परिवार की सच्ची पहचान (sachchi pahchan ) : रिश्तों की मिठास
एक संस्कारी परिवार की, ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan ) जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान, ये देखकर
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एक संस्कारी परिवार की, ये ही है सच्ची पहचान (sachchi pahchan ) जहाँ होता है दादा-दादी का मान-सम्मान, ये देखकर
माता-पिता की जिंदगी में आते हैं, ये दर्दनाक पल (Dardnak pal) दो बार , पहली बार जब बेटी जाती है
खुली हवाओं में सांस लेती बेटियां, वो भी चाहती है छूना आसमान, ऊँचे आसमान में हर दिन, उड़ान भरती
एक बाप के सिर का गुरुर हैं, माँ के चेहरे की मुस्कान है, वो घर सदा बुलंदियों पर रहता है,
माँ से प्यारी क्यों उसकी कमाई हो गई, आज दोनों बेटों में लड़ाई हो गई, कुछ दिन रहेगी माँ मेरे
ईश्वर ने अपनी मूरत, माँ के रूप में सजाई है, ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ,
पिता है मेरी पहचान,पिता ही मेरे विधाता हैं, पिता ही मेरे मेरे सपनों के निर्माता(sapnon ke nirmata)हैं, वो हैं मेरा
बिन मात-पिता के हर घर अनाथ है, दोष नहीं किसी एक का (dosh nahin kisi ek ka ), मात-पिता को
तुम क्या जानो माँ के प्यार के गीत, सबसे अलग है माँ की निस्वार्थ प्रीत (nisvarth preet), कभी हाथ पकड़ा
वक्त बदल गया लोग बदल गए, बदल गया संसार, आज भी जो नहीं बदला है, वो है माँ का पवित्र