मुझे बड़ा आदमी बनाया है पढ़ा-लिखा कर,
पिता का गुरुमंत्र (pita ka gurumantar)
मैंने जीवन में रखा है अपनाकर,,
जहाँ जरुरत है पैसा खर्चना जमकर,
पढ़ना-लिखना हमारे पैसे से,
लेकिन शौंक पूरे करना अपने दम पर ,
पढ़ना-लिखना तुम्हारा अधिकार है,
इसे पूरा करना हमारा फर्ज है,
तुम छूना बुलंदियां आसमान की,
हमारा हाथ थामना बुढ़ापे में,
ये तुम्हारा पहला फर्ज है,
हमने एक अच्छे माता-पिता बनकर दिखाया है,
अब तुम खुद को दिखाना अच्छा बेटा बनकर,
मुझे बड़ा आदमी बनाया है पढ़ा-लिखा कर,
पिता का गुरुमंत्र (pita ka gurumantar)
मैंने जीवन में रखा है अपनाकर,,
पढ़ना-लिखना हमारे पैसे से,
लेकिन शौंक पूरे करना अपने दम पर ,
* * * * *
जिस माँ की कोख से जीवनदान मिला है,
जिस माँ के आंचल में बचपन गुजारा है,
उसके दुध का कुछ मोल चुका देना,
जिस आंगन में चलना सिखा है,
जिस माँ का हाथ पकड़कर,खडना सिखा है,
तुम चिंता मत करो माँ,
मैं हूँ ना,बस इतना बता देना,
कभी उनके साथ दो पल बिताकर,
कभी साथ में खाना खाकर,
मुझे बड़ा आदमी बनाया है पढ़ा-लिखा कर,
पिता का गुरुमंत्र (pita ka gurumantar)
मैंने जीवन में रखा है अपनाकर,,
पढ़ना-लिखना हमारे पैसे से,
लेकिन शौंक पूरे करना अपने दम पर ,
* * * * *
पहला शब्द,पहली पाठशाला है माँ,
पहला शिक्षक,पहला रक्षक हैं माँ,
मान रख लेना माता-पिता के दिए संस्कारों का,
याद रखना माता-पिता के बलिदानों का,
हमारी खुशियों की लडी बनकर रहना,
हमारे बुडापे की छडी बनकर रहना,
तेरी माँ का पहला अधिकार है,तुम्हारे जीवन पर,
सबसे बड़ा उपकार है तुम्हारे जीवन पर,
वो अपनी प्रार्थनाओं का रखती है,
तुम्हारे चारों ओर घेरा बनाकर,
मुझे बड़ा आदमी बनाया है पढ़ा-लिखा कर,
पिता का गुरुमंत्र (pita ka gurumantar)
मैंने जीवन में रखा है अपनाकर,,
जहाँ जरुरत है पैसा खर्चना जमकर,
पढ़ना-लिखना हमारे पैसे से,
लेकिन शौंक पूरे करना अपने दम पर
* * * * *
मैं तुम्हारी जरुरतें पूरी करता हूँ,
अपनी जरूरतों को मारकर,
कोई भी तकलीफ तुम्हें छू भी नही पाएगी,
मैंने हर तकलीफ को तुम्हारे जीवन से,
कांटों की तरह रखा है निकालकर,
हम पानी की तरह पैसा बहाएंगे,
तुम्हें लिखा-पडाकर बुलंदियों पर पहुंचाएंगे
कोई कमी नहीं होगी कभी पैसे की,
मैं कहीं से भी ले आऊंगा,कैसे भी,
मैं तुम्हें हीरे की तरह कीमती बना दूंगा,
अपने अनुभव की भट्ठी में तपाकर,
मुझे बड़ा आदमी बनाया है पढ़ा-लिखा कर,
पिता का गुरुमंत्र (pita ka gurumantar)
मैंने जीवन में रखा है अपनाकर,,
पढ़ना-लिखना हमारे पैसे से,
लेकिन शौंक पूरे करना अपने दम पर ,
* * * * *
पिता का गुरुमंत्र ( pita ka gurumantar): शिक्षा से शिखर तक

सबसे हटकर होता है जीवन में,
माता-पिता का किरदार,
तुम्हारी खुशियों के लिए देता है,
अपनी खुशियों का बलिदान हर बार,
तुम्हारी कामयाबी में देखता हूँ,
मैं खुद की कामयाबी,
मुश्किल की घड़ी में पीछे खडा मिलेगा,
तुम्हारा पिता आज भी,
माँ होती है ज़मीं की तरह,
पिता होता है अम्बर,
मुझे बड़ा आदमी बनाया है पढ़ा-लिखा कर,
पिता का गुरुमंत्र (pita ka gurumantar)
मैंने जीवन में रखा है अपनाकर,,
जहाँ जरुरत है पैसा खर्चना जमकर,
पढ़ना-लिखना हमारे पैसे से,
लेकिन शौंक पूरे करना अपने दम पर
* * * * *
एक वादा पिता जी,मेरी ओर से,
मेरी बातों को सुनना तुम ग़ौर से,
आप के दिए संस्कारों पर चलूंगा,
मैं हमेशा आप दोनों से हंसकर मिलूंगा,
इस भागती-दौड़ती जीवन की रफ्तार में,
कोई कमी नहीं आएगी आपके शिवम के प्यार में
मै पैसे से खुद का कारोबार बढ़ाऊंगा,
मैं खुद को इतना काबिल बनाऊंगा,
आपके जो सपने रह गए हैं अधूरे,
मैं जी-जान से करूंगा,उनको पूरे,
पिटारा आपकी शिकायतों का,
धीरे-धीरे खाली हो रहा है,
पैसा हमारे घर में हर दिन
मीठा-मीठा शोर मचा रहा है,
यूं ही बरकरार रहेगा मेरी नज़रों में,
आप दोनों का हमेशा आदर,
मुझे बड़ा आदमी बनाया है पढ़ा-लिखा कर,
पिता का गुरुमंत्र (pita ka gurumantar)
मैंने जीवन में रखा है अपनाकर,,
पढ़ना-लिखना हमारे पैसे से,
लेकिन शौंक पूरे करना अपने दम पर ,
* * * * *
पैसे की खुशबू से महकेगा,आंगन हमारा,
मुझे आपके नाम से पहचानेगा,
ये प्यारा सा गाँव हमारा,
मुझे आपके जैसे चाव है,पिता जी,
अपने खेत-खलिहान से,
मेरी बचपन की यादें जुड़ी हैं,
हमारे छोटे से गाँव चकचान से,
अध्यात्म का गहरा असर है,
बचपन से मेरे मन पर,
मुझे बड़ा आदमी बनाया है पढ़ा-लिखा कर,
पिता का गुरुमंत्र (pita ka gurumantar)
मैंने जीवन में रखा है अपनाकर,,
जहाँ जरुरत है पैसा खर्चना जमकर,
पढ़ना-लिखना हमारे पैसे से,
लेकिन शौंक पूरे करना अपने दम पर
* * * * *
Creater- राम सैणी
Read more sweet poetry
Click here–> रब ने दी दो प्यारी सौगात (do pyari saugat) : मेरा संसार
Click here–>नानी के घर की खुशबू(nani ke ghar ki khushboo): नानी का प्यार



