का हर सुख उसके नाम कर देना,
मेरे विश्वास को हे नीली छतरी वाले,
और भी मजबूत कर देना,
हंसता हुआ मिलेगा यदि मेरी माँ का चेहरा,
मैं समझुंगा बंध गया है मेरे सर पर,
आज से कामयाबी का सेहरा,
मैंने मांगी है एक मन्नत,
माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो,
हमारा प्यारा घर रोशन,
हंसता हुए मिले सदा मेरी माँ का चेहरा
* * * * * *
बहुत लंबा संघर्ष तय किया है,
एक अकेली जान ने,
हर घड़ी खुद को साबित किया है,
एक अकेली जान ने,
खुद के लिए जीना भूल गई है,
जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते,
अपने जख्मों को सीना भूल गई है,
जीवन की राहों में अकेले चलते-चलते,
बेकाबू हालात थे हद से बाहर,
उस नीली छतरी वाले के सहारे,
हम लगा बैठे जीवन नौका पार,
धीरे-धीरे हालात बदल रहे थे,
ये देखकर झूम रहा था घर का आंगन,
मैंने मांगी है एक मन्नत,
माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो,
हमारा प्यारा घर रोशन,
हंसता हुए मिले सदा मेरी माँ का चेहरा,
माँ की हंसी से गूंजे घर हमारा,
* * * * * *
हमारे चेहरे पर फैला है रंग गुलाबी,
ये हमारी कामयाबी नहीं है,
ये हैं हमारी माँ की कामयाबी,
बड़ी मजबूती से थामकर रखा है,
हमारे जीवन की पतवार को,
हर गम से ऐसे लडी है,
जैसे उस नीली छतरी वाले का कोई उपहार हो,
कभी कोई शिकायत नहीं देखी है,
मैंने माँ के प्यारे मुख पर,
वो हंसती हुई आगे बढती रही,
हमें साथ लेकर अपने जीवन पथ पर,
हर घड़ी उस नीली छतरी वाले पर,
माँ का रहा है विश्वास गहरा,
मैंने मांगी है एक मन्नत,
माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो,
हमारा प्यारा घर रोशन,
हंसता हुए मिले सदा मेरी माँ का चेहरा,
माँ की हंसी से गूंजे घर हमारा,
* * * * * *
जब भी होता था मन हमारा डांवाडोल,
वो हमें फिर से खडा कर देती थी,
हंसती हुई,बोलकर जोशिले बोल,
हर घड़ी प्राथनाएं करती थी,
हर सप्ताह रखती थी उपवास,
ईश्वर को मानती थी अपना सहारा,
टूटने ना दिया कभी मन का विश्वास,
हम बेचैन-से हो जाते थे ,
हम अनजाने से डर में खो जाते थे,
सुख-दुख है दरिया का बहता पानी,
यूं ही चलती रहेगी ये जिंदगानी,
हमें जोशिली कहानियां सुनाकर,
माँ जोश से भर देती है ,
जब भी हमारा डरता था मन,
मैंने मांगी है एक मन्नत,
माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो,
हमारा प्यारा घर रोशन,
हंसता हुए मिले सदा मेरी माँ का चेहरा,
माँ की हंसी से गूंजे घर हमारा,
* * * * * *
माँ की हंसी (maa ki hansi) मेरा सुकून : मेरा संसार

जब भी डर हमारे सीने में बसता था,
हमारा डर पल में छू-मंतर हो जाता था ,
जब माँ की मजबूत बांहों का घेरा,
हमें चारों ओर से कसता था,
मैं हर सुबह की मीठी शुरुआत करता हूँ,
अपनी माँ का हंसता चेहरा देखकर,
मैं इसे ईश्वर की सौगात मानता हूँ,
जीत की खुशी उनके चेहरे पर देखकर,
मैंने मांगी है एक मन्नत,
अपने दोनों हाथ उठाकर,
मैंने मांगी है एक मन्नत,
माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो,
हमारा प्यारा घर रोशन,
हंसता हुए मिले सदा मेरी माँ का चेहरा,
माँ की हंसी से गूंजे घर हमारा,
* * * * * *
मेरी माँ के सिर पर लहराते हैं,
हमेशा सुनहरी रंग के बाल घूंघराले से,
मेरी एक ही प्रार्थना है उस नीली छतरी वाले से,
जिन खुशियों के पीछे भागे हैं अब तक,
माँ को वो सब खुशियां दे देना,
माँ की खुशी में ही हमारी खुशी है,
उम्र के इस पड़ाव पर,
अपनी दया का मरहम लगा देना,
हे नीली छतरी वाले,उनके हर घाव पर,
अपनी खुशियों का पिटारा अब खुला ही रखना,
हमारे घर में अन्न-धन का भंडारा,
अब खुला ही रखना,
माँ के चेहरे पर खुशियों की चमक देखकर,
मै खुशी से उछल पडता हूँ,
जब भी देखता हूँ मैं दर्पण,
मैंने मांगी है एक मन्नत,
माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो,
हमारा प्यारा घर रोशन,
हंसता हुए मिले सदा मेरी माँ का चेहरा,
माँ की हंसी से गूंजे घर हमारा,
* * * * * *
उनके चेहरे पर हमेशा चमकते रहें,
हंसी के लाखों टिमटिमाते सितारे,
माँ ने पूरी ईमानदारी से निभाए हैं,
अपने जीवन में किरदार सारे,
माँ का आशीर्वाद सदा साथ रहा है,
इसलिए हर दिन खास रहा है,
कभी लड़खड़ाने नहीं दिया,
हमारी जीवन रूपी पतंग को,
कभी फीका नहीं पडने दिया,
हमारे चेहरे के रंग को,
हम मस्त होकर सोते थे,
माँ हमेशा जागती रहती थी,
अपनी जागती आँखों से दिया है पहरा,
मैंने मांगी है एक मन्नत,
माँ की हंसी(maa ki hansi)से हो,
हमारा प्यारा घर रोशन,
हंसता हुए मिले सदा मेरी माँ का चेहरा,
माँ की हंसी से गूंजे घर हमारा,
* * * * * *
Creater-राम सैणी
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