माँ के आंचल की खुशबू ( aanchal ki khushboo ) : ममता की छतरी
गुलाब के फूलों से भी प्यारी है, माँ तेरे आंचल की खुशबू ( aanchal ki khushboo ) , जी चाहता है […]
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गुलाब के फूलों से भी प्यारी है, माँ तेरे आंचल की खुशबू ( aanchal ki khushboo ) , जी चाहता है […]
आज फिर से लौट आया है, माँ का दुसरा बचपन (maa ka dusara bachpan ), अब बच्चों के जैसे
माँ के कदमों में ( maa ke kadmon me) रखता हूँ, मैं आज भी अपनी नेक कमाई को, मैं
ससुराल अमीर नहीं है तो कोई बात नहीं, लेकिन हमसफ़र दिल का अमीर ( dil ka amir ) चाहिए, मेरी
बाबूल का आंगन ( babul ka aangan ) छोड़कर, नाजों से पली,मेरी लाडली जो गई है, ऐसे लगता है जैसे
पुराने जमाने की पढ़ी-लिखी है, जुबां की थोड़ी-सी तीखी हैं, मैले कपड़ों से परहेज़ है, बड़ी माँ का पहरा
पापा आपकी लाडली ( papa aapki ladli ) , आपकों ढूंढने है निकली, आप बैठ गए हो कहाँ छूपकर, मैं
बेटों का अभिमान (beton ka abhiman ) ना कर, बेटे नहीं हैं सुख की वजह, बेटों वाले मात-पिता भी, आजकल
औलाद से हारकर आए हैं, वृद्ध-आश्रम में एक और पिता(ek aur pita ), मन पर एक बोझ लेकर आए हैं,
खुद ही झुक जाता है उनके आगे मेरा सर, पिता की वजह से (pita ki vajah se ) मुस्कराता