मैंने भी कर ली है तैयारी पापा,
मुझे भी करनी है हाथी की सवारी(hathi ki savari),
हाथी आने वाला है हमारे गाँव में,
हमारे स्कूल के आंगन में वो डेरा डालता है,
वो आराम करता है पीपल की घनी छाँव में,
हाथी की सवारी कर चुकी हैं,
एक बार मेरी सभी सहेलियां,
मैंने बड़ी माँ को बोला था पिछली बार,
बड़ी माँ तो हर बार बुझाती है नई-नई पहेलियां,
बड़ी माँ दिखाती रही रंग भरकर,
सारा दिन मुझे कागज की नांव में,
मैंने भी कर ली है तैयारी पापा,
मुझे भी करनी है हाथी की सवारी(hathi ki savari),
हाथी आने वाला है हमारे गाँव में,
* * * * *
बड़ी माँ मुझे बार-बार सुना रही थी,
टिमटिमाते तारों वाली कविता को,
दो बार हाथी की सवारी करा चुकी है,
हमारी बड़ी दीदी निकीता को,
मैं मानती हूँ सबसे पहला हक,
बड़ी दीदी का बनता है,
लेकिन हमारे घर में नाम,
आपकी मंझली बेटी का चलता हैं,
हर बार कंजुसी करती है बड़ी माँ,
पैसों को देख-देखकर ही जीती है बड़ी माँ,
बड़ी माँ ने अभी तक हाँ नहीं भरी है,
वो आँखें बंद करके बैठी है सुबह से ध्यान में,
मैंने भी कर ली है तैयारी पापा,
मुझे भी करनी है हाथी की सवारी(hathi ki savari),
हाथी आने वाला है हमारे गाँव में,
* * * * *
मेरी सहेलियां मुझे अंगुठा दिखाकर चिढ़ाती हैं,
अपने मुंह को दाएं-बाएं करके दिखाती हैं,
मेरी एक सहेली ने तो अपने घर में,
हाथी पर बैठी हुई अपने पापा के साथ,
एक बड़ी सी तस्वीर लगा रखी है,
देखो ना पापा, ईश्वर से कितनी प्यारी,
मेरी सहेली ने तकदीर लिखा रखी है,
बड़ी माँ के पीछे-पीछे घूमकर,
छाले पड गए हैं, मेरे कोमल पाँव में,
मैंने भी कर ली है तैयारी पापा,
मुझे भी करनी है हाथी की सवारी(hathi ki savari),
हाथी आने वाला है हमारे गाँव में,
हमारे स्कूल के आंगन में वो डेरा डालता है,
वो आराम करता है पीपल की घनी छाँव में,
* * * * *
कल के दिन घर पर रहना पापा,
मुझे दोबारा ना कहना पड़े पापा,
मेरे साथ छोटे भाई को भी हाथी पर बिठाना,
कल सुबह जल्दी उठकर उसे नहलाना,
कितना मज़ा आता है पापा,
जब हाथी के पीछे-पीछे भागते हैं,
गाँव के सारे छोटे-छोटे बच्चे,
कितना मज़ा आएगा पापा,
जब मैं भी खडी होकर देखूंगी,
हाथी की सूंड के नीचे,
अब मेरे आगे बिल्कुल भी नहीं चलेगी,
बड़ी माँ की होशियारी है पापा,
मैंने भी कर ली है तैयारी पापा,
मुझे भी करनी है हाथी की सवारी(hathi ki savari),
हाथी आने वाला है हमारे गाँव में,
* * * * *
हाथी की सवारी (hathi ki savari) का उत्साह : मेरी खुशी

मैंने देखा था पिछली बार,
हाथी को गाँव में आते हुए,
मैंने देखा था पिछली बार,
हाथी को गन्ना खाते हुए,
एक बड़े-से मुंह के साथ,
उसके दो लंबे-लंबे दांत हैं,पापा,
इतने ऊँचे जानवर पर बैठना,
मेरे लिए बडे गर्व की बात है,पापा,
बस एक ही फरमाईस आपसे है हमारी पापा,
मैंने भी कर ली है तैयारी पापा,
मुझे भी करनी है हाथी की सवारी(hathi ki savari),
हाथी आने वाला है हमारे गाँव में,
हमारे स्कूल के आंगन में वो डेरा डालता है,
वो आराम करता है पीपल की घनी छाँव में,
* * * * *
गाँव की गलियों में सुबह-सुबह,
सब बच्चे शोर मचा रहे हैं पापा,
एक के बाद एक गली के सब बच्चे,
हाथी के आने की खबर सुना रहे हैं पापा,
ये खबर सुनते ही आपकी मंझली बेटी,
खुशी से उछल पड़ी ,
अपने पापा को लेकर मैं,घर से निकल पड़ी,
कुछ ही देर में दरवाजे पर,
एक बडा सा हाथी आ गया,
हाथी को देखकर मेरे चेहरे पर,
खुशी का उजाला छा गया,
मेरा हाथ पकड़ कर पापा ने,
मुझे हाथी पर बिठा दिया,
सच में पापा ने,आज मेरा सपना पूरा कर दिया,
आपकी बेटी शेरनी बन जाती है पापा,
आपके प्यार की छांव में,
मैंने भी कर ली है तैयारी पापा,
मुझे भी करनी है हाथी की सवारी(hathi ki savari),
हाथी आने वाला है हमारे गाँव में,
* * * * *
मैंने अपने गाँव के दो चक्कर लगाए,
अपने भाई के साथ हाथी पर बैठकर,
मैंने अपनी सहेलियों को हाथ हिलाए,
अपने भाई के साथ हाथी पर बैठकर,
पापा ने निकाली है मेरी एक तस्वीर,
खिलखिलाते हुए चेहरे के साथ,
फिर पापा ने उतारा मुझे हाथी से,
अपने बढ़ाकर दोनों हाथ,
मेरे सर से लाल मिर्चों को वारकर,
आज बड़ी माँ ने,मेरी नज़र है उतारी पापा,
मैंने भी कर ली है तैयारी पापा,
मुझे भी करनी है हाथी की सवारी(hathi ki savari),
हाथी आने वाला है हमारे गाँव में,
हमारे स्कूल के आंगन में वो डेरा डालता है,
वो आराम करता है पीपल की घनी छाँव में,
* * * * *
Creater- राम सैणी
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