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(jadui hath)

माँ का जादुई हाथ (jadui hath) : मेरा सुरक्षा कवच

मैंने बोल दिया है गर्म हवाओं को,
मुझसे दूर होकर गुजर जाना,
मेरी माँ का जादुई हाथ (jadui hath) है मेरे सर पर,
भूले से भी मत देखना हमारी घर की ओर,
मेरी माँ का पहरा है हमारे घर पर,
एक रात मैं सो ना सका था,
दिनभर के काम से बहुत थका था,
पूरी रात बैठी रही माँ मेरे सिरहाने,
कभी मेरे हाथों को छूती,
कभी लगती मेरा सर दबाने,
वो तुफानों का रुख भी मोड सकती,
अपनी प्रार्थनाओं के दम पर,
मैंने बोल दिया है गर्म हवाओं को,
मुझसे दूर होकर गुजर जाना,
मेरी माँ का जादुई हाथ (jadui hath) है मेरे सर पर,
*          *           *         *         *
वो रो पड़ती है मेरी एक छोटी सी खरोंच पर,
वो अपनी मन्नत पूरी करती है,
हाथों के बल सरक-सरक कर,
माँ हर वक्त तोलती रहती हैं ,
मुझे अपनी नजरों के पैमाने से,
वो हर वक्त बोलती रहती है,
पहले से कमजोर हो गया है,
खाना कम खाने से,
वो मुझे भरपेट खिलाती है,
अपने पेट की भूख कम कर,
मैंने बोल दिया है गर्म हवाओं को,
मुझसे दूर होकर गुजर जाना,
मेरी माँ का जादुई हाथ (jadui hath) है मेरे सर पर,
*          *           *         *         *
अपनी प्रार्थनाओं का धागा,
मेरे गले में बांधकर रखती है,
मेरे बचपन के खिलोनों को,
माँ,आज भी संभालकर रखती है,
आज भी फिक्र करती है माँ,
मेरी एक छोटे बच्चे की तरह,
आज भी हर रोज करती है मेरे लिए प्रार्थना,
वो मुझे आज भी दुआएं देती है,भर-भरकर,
मैंने बोल दिया है गर्म हवाओं को,
मुझसे दूर होकर गुजर जाना,
मेरी माँ का जादुई हाथ (jadui hath) है मेरे सर पर,
भुले से भी मत देखना हमारी घर की ओर,
मेरी माँ का पहरा है हमारे घर पर,
*          *           *         *         *
फूल मुस्कराने लगते हैं जैसे बारीश के बाद,
पेड़ हरे-भरे हो जाते हैं पहली बारिश के साथ,
मुझे कसकर गले से लगा लेती है,
माँ फैलाकर अपने दो हाथ,
मेरे चीची उंगली में रखती है,
वो पहनाकर तांबें की अंगूठी को,
हमारे दरवाजे के एक कोने में बांधकर रखती है,
मैंने जब पहली बार जमीं पर पाँव रखा था,
मेरे उस पाँव की मिट्टी को,
जब पहली बार देखा था,
मैने अपनी माँ का निर्मल चेहरा,
बादल भी बरसे थे उस दिन खूब जमकर,
मैंने बोल दिया है गर्म हवाओं को,
मुझसे दूर होकर गुजर जाना,
मेरी माँ का जादुई हाथ (jadui hath) है मेरे सर पर,
*          *           *         *         *

माँ का जादुई हाथ (jadui hath) :  सबसे बड़ा वरदान

 

(jadui hath)
(jadui hath)

 

जहाँ उम्मीद खत्म होती है,
वहाँ चमत्कार होता है,माँ बोलती है,
सच्चे इंसान के अंदर ईश्वर का वास होता है,
माँ हमेशा बोलती है,
जरा पडना मेरे बेटे की माथे की लकीर को,
माँ पूछती रहती है दरवाजे पर आए फकीर को,
काले तिल दान करती है,
मेरे सर से सात बार घूमाकर,
मैंने बोल दिया है गर्म हवाओं को,
मुझसे दूर होकर गुजर जाना,
मेरी माँ का जादुई हाथ (jadui hath) है मेरे सर पर,
भुले से भी मत देखना हमारी घर की ओर,
मेरी माँ का पहरा है हमारे घर पर,
*          *           *         *         *
मुझे हाथ के पंखे से हवा करती है,
माँ आज भी गर्मी के मौसम में,
घर से मंदिर तक नंगे पाँव जाती है,
माँ आज भी सर्दी के मौसम में,
छोटी-छोटी खुशियों में खुश रहने की,
हर दिन वजह बताती है,
हमारी वजह से हर चेहरे पर मुस्कान हो,
माँ ये जादुई कला सिखाती है,
मेरा मस्तिष्क खुद ही झुक जाता है,
माँ का ये निस्वार्थ प्यार देखकर,
मैंने बोल दिया है गर्म हवाओं को,
मुझसे दूर होकर गुजर जाना,
मेरी माँ का जादुई हाथ (jadui hath) है मेरे सर पर,
*          *           *         *
वो दो जहां का मालिक खुश होता है,
किसी के ज़ख्मों पर मरहम लगाने से ,
सुख-चैन सब छिन जाता है,
किसी बेबस को सताने से,
मुझे सकारात्मक उर्जा से भरकर रखती है,
इन प्रवचनों के साथ,
मेरे चारों ओर एक घेरा बनाकर रखती है,
अदृश्य प्रार्थनाओं के साथ,
मेरी रग-रग में जोश भरती रहती है,
बार-बार मेरे माथे को चूम कर,
मैंने बोल दिया है गर्म हवाओं को,
मुझसे दूर होकर गुजर जाना,
मेरी माँ का जादुई हाथ (jadui hath) है मेरे सर पर,
भुले से भी मत देखना हमारी घर की ओर,
मेरी माँ का पहरा है हमारे घर पर,
*          *           *         *         *
Creater -राम सैणी
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