माँ की ममता का कोई मोल नहीं (maa ki mamta ka koi mol nahin )
मुझे आंखों से ना ओझल होने दिया, जिस माँ की गोद में होश संभाला है, सच में माँ की ममता […]
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मुझे आंखों से ना ओझल होने दिया, जिस माँ की गोद में होश संभाला है, सच में माँ की ममता […]
माता-पिता बुढ़ापे में, ठोकरें खाते -खाते ना गुम हो जाएं, अगर मेरे देश के हर घर में, एक श्रवण-सा बेटा
मैं चूम लेता हूँ हर सुबह, अपने पिता के हाथों कों, उसकी आँखें रहती है लाल हर पल, शायद वो
संस्कारी बेटी का गर्व (sanskari beti ka garv) है खुद पर , समाज में ये चलेगा कब तक , दहेज
सच्चा साथी माँ (sachha saathi maa ) के जैसा , क्या कोई हो सकता है दूसरा ऐसा , माँ करती
बोझ पिता के कांधे का, मैं अपने कांधे पर उठाऊं, गहरा प्रेम पिता संग (gahra prem pita sang ) है
पिता का साथ (pita ka sath), जैसे खुशियों की बरसात, चाहे लंबा सफर है फिर कैसा डर है, जब पिता
बिन बच्चों के हर घर सूना, बच्चों संग लगे ये दुनिया प्यारी, रब जाने मेरे आंगन में, कब गुंजेगी बच्चों
नींद में सोते हुए बच्चों पर, माँ की जागती आँखों का पहरा होता है, सच कहते हैं संत-फकीर, माँ
जो समझ गया जीवन का सत्य (jeevan ka Satya), उसे बाकी सब-कुछ लगेगा मिथ्या , ये सब संत-फकीर बताते भी,