बचपन के किस्से-कहानियों में,
एक किस्सा मेरी नानी के घर का है,
नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar ki khushboo) मेरे रोम-रोम में बसी है,
नानी का प्यार एक झरना मीठे जल का है,
हम नानी के घर जाया करते हैं,
गर्मी की छुट्टियों में हर बार,
हम नानी को बहुत सताया करते हैं,
गर्मी की छुट्टियों में हर बार,
मेरी नानी हमेशा हंसती रहती है,
वो सारा दिन अपनी छडी लेकर,
इधर-उधर घूमती रहती है,
नानी रखती है अपनी रसोई में,
एक मटका ठंडे जल का है,
बचपन के किस्से-कहानियों में,
एक किस्सा मेरी नानी के घर का है,
नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar ki khushboo) मेरे रोम-रोम में बसी है,
नानी का प्यार एक झरना मीठे जल का है,
* * * * *
हम लोगों को देखकर नानी माँ,
घर से बाहर दौडी चली आती है,
हमारे सर पर हाथ रखकर कहती हैं,
कुछ खा भी लिया करो,
वो हमें हर बार कमजोर बताती है,
दिल को बहुत अच्छा लगता है,
नानी के साथ समय बिताकर,
वो बहुत खुश होती है,
हमें हर रोज नए-नए पकवान खिलाकर,
मेरी नानी माँ मोहल्ले में प्रधान कहलाती है,
मेरी नानी माँ सबके घर बारी बारी से जाती है,
जब भी नानी माँ हमें गोद में बिठाती है,
उनकी आँखों से पानी छलका है,
बचपन के किस्से-कहानियों में,
एक किस्सा मेरी नानी के घर का है,
नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar ki khushboo) मेरे रोम-रोम में बसी है,
नानी का प्यार एक झरना मीठे जल का है,
* * * * *
माँ के जैसा अपनापन लगता है,
नानी माँ की मनभावन बातों में,
हर घड़ी माया रहती है,
हमारी नानी माँ के हाथों में,
मेरी नानी हमारी बड़ी माँ को ,
घर का रखवाला कहती हैं,
मेरे सर पर प्यार से हाथ फिराकर ,
नानी मुझे किस्मत वाला कहती है,
हमारे साथ घुल-मिल कर,
नानी का मन हो जाता हल्का है,
बचपन के किस्से-कहानियों में,
एक किस्सा मेरी नानी के घर का है,
नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar ki khushboo) मेरे रोम-रोम में बसी है,
नानी का प्यार एक झरना मीठे जल का है,
* * * * *
माँ ने हरी मेंहदी को एक कटोरे में घोला था,
मेरी नानी माँ को,सुबह-सुबह,,
बालों में मेहंदी लगाने को बोला था,
वो पशुओं को चारा डालने निकल गई,
काम का बहाना बनाकर,
घर आते ही हंसने लगी वो खिल-खिलाकर,
माँ ने धीरे-धीरे करके पूरे बालों को रंग दिया,
फिर नानी में ने बोलना थोडा कम किया,
वो आज भी मिट्टी से जुडी है,
खुशियां उसके आंगन में बिखरी पड़ी हैं,
वो ज्यादा पढ़ी-लिखी तो नहीं है,
लेकिन हिसाब रखती है पल-पल का है,
बचपन के किस्से-कहानियों में,
एक किस्सा मेरी नानी के घर का है,
नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar ki khushboo) मेरे रोम-रोम में बसी है,
नानी का प्यार एक झरना मीठे जल का है,
* * * * *
नानी के घर की खुशबू(nani ke ghar ki khushboo): नानी का आँगन

नानी आपसे ज्यादा तो ,मेरी बड़ी माँ अक्लमंद है
तुम रखती हो हमेशा सफेद बाल ,
लेकिन मेरी बड़ी माँ को लाल बाल पसंद हैं,
मेरी मंझली दीदी थोडी खर्चिली है,
वो नानी से पैसे मांगती है,जब भी उनसे मिली है,
मेरी नानी माँ पैसे को सीने से लगाकर रखती है,
मेरी नानी माँ पैसे को दरवाजा बंद करके,
आटे के ड्रम में छुपाकर रखती है,
उसे आज से ज्यादा फिक्र कल का है,
बचपन के किस्से-कहानियों में,
एक किस्सा मेरी नानी के घर का है,
नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar ki khushboo) मेरे रोम-रोम में बसी है,
नानी का प्यार एक झरना मीठे जल का है,
* * * * *
वो गाँव का चप्पा-चप्पा जानती है,
वो गाँव का बच्चा-बच्चा जानती है,
मेरी नानी माँ,मेरी माँ से लंबी लगती है,
मेरी नानी माँ बिल्कुल चंबी के जैसे दिखती है,
वो ज्यादा बातें नहीं बनाती है,
हमे बार-बार गले लगाती है,
हमारी नानी माँ को घर से कुछ ज्यादा ही मोह है
अपने घर को कभी भी सूना नहीं छोडती वो है,
हर घर की ख़बर रखती है,
हम सबका ख्याल बराबर रखती है,
ऐसी रसभरी है नानी माँ की बातें,
जैसा रसभरा स्वाद मीठे फल का है,
एक किस्सा मेरी नानी के घर का है,
नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar ki khushboo) मेरे रोम-रोम में बसी है,
नानी का प्यार एक झरना मीठे जल का है,
* * * * *
दुध-घी की नानी माँ के घर में,
शुरू से नदियां बहती हैं,
इसलिए उनके घर में लोगों की,
हर सुबह चहल-पहल रहती है,
कुछ दिन और रूको ना,
वो बोलती है हमारे हाथों में नीले नोट थमाकर,
वो आँखों में पानी भर लेती है,
हम-सबको गले लगाकर,
ये कितना प्यारा मनमोहक पल,
माँ-बेटी के मिलन का है,
बचपन के किस्से-कहानियों में,
एक किस्सा मेरी नानी के घर का है,
नानी के घर की खुशबू (nani ke ghar ki khushboo) मेरे रोम-रोम में बसी है,
नानी का प्यार एक झरना मीठे जल का है,
* * * * *
Creater- राम सैणी
Read More sweet poetry
Click here–> एक कप चाय(ek cup chay)बेटे के नाम : एक प्याली प्यार की
Click here–> रब ने दी दो प्यारी सौगात (do pyari saugat) : मेरा संसार



