(sabse sundar roop)

ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ : एक वरदान

Last updated on April 15th, 2026 at 05:57 pm

इस कविता को star दीजिए

 

ईश्वर ने अपनी मूरत,
माँ के रूप में सजाई है,
ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ,
ईश्वर हर पल नहीं रह सकता सबके पास,
इसलिए उसने धरती पर माँ बनाई है ।
माँ के हिस्से आई है ब‌च्चों की जिम्मेदारी,
माँ ही बना सकती है,
एक बच्चे को संस्कारी,
बच्चों के साथ-साथ मुस्कराती है,
उनके साथ ही अपनी जिंदगी जीती है,
मैं नीडर हो गया हूँ दुनिया में आकर,
जब से माँ ने पकडी मेरी कलाई है,
ईश्वर ने अपनी मूरत,
धरती पर माँ के रूप में सजाई है,
ईश्वर हर पल नहीं रह सकता पास सबके,
इसलिए उसने धरती पर माँ बनाई है ।
*       *        *       *         *

माँ की कोख में था जब घर मेरा,
मुझे ईश्वर का सहारा था,
मैं दीदार करता था हर रोज जिस रूप के,
वो रूप सबसे न्यारा था,
सफेद रंग में रंगी एक रौशनी जी,
जो मेरी सांसें चला रही थी,
उसकी सफ़ेद रौशनी मेरे मुख पर छा रही थी,
सच में,ये कोई रौशनी जादुई है,
ईश्वर ने अपनी मूरत,
धरती पर माँ के रूप में सजाई है,
ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ,
ईश्वर हर पल नहीं रह सकता पास सबके,
इसलिए उसने धरती पर माँ बनाई है ।
*       *        *       *
वो जाता था हर रोज,
मेरे माथे को चूमकर,
मैं रहता था सारा दिन,
एक मस्ती में झूमकर,
मेरा और ईश्वर  का नाता ही कुछ ऐसा है,
बिल्कुल बाप‌ और बेटे के जैसा है,
मुझे सौंपकर माँ की गोद में,
माँ के सीने में मेरे लिए प्रीत जगा‌ई है,
ईश्वर ने अपनी मूरत,
धरती पर माँ के रूप में सजाई है,
ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ,
ईश्वर हर पल नहीं रह सकता पास सबके,
इसलिए उसने धरती पर माँ बनाई है ।
*       *        *       *         *
माँ का आँचल मैंने बिल्कुल वैसा ही पाया है,
जैसा ईश्वर ने मुझको बताया है,
उसके जैसे माँ भी रखती है मेरा ख्याल,
एक पल ना करें माँ एतबार किसी का,
मेरे चारों ओर रखती है बनाकर,
अपनी दुआओं का जाल,
इस जहान की सारी खुशियां,
शायद मेरे हिस्से आई हैं,
ईश्वर ने अपनी मूरत,
धरती पर माँ के रूप में सजाई है,
ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ,
ईश्वर हर पल नहीं रह सकता पास सबके,
इसलिए उसने धरती पर माँ बनाई है ।
*       *        *       *         *

ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ : हर खुशी की वजह

 

(sabse sundar roop)
(sabse sundar roop)

मुझे ईश्वर के जैसी मिलती है,
उसके आँचल में पनाह,
माँ के चेहरे में ईश्वर दिखता है,
वो ही मेरा सारा जहां,
ईश्वर ने संभाला था अब तक,
अब माँ ने संभाला है,
माँ ही करती है मेरे जीवन में,
हर पल उजाला है,
ईश्वर ने कृपा उस घर पर बरसाई है ,
जिस घर में माँ सदा मुस्कराई है  ,
ईश्वर ने अपनी मूरत,
धरती पर माँ के रूप में सजाई है,
ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ,
ईश्वर हर पल नहीं रह सकता पास सबके,
इसलिए उसने धरती पर माँ बनाई है ।
*       *        *       *         *
माँ छूती है जब मुझे,अपने प्यारे हाथों से,
मुझे ईश्वर का एहसास होता है,
माँ इर्द- गिर्द रहती है हर पल मेरे,
मुझको ऐसे लगता है,
जैसे ईश्वर मेरे पास होता है,
कभी खेलती है मेरे संग,
एक छोटे-से बच्चे की तरह,
वो मुझसे ऐसे बातें करती है,
जैसे मैं अभी बोलूंगा, किसी जादू की तरह,
वो झट से अपना पावन दूध पिला देती है,
मैंने जब भी रोने की शक्ल बनाई है,
ईश्वर ने अपनी मूरत,
धरती पर माँ के रूप में सजाई है,
ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ,
ईश्वर हर पल नहीं रह सकता पास सबके,
इसलिए उसने धरती पर माँ बनाई है ।
*       *        *       *         *
माँ है प्यार की एक मूरत,
वो है ईश्वर का अनमोल वरदान,,
माँ है मित्र,माँ है हमदर्द मेरा,
उसकी बांहों का घेरा है कवच मेरा,
कोई नहीं है उसके समान,
हे ईश्वर तेरे रूप अनेक,
तेरा रूप ये सबसे प्यारा है,
माँ हैं दुजा रुप तुम्हारा,
जो माँ के रूप में धरती पर उतारा है,
माँ की मूरत मेरे दिल में,
एक ज्योति बनकर समा‌ई है,
ईश्वर ने अपनी मूरत,
माँ के रूप में सजाई है,
ईश्वर का सबसे सुंदर रूप (sabse sundar roop) माँ,
ईश्वर हर पल नहीं रह सकता पास सबके,
इसलिए उसने धरती पर माँ बनाई है ।
*        *        *         *        *
creater-राम सैणी
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