(anmol sabak)

पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak) : पापा की सफलता

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पापा के बचपन का कोई किस्सा सुना दीजिए,
जो बात आपके दिल को छू गई हो बड़ी माँ,
वो बात हमें भी बता दीजिए,
पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak), बड़ी माँ,
हमें भी सिखा दीजिए ,
कामयाबी की राहें जाती हैं,
क्या माँ के पैरों से  होकर,
अमृत वेले में उठना चाहिए,
क्या हम सबको सोकर,
उनके बचपन का हर पल,
कहानी बनाकर सुना दीजिए,
पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak), बड़ी माँ,
हमें भी सिखा दीजिए ,
*          *         *          *          *
चल इधर आकर बैठ मेरी गोद में,
तुम्हारे पापा के बचपन के किस्से,
खुश होकर सुनाऊं हर रोज़ मैं,
वो बचपन से ही पैसें को जोड़कर रखता था,
जितनी जरूरत है बस उतना ही खर्चता था,
ज्यादा पैसा नहीं होता था पहले लोगों के पास,
आजकल की तरह,
लोग बूंद-बूंद बचाकर रखते थे,
मीठे जल की तरह,
पैसा कैसे बढता है हर रोज,
वो गुप्त रहस्य हमे भी बता दीजिए,
पापा के बचपन का कोई किस्सा सुना दीजिए,
जो बात आपके दिल को छू गई हो बड़ी माँ,
वो बात हमें भी बता दीजिए,
पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak), बड़ी माँ,
हमें भी सिखा दीजिए ,
*          *         *          *          *
वो मेरे पीछे-पीछे चलता था,अकड़कर,
मेरे दुपट्टे का एक कोना रखता था पकड़कर,
मैंने डराया नहीं उसे कभी,आँखों की घूर से,
ज्यादा परेशान भी नहीं करते थे,
तुम्हारे पापा मुझे शुरू से,
बात-बात पर नहीं रोते थे,
रात को मुझे बोलकर सोते थे ,
कल सुबह मुझे,माँ। जल्दी उठा दीजिए,
पापा के बचपन का कोई किस्सा सुना दीजिए,
जो बात आपके दिल को छू गई हो बड़ी माँ,
वो बात हमें भी बता दीजिए,
पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak), बड़ी माँ,
हमें भी सिखा दीजिए ,
*          *         *          *          *
कोई और आदत पापा के बचपन की,
जिसने छू ली हो डोर आपके मन की,
धीरे-धीरे करके बड़ी माँ,
हर पल सांझा कीजिए हम से,
पापा के बचपन का,
कोई और किस्सा सुनाइए,उनके सादेपन का,
क्या शुरू से ही उनकी जुबां पर मीठापन था,
आज पुरी कहानी सुनने का,
आपके लविस का मन है,
पापा के जीवन की कहानियां सुनाकर बड़ी माँ,
आज इस घर को मंदिर सा बना दीजिए
पापा के बचपन का कोई किस्सा सुना दीजिए,
जो बात आपके दिल को छू गई हो बड़ी माँ,
वो बात हमें भी बता दीजिए,
पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak), बड़ी माँ,
हमें भी सिखा दीजिए ,
*          *         *          *          *

पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak) :  संस्कारों की विरासत

 

(anmol sabak)
(anmol sabak)

थोडा और आगे हो जाओ,
अब ध्यान से सुनते जाओ,
बचपन में गाने का शौंक रखते थे,तुम्हारे पापा,
पीतल की कटोरी पर प्लास्टिक लपेटकर,
ढोल बजाने का शौंक रखते थे,तुम्हारे पापा,
दीवार पर तस्वीर लगाकर रखता था,
एक शेर पानी पी रहा है हिरण के साथ,
वो सूरज को जल देता था,
सूरज की पहली किरण के साथ,
मैं चाहती हूँ की तूं भी खुद को,
अपने पापा के जैसा बना लीजिए,
पापा के बचपन का कोई किस्सा सुना दीजिए,
जो बात आपके दिल को छू गई हो बड़ी माँ,
वो बात हमें भी बता दीजिए,
पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak), बड़ी माँ,
हमें भी सिखा दीजिए ,
*          *         *          *          *
सच में बड़ी माँ,कमाल दिखा दिया है,
आपने पापा को हीरा बना दिया है,
मैं भी चलूंगा उनके नक्ष से-कदम पर,
मैं भी खूब दौलत-शौहरत कमाऊंगा,
पापा की तरह अपने दम पर,
कुछ आदतें मुझे विरासत में मिली है,
कुछ मैं खुद उजागर करुंगा ,
में भी अपने पापा की तरह,
घर में सबका आदर करुंगा,
अपना जादुई हाथ बडी माँ,
एक बार फिर से मेरे सर पर फिरा दीजिए,
पापा के बचपन का कोई किस्सा सुना दीजिए,
जो बात आपके दिल को छू गई हो बड़ी माँ,
वो बात हमें भी बता दीजिए,
पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak), बड़ी माँ,
हमें भी सिखा दीजिए ,
*          *         *          *          *
सबके दिल में घर बनाऊंगा,
अपने कोमल मीठे व्यवहार से,
अपने बड़े-बुजुर्गों को रखूंगा,मैं भी प्यार से,
शायद सफलता की चाबी,थोडा झुकने में है
शायद सफलता की चाबी सदा चलने में हैं,
अपना प्रार्थनाओं वाला हाथ बडी माँ,
मेरे सर पर भी रख दो,
हमारे घर में फिर से बिखरा दीजिए,
अपने प्यार के मीठे जल को,
मुझे भी अपने प्यारे मुख से बडी माँ,
एक बार फिर से आशीर्वाद दीजिए,
पापा के बचपन का कोई किस्सा सुना दीजिए,
जो बात आपके दिल को छू गई हो बड़ी माँ,
वो बात हमें भी बता दीजिए,
पापा के बचपन का अनमोल सबक (anmol sabak), बड़ी माँ,
हमें भी सिखा दीजिए ,
*          *         *          *          *
Creater- राम सैणी
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