दुनिया के रंग (Duniya ke rang) : बलिदानी माँ
एक आँख से देखा करती थी, माँ इस दुनिया के रंग (Duniya ke rang) सारे, माँ को देखकर सब ताने […]
Your blog category
एक आँख से देखा करती थी, माँ इस दुनिया के रंग (Duniya ke rang) सारे, माँ को देखकर सब ताने […]
पिता ज्यादा पढ़ा-लिखा तो नहीं था, पर तजुर्बा बेमिसाल (tajurba bemisal) था, कोई क्या बराबरी करेगा उसकी, अरे वो तो
माँ चली गई कहीं बादलों के पार (badlon ke paar) वो सूना हो गया घर का मंदिर, सूना हो गया
समाज की धरोहर ( samaj ki dharohar ) है, प्यार का सरोवर है , दिल का टुकड़ा बना लेती है
चाँद की रौशनी भी शर्माए, सूरज का उजाला भी फीका पड़ जाए मेरी बेटी गुड़िया (beti gudiya ) के जैसे
मैंने माथा रगडा हर चौखट पर, मात-पिता के चरणों को छोड़कर, वो तड़पते रहे पर मैं खुश था, मात-पिता से
जान हथेली पर रखकर (jaan hatheli par rakhkar ) , मुझको ये जीवन दान दिया, पहली प्रार्थना उस माँ के लिए,
जब तक चले माँ तेरे सांसों की डोरी (saanson ki dori ), तूं मन्द-मन्द मुस्काए, तेरे पाँव फिसलने से पहले
एक अलबेला शायर (albela shayar ) -सा, वो हर एक बस्ती में रहता है, खोया-खोया-सा रहे, पता नहीं वो कौन-सी
दान-दहेज (Daan-Dahej ) भी चाहिए, बहु संस्कारी भी, बिन बोले सब लेकर आएगी, बहु हमारी भी, *