(jeevan sangini)

मेरी जीवन संगिनी (jeevan sangini) : प्रेम से सजा रिश्ता

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मैं तो रखता हूँ उसे फूलों की तरह,
जो बोलना है जिसे बोलनें दो,
उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
उसे कभी कोई कमी नहीं,
मैं आने दूंगा अपनी जीवन संगिनी(jeevan sangini) को,
मुस्कान ना गायब हो चेहरे की,
सदा आँखों में काजल के डोरे हों,
वो कदम टिकाए जहाँ-जहाँ,
मस्त हवाओं ने उस रस्ते पर,
मधुबन के फूल महकते बिखेरें हों,
मै तो रखता हूँ उसे गले का हार बनाकर,
जो बोलना है जिसे बोलनें दो,
उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
उसे कभी कोई कमी नहीं,
मैं आने दूंगा अपनी जीवन संगिनी(jeevan sangini) को,
*       *      *       *          *
उसकी बातों में वो दम-खम दिखता है,
मैं उसकी बातों को सबसे ऊपर रखता हूँ,
वो बोलती रहती है मैं सुनता रहता हूँ,
मैं हाँ में सर हिला कर उसके साथ चलता रहता हूँ
घर में कोई भी शुभ काम हो,
मैं उसकी राय लेता हूँ,
जब वो रूठकर बैठ जाती है,
मैं उसे हर बार मना लेता हूँ,
मै तो रखता हूँ उसके साथ,
दोस्ताना व्यवहार बनाकर,
मैं तो रखता हूँ उसे फूलों की तरह,
जो बोलना है जिसे बोलनें दो,
उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
उसे कभी कोई कमी नहीं,
मैं आने दूंगा अपनी जीवन संगिनी(jeevan sangini) को,
*       *      *       *          *
वो खुश होने की वजह हर दिन ढूंढ लेती है,
परिवार को जोड़ने की कला,
ये गुण उसको विरासत में है मिला,
सीधी-सादी जिंदगी जीने में,
उसको मजा आता है,
समस्याओं को कैसे सुलझाना है,
ये उसको बाखुबी आता है,
मैं तो रखता हूँ उसके चेहरे पर मुस्कान सजाकर,
जो बोलना है जिसे बोलनें दो,
उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
उसे कभी कोई कमी नहीं,
मैं आने दूंगा अपनी जीवन संगिनी(jeevan sangini) को,
*       *      *       *          *
वो मना नहीं करती है मुझे कहीं आने-जाने से,
वो पीछे नहीं हटती है रिश्तों को निभाने से,
पति को परमेश्वर का दर्जा देती है,
अपने घर के बड़े-बुजुर्गों को,
दिल में जगह देती है,
वो शिकवे-शिकायत तो कभी-कभी करती है,
सर पर दुपट्टा डालकर सदा रखती है,
मै तो रखता हूँ उसे काँच की तरह संभालकर,
जो बोलना है जिसे बोलनें दो,
उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
उसे कभी कोई कमी नहीं,
मैं आने दूंगा अपनी जीवन संगिनी(jeevan sangini) को,
*        *      *       *          *

मेरी जीवन संगिनी(jeevan sangini) : फूलों जैसी पत्नी

 

(jeevan sangini)
(jeevan sangini)

 

आवाज ऐसी की कानों में रस घोल दे,
जो भी दिल में छुपा होता है,
वो मुंह पर साफ-साफ बोल दे,
ईश्वर की भक्ति पर रखती है आस्था,
हर उरझी हुई पहेली का,
पल में ढूंढ लेती है रास्ता,
दो भाषाओं का ज्ञान रखती है,
पंजाबी हो चाहे हिंदी हो,
वो बार-बार संवारती रहती है,
अपने माथे की बिंदी को,
मैं तो अपने दिल की और घर की चाबी,
उसके हाथों में रखता हूँ,
जो बोलना है जिसे बोलनें दो,
उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
उसे कभी कोई कमी नहीं,
मैं आने दूंगा अपनी जीवन संगिनी(jeevan sangini) को,
*       *      *       *          *
माँ को पलकों पर बिठाकर रखती है,
जहाँ जरुरत हो वो अपना,
सर झुकाकर रखती है,
वो अपने घर की बातों को,
अपने तक ही रखती है,
किसी तीसरे की दखल‌अंदाजी,
अपने घर में पसंद नहीं करती है,
मै तो रखता हूँ उसे आँखों का काजल बनाकर,
जो बोलना है जिसे बोलनें दो,
उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
उसे कभी कोई कमी नहीं,
मैं आने दूंगा अपनी जीवन संगिनी(jeevan sangini) को,
*       *      *       *          *
हाजिर जवाब है,दिल की साफ है,
अपने से छोटों की गलतियों को,
सदा कर देती माफ है,
उसकी आँखें रहती हैं खिली-खिली,
जैसे अभी-अभी आँखों में काजल डाला हो,
उसके नयन-नक्ष मिलते हैं थोड़े-थोड़े,
सच में,जैसे वो बृजबाला हो,
मैं तो सबकी नजरों में,
उसका सम्मान बनाकर रखता हूँ,
जो बोलना है जिसे बोलनें दो,
उसकी आँखोँ में नमी नहीं,
उसे कभी कोई कमी नहीं,
मैं आने दूंगा अपनी जीवन संगिनी(jeevan sangini) को,
*        *      *       *
Creater राम सैणी
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