Last updated on April 7th, 2026 at 05:39 pm
माता-पिता की जिंदगी में आते हैं,
ये दर्दनाक पल (Dardnak pal) दो बार ,
पहली बार जब बेटी जाती है घर पराए,
दुसरी बार जब बेटा अपने फर्ज से आँखें चुराए,
बेटी की डोली उठने के बाद,
हम कैसे रोके अपने आंसूओं का सैलाब,
वो रौनक थी हमारे चेहरे की,
आज किसी और घर की रौनक बन गई,
वो हमारे घर की रौशनी थ्री,
आज किसी और घर की रौशनी बन गई,
हर बात में समझदारी,
हर बात करती थी वजनदार,
माता-पिता की जिंदगी में आते हैं,
ये दर्दनाक पल (Dardnak pal) दो बार ,
पहली बार जब बेटी जाती है घर पराए,
दुसरी बार जब बेटा अपने फर्ज से आँखें चुराए।
* * * * *
मात-पिता को छोड़कर बेटी जब जाती है,
बेटी के जाने के बाद मात-पिता को,
उसकी बहुत याद आती है,
यादें उसके बचपन की,
बहुत-कुछ कह जाती हैं,
सर झुकाकर संस्कारी बेटियां,
सब-कुछ सह जाती हैं,
बेटी का हर काम में हाथ बंटाना,
उसका रुठना और मनाना,
ये ही सब हमें बहुत भाते हैं,
हम पूरी कोशिश करते हैं,
मगर फिर भी आँखों से आंसू छलक जाते हैं,
बेटी है जान हमारी बेटी से जुड़े हैं दिल के तार ,
माता-पिता की जिंदगी में आते हैं,
ये दर्दनाक पल (Dardnak pal) दो बार ,
पहली बार जब बेटी जाती है घर पराए,
दुसरी बार जब बेटा अपने फर्ज से आँखें चुराए।
* * * * *
मात-पिता का दिल उस वक्त बहुत घबराएं
जब बेटा अपने फर्ज से आँखें चुराए,
जो रहता था कभी आँचल में छुपकर,
वो ही अब बात- बात पर आँखें दिखाएं,
उम्मीद की डोर धीरे -धीरे टूटने लगी है,
शायद किस्मत भी हम से अब रूठने लगी है,
क्या ये दिन भी देखने बाकी थे,
हे मेरे परवरदिगार,
माता-पिता की जिंदगी में आते हैं,
ये दर्दनाक पल (Dardnak pal) दो बार ,
पहली बार जब बेटी जाती है घर पराए,
दुसरी बार जब बेटा अपने फर्ज से आँखें चुराए।
ये देखकर माता-पिता टूट जाते हैं बार-बार,
* * * * * *
जिसको मानते थे अपनी जिंदगानी,
अब उसे कोई फर्क नहीं पड़ता,
देखकर हमारी आँखों का छलकता पानी,
भुल गया हमारे उपकार,
शायद हम सही से नहीं दे पाए उसको संस्कार,
बुढ़ापा गुजरेगा आराम से,
नहीं थी इस बात की परवाह,
जो देख रखें थे सपने,सब हो गए स्वाह,
फीके हो गए सब रिश्ते -नाते ,
फीका हो गया हमारा प्यार ,
माता-पिता की जिंदगी में आते हैं,
ये दर्दनाक पल (Dardnak pal) दो बार ,
पहली बार जब बेटी जाती है घर पराए,
दुसरी बार जब बेटा अपने फर्ज से आँखें चुराए।
* * * * *
जिंदगी के सबसे दर्दनाक पल (Dardnak pal) : रिश्तों का बदलता रंग

बेटी हमारी आज भी हम पर जान वार दे,
बिगड़े हमारे सब काम संवार दे,
एक बेटी है जो दो घरों की जिम्मेदारी निभाए,
दुसरा बेटा है जिसकी नज़रों में,हम हो गए पराए,
बेटी के साथ एक पराए बेटे से भी,
एक करीबी रिशता जुड गया है,
वो अनजान बेटा भी हमारे कदमों में झुक गया है,
बेटी तो निभा रही हैं अपनी जिम्मेदारी,
उसके साथ ही पराया बेटा भी,
हमारी जिम्मेदारी उठाए,
माता-पिता की जिंदगी में आते हैं,
ये दर्दनाक पल (Dardnak pal) दो बार ,
पहली बार जब बेटी जाती है घर पराए,
दुसरी बार जब बेटा अपने फर्ज से आँखें चुराए।
* * * * * *
इस नए ज़माने की हवा में अब वो खो गया है,
राम जाने क्यों इतना निर्मोही हो गया है,
जिसके कदमों के नीचे रखते थे हम हाथ कभी,
क्यों हमारा नहीं भाता है उसको साथ अभी,
जिसे बोलते थे धन पराया
वो आज भी अपनी लगती है,
जिसे समझते थे दिल का टुकड़ा,
वो दिल टुकड़े -टुकडे कर गया,
जहाँ भी रहे वो खुश रहे ,
ये ही है मात -पिता के दिल की पुकार ,
माता-पिता की जिंदगी में आते हैं,
ये दर्दनाक पल (Dardnak pal) दो बार ,
पहली बार जब बेटी जाती है घर पराए,
दुसरी बार जब बेटा अपने फर्ज से आँखें चुराए।
* * * * *
creater-राम सैणी
Read more sweet poetry
Click here–> माँ का मॉर्निंग अलार्म ( maa ka morning alarm ) : आलस पर वार ,
Click here–> बेटी का जन्मदिन ( janmdin ) : इंतज़ार का दिन



