बेटों का अभिमान (beton ka abhiman ) व्यर्थ है : औलाद का मोह
बेटों का अभिमान (beton ka abhiman ) ना कर, बेटे नहीं हैं सुख की वजह, बेटों वाले मात-पिता भी, आजकल […]
बेटों का अभिमान (beton ka abhiman ) ना कर, बेटे नहीं हैं सुख की वजह, बेटों वाले मात-पिता भी, आजकल […]
औलाद से हारकर आए हैं, वृद्ध-आश्रम में एक और पिता(ek aur pita ), मन पर एक बोझ लेकर आए हैं,
खुद ही झुक जाता है उनके आगे मेरा सर, पिता की वजह से (pita ki vajah se ) मुस्कराता
सबसे बड़ा धनवान वो नहीं जिनके घर खजाने से भरी पेटियां हैं, असली धनवान है वो इंसान, हंसती,गाती-मुस्कराती हुई,
घर में एक बेटी होना भी लाजमी है, तभी बेगानी बेटी ( begani beti ) का दर्द समझेगा हर आदमी
आँखें बंद करके जो किया है भरोसा, उस भरोसे की लाज (bharose ki laaj ) निभाना, बेटी होती है
मुझे रखना है एक प्यारा-सा नाम, सबसे पहले करना है मुझे ये ही काम, माँ कोई नाम सोचकर बताओ ना,
खुशबू जो बचपन ले आए ( khusboo jo bachpan le aaye ) , तुम्हारे हाथों की रोटी वो ही
माँ का नाम ही सुकून है ( maa ka naam hi sukun hai ) माँ का नाम ही मेरी
बेटे को परखने के लिए एक दिन, माँ बोली,मेरा बोझ कब तक उठा सकते हो, मुझे चाहिए थोड़ी-सी स्वर्ग की