तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां,
हंसती-खेलती रहती हैं पापा,
ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे लिए,
अपने मन की बात,जिस आंगन में बेटियां,
बिना डरें खुलकर करती है पापा,
ऐसा ही आंगन ढूंढना मेरे लिए,
हमारे आंगन से मिलता-जुलता हो,
जहाँ बेटे और बेटियों का,
एक बराबर राज चलता हो,
काजल बनकर जिस आंगन में बेटियां ,
सबकी आँखों में रहती हैं पापा,
ऐसा ही आंगन ढूंढना मेरे लिए,
तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां,
हंसती-खेलती रहती हैं पापा,
ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे लिए,
* * * * * *
जिस आंगन की मिट्टी में बेटियां,
घर बनाकर खेलती हैं,
जिस आंगन में बेटियां,
आँखों से आँखें मिलाकर बोलती हैं,
जहाँ आजादी हो,खुलकर हंसने की,
जहाँ आजादी हो,पंख फैलाकर उड़ने की,
पांबंदी नहीं,बस मर्यादा हो,
बात-बात पर बेटियों का,
ना दिल दुखाने का इरादा हो,
कोई मुंह ना फुलाकर बैठे,
हमारे हंसने-मुस्कुराने से,
किसी को कोई आपत्ती ना हो,
हमारे खिलखिलानें से,
जिस आंगन की मिट्टी को छूकर,
खुद को तरोताजा समझती हैं बेटियां,
ऐसा ही आंगन ढूंढना मेरे लिए,
तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां,
हंसती-खेलती रहती हैं पापा,
ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे लिए,
* * * * * *
बेटियों के पैदा होने पर,
जिस आंगन में बजते हों ढोल-नगाड़े,
बेटियों के ज्यादा होने पर,
जिस आंगन में,माँ-बेटी को ना लताड़ें,
जहाँ छोटी उम्र में बेटियों पर,
ना शादी का दबाव हो,
जहाँ बेटियों को हर रोज,
छोटी-छोटी चीजों का ना अभाव हो,
सुबह-सुबह जिस आंगन में बेटियां,
खिल-खिलाकर उठती हैं पापा,
ऐसा ही आंगन ढूंढना मेरे लिए,
तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां,
हंसती-खेलती रहती हैं पापा,
ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे लिए,
* * * * * *
जहाँ पढ़-लिखने का अधिकार मिले,
सपनों के जैसा घर-परिवार मिले,
जहाँ बहू और बेटी रहती हो,
सखी-सहेलियों की तरह,
एक ही छत के तले,
जिस आंगन में सास डांटे,माँ बनकर,
प्यार भी करें,हर रोज जमकर,
जहाँ सासऔर बहू में माँ-बेटी जैसा रिश्ता हो,
जिस घर में बहू को भी भरपूर सम्मान मिलता हो,
जहाँ बहूएं भी अपने मायके की तरह,
बिना दबाव के रहती हैं पापा,
ऐसा ही आंगन ढूंढना मेरे लिए,
तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां,
हंसती-खेलती रहती हैं पापा,
ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे लिए,
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ऐसा आंगन ढूंढना पापा (esa angan dundna papa) : खुशियों से भरा आंगन

जिस दहलीज पर मेरी खामियां और खूबियां,
सबको लगें एक बराबर,
जहाँ अपमान के कड़वे घूंट ना पिने पड़ें,
बहू और बेटी को मिले एक समान आदर,
नफ़रत दिलों में हो,नमक की तरह,
प्यार हो दिलों में,फूलों की खुशबू की तरह,
जहाँ मेरी खामोशी पर सवाल ना उठें,
मेरे सामने मेरे माता-पिता को,
कभी भला-बुरा ना कहें,
बहू हो या जिस आंगन में बेटियां,
सर पर दुपट्टा रखती हैं पापा,
ऐसा ही आंगन ढूंढना मेरे लिए,
तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां,
हंसती-खेलती रहती हैं पापा,
ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे लिए,
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औरत की इज्जत हो,उसकी आँखों में पापा,
जिसके हाथों में मेरे जीवन की डोर हो पापा,
बिल्कुल आपके जैसा हमसफ़र हो ,
जो मेरे नाज-नखरे,उठा सकता हो,
हमेशा मुझसे बात करते वक्त,
मीठी रखे वो अपनी जुबान को,
कभी ठेस ना लगने दें,
वो मेरे आत्म-सम्मान को,
मैं बरखा,वो बादल के जैसा हो,
वो मेरी आँखों के काजल के जैसा हो,
जहाँ हमसफ़र भी पलकों पर बिठाकर रखें,
जैसे पापा की पलकों पर रहती हैं बेटियां,
ऐसा ही आंगन ढूंढना मेरे लिए,
तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां,
हंसती-खेलती रहती हैं पापा,
ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे लिए,
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मेरी परवरिश पर,कभी कोई सवाल ना उठे,
मेरी एक छोटी सी गलती पर,
घर में कभी कोई बवाल ना उठे,
कुछ आप देख लेना पापा,
बाकी किस्मत का खेल है,
थोडा झुकना पडे,तो कोई बात नहीं,
ये पवित्र बंधन भी जन्मों-जन्मों का मेल है,
लक्ष्मी मानकर जिस आंगन में बेटियो को,
सर-आँखों पर बिठाकर रखतें हैं पापा,
ऐसा ही आंगन ढूंढना मेरे लिए,
तितली की तरह जिस आंगन में बेटियां,
हंसती-खेलती रहती हैं पापा,
ऐसा आंगन ढूंढना पापा(esa angan dundna papa) मेरे लिए,
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Creater -राम सैणी
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