(nisvarth preet)

माँ की निस्वार्थ प्रीत(nisvarth preet): माँ का पवित्र सम्मान

Last updated on July 16th, 2026 at 06:00 pm

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तुम क्या जानो माँ के प्यार के गीत,
सबसे अलग है माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet),
कभी हाथ पकड़ा कभी गोद में उठाया है,
उस माँ को मत दिखाओ,
जोर अपनी जुबान का,
जिस माँ ने तुम्हे बोलना सिखाया है ,
कभी घोडा बनकर हमें अपनी पीठ पर बिठाया है
कभी अपने पाँव पर बिठाकर,हवा में लहराया है
वो समझ लेती थी हमारी तोतली जुबान को,
मेरा बच्चा,मेरी जान कहकर,
और बढा देती थी हमारे सम्मान को,
तुम क्या जानो माँ एक लहर है ठंडी शीत,
तुम क्या जानो माँ के प्यार के गीत,
सबसे अलग है माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet),
*     *        *         *        *
वो आराम से सोती थी हमारे गीले बिस्तर पर,
अपने सीने पर सुलाती थी,
अपनी सब तकलीफें भूलकर,
वो जननी है वो रक्षक है,
वो पहरेदार है हमारे जीवन की,
माँ ज्वाला है,माँ शेरनी है,
वो खड जाती है सीना तानकर,
जब भी बात आती है हमारे जीवन की,
तुम क्या जानो हमारी जीत ही,
माँ की है असली जीत ,
तुम क्या जानो माँ के प्यार के गीत,
सबसे अलग है माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet),
*     *        *         *        *
हम कैसे भूल जाएं ऐसे इन्सान को,
सब रिश्तों में कोई ना कोई स्वार्थ छुपा है,
निस्वार्थ है माँ की प्रीत यहाँ,
माँ को मानते हैं ईश्वर के बराबर,
माँ के चरणों में सर झुकाने की रीत यहाँ,
बेमिसाल है प्यार उसका,
जिसने हम पर अनमोल प्यार बरसाया है,
तुम क्या जानो माँ के प्यार के गीत,
सबसे अलग है माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet),
कभी हाथ पकड़ा कभी गोद में उठाया है,
उस माँ को मत दिखाओ,
जोर अपनी जुबान का,
जिस माँ ने तुम्हे बोलना सिखाया है !
*       *           *           *
माँ ईश्वर का एक रुप है प्यारा,
माँ बिन नहीं एक पल भी गुजारा,
टूट जाता है माँ का दिल,
जब बात करते हो तुम ऊंची ज़ुबान से,
उससे बढ़कर नहीं कोई अपना है,
इस स्वार्थी ज़हान में,
माँ एक चमकता सितारा है,
माँ स्वाभिमान हमारा है,
माँ बिन अंधकार छा जाता है,
घर में सुनापन हो जाता है,
तुम क्या जानो माँ के साथ हंसते-खेलते,
पता ही नहीं चलता दिन कब जाता है बीत,
तुम क्या जानो माँ के प्यार के गीत,
सबसे अलग है माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet),
*     *        *         *        *

माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet) : माँ का प्रेम अमर 

 

(nisvarth preet)
(nisvarth preet)

वो हैं नादान जो माँ का ना करें सम्मान,
माँ का सम्मान मेरा ईमान,
जो जीती है देखकर सूरत हमारी,
जो हमारे दिल का हाल जान ले,
पढ़कर आँखें हमारी,
जिसकी आँखों में नहीं है,
माँ के लिए प्यार,
उसके जीवन में रहेगा सदा दुखों का अंधकार,
माँ का आँचल है संसार हमारा,
इस संसार में मैंने दो जहां का सुख पाया है,
तुम क्या जानो माँ के प्यार के गीत,
सबसे अलग है माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet),
कभी हाथ पकड़ा कभी गोद में उठाया है,
उस माँ को मत दिखाओ,
जोर अपनी जुबान का,
जिस माँ ने तुम्हे बोलना सिखाया है
*     *       *         *        *
ऊँची ज़ुबान माँ का अपमान,
माँ का अपमान ईश्वर का अपमान,
वो मूरत है त्याग की,सह लेगी हर अपमान,
क्योंकि माँ है महान,
वो है जगती ज्योती प्यार की,
माँ है सच्ची प्रीत इस संसार की,
उसकी आँखों से आंसू ना छलकें,
चलो हम ऐसा संसार बनाएं मिल के,
जहाँ माँ की ममता हो सर आँखों पर,
उसके लिए प्यार ही प्यार हो,
हम-सबकी पलकों पर,
माँ की प्रीत के आगे झूठी है इस संसार की प्रीत ,
तुम क्या जानो माँ के प्यार के गीत,
सबसे अलग है माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet),
*     *        *         *
दिल दुखाकर माँ का,
तुम चाहे दिल जीत लो इस पूरे जहां का,
एक पल ना मिलेगा दिल को चैन,
हंसी गायब हो जाएगी होंठों से,
शर्म से झुके रहेंगे तुम्हारे नयन,
हर खुशी होगी कदमों में उसके,
जिसने माँ के कदमों में अपना संसार बसाया है,
तुम क्या जानो माँ के प्यार के गीत,
सबसे अलग है माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet),
कभी हाथ पकड़ा कभी गोद में उठाया है,
उस माँ को मत दिखाओ,
जोर अपनी जुबान का,
जिस माँ ने तुम्हे बोलना सिखाया है,
*      *      *       *         *
creater-राम सैणी
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