माँ तुम्हारे हाथों से लिया हुआ,
एक सिक्का( ek sikka ) गोल-गोल था,
जो मुझे देती थी तुम बचपन में,
माँ वो सिक्का कितना अनमोल था ,
उस एक सिक्के पर आज के जमाने के,
हजारों रुपए कुर्बान हैं माँ,
तुम्हारा इस तरह से प्यार जताना देखकर,
हमारी नज़रों में बढ़ जाता है,
आपका सम्मान है माँ,
कितना प्यारा लगता था,
तुम्हारे मुंह से निकला हुआ हर मीठा बोल था,
माँ तुम्हारे हाथों से लिया हुआ,
एक सिक्का( ek sikka ) गोल-गोल था,
जो मुझे देती थी तुम बचपन में,
माँ वो सिक्का कितना अनमोल था ,
* * * * *
हर रोज स्कूल जाने के समय,
मेरा नाज-नखरे दिखाना,
दो कदम आगे बढाना,
चार कदम पीछे आ जाना,
फिर आपका बांहों में लेकर,
चलता था मुझको मनाना,
मुझको सफल बनाना ,
तुम्हारे जीवन का गोल था,
माँ तुम्हारे हाथों से लिया हुआ,
एक सिक्का( ek sikka ) गोल-गोल था,
जो मुझे देती थी तुम बचपन में,
माँ वो सिक्का कितना अनमोल था ,
* * * * *
फिर तुम प्यार से एक सिक्का,
मेरे हाथों में थमा देती थी,
फिर तुम थोडा सा से मुस्करा कर,
मुझको मना लेती थी,
एक सिक्का एक वादा,
तुम हर रोज किया करती थी,
मैं अपनी शिकायतों का पिटारा खोल देता था,
जब तुम मुझे अपनी बाहों में लिया करती थी,
मेरी शिकायतें कभी खत्म ना होने वाली थी,
सारे घर में माँ तुम्हारे प्यार की हरियाली थी,
घर में छाया रहता था एक प्यारा माहोल था,
माँ तुम्हारे हाथों से लिया हुआ,
एक सिक्का( ek sikka ) गोल-गोल था,
जो मुझे देती थी तुम बचपन में,
माँ वो सिक्का कितना अनमोल था ,
* * * * *
बचपन की वो यादें मेरे तन-मन में बसी हुई हैं,
आज भी कुछ बातें मेरी डायरी में लिखी हुई हैं,
माँ तुम्हारा एक सिक्का बचपन में,
हमें अमीर बनाकर रखता था,
मेरे पास हैं सारे जहां की दौलत,
बस मुझे ये ही लगता था,
वो सिक्का तुम्हारे प्यार की निशानी थी,
उस वक्त कितनी हसीं जिंदगानी थी,
गली में खेलते थे दोस्तों के साथ,
हमारे हाथों में होता था एक रोटी का रोल था,
माँ तुम्हारे हाथों से लिया हुआ,
एक सिक्का( ek sikka ) गोल-गोल था,
जो मुझे देती थी तुम बचपन में,
माँ वो सिक्का कितना अनमोल था ,
* * * *
वो एक सिक्का ( ek sikka ) : बचपन की मीठी यादें

जब भी मेरा तुम्हारे हाथों से,
एक सिक्का लेने का मेरा मन होता था,
मैं कोई ना कोई बहाना करके रोता था,
मुझे पता था मेरी ज़िद्द कौन पूरी करेगा ,
एक मेरी माँ के सिवा,
मुझे अच्छी तरह से पता था,
माँ जैसा कोई प्यार नहीं कर सकता,
एक मेरी माँ के सिवा,
माँ के हाथों से लिया हुआ,
हर तोहफा अनमोल था,
माँ तुम्हारे हाथों से लिया हुआ,
एक सिक्का( ek sikka ) गोल-गोल था,
जो मुझे देती थी तुम बचपन में,
माँ वो सिक्का कितना अनमोल था ,
* * * * *
सच में बचपन वाला माहोल,
माँ कितना प्यारा लगता था,
एक सिक्का भी अनमोल खजाना लगता था,
काश वो ही दौर फिर से आ जाए,
वो ही बचपन वाली मस्ती फिर से छा जाए,
माँ फिर से वो ही सिक्का एक बार,
मेरे हाथ पर रख दो दोबारा,
तुम्हारे एक सिक्के के आगे,
छोटा लगता था ये जहान सारा,
ना कोई अपना-पराया था,
ना दिल में नफ़रत का जाल था,
माँ तुम्हारे हाथों से लिया हुआ,
एक सिक्का( ek sikka ) गोल-गोल था,
जो मुझे देती थी तुम बचपन में,
माँ वो सिक्का कितना अनमोल था ,
* * * * *
ये प्यारा चेहरा रहे सदा हंसता-मुस्कराता ,
मैंने प्रार्थना की है राम से,
ये पेड़ हमेशा हरा-भरा रहे,
जिसकी छाँव तले हम रहते हैं आराम से,
वो सिक्कों का सिलसिला माँ आज भी,
चल रहा है लगातार,
ना उस जमाने में अपने-पराए का पता था,
ना कोई मोल-तोल था,
माँ तुम्हारे हाथों से लिया हुआ,
एक सिक्का( ek sikka ) गोल-गोल था,
जो मुझे देती थी तुम बचपन में,
माँ वो सिक्का कितना अनमोल था ,
* * * * *
creation -राम सैणी
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वो माँ के प्यार जताने का,



