माँ ही पहला भगवान ( maa hi pahla bhagwan ) : आस्था का आधार
सर झूका लीजिए इस मूरत के आगे, माँ ही पहला भगवान ( maa hi pahla bhagwan ) है , […]
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सर झूका लीजिए इस मूरत के आगे, माँ ही पहला भगवान ( maa hi pahla bhagwan ) है , […]
बड़े चंचल हैं ये नन्हे कदम(nanhe kadam ), सारे घर में मस्ती करते हैं हरदम, मेरी बेटी जब भी
एक-सा अधिकार मिले,बेटी और बहु(beti aur bahu ) को, दोनो की कीमत है एक-सी, आसमान हो चाहे जमीं हो,
मुझे फूलों की तरह रखता है , ससुराल में मेरा पति, तो राजकुमारी बनाकर रखता था, मायके में मेरा
मैंने बेटे को आँचल में छूपाकर पाला है, तो बेटी को भी अपनी जान से ज्यादा संभाला है, मैं
मैंने बचपन में देखा था पापा जैसा बनने का सपना ( papa jaisa banne ka sapna ) उसके जैसा
हमारी खुशियों के दो किनारे (khushiyon ke do kinare )हैं, ये ही सुख-दुख के साथी हमारे हैं, जीवन में खुशियाँ
हर चीज का हिसाब मांगती बेटी(Hisab mangti beti)है आपकी, हर बात का जवाब मांगती है बेटी आपकी, क्या ये
दौलत-शोहरत कदम चूमती है, जिस आंगन में बेटियां खेलती हैं, बंद किस्मत के द्वार ( kismat ke dwar ) खोलती
बातें करता हूँ नापतोल कर, अपने से बड़ों को बुलाता हूँ जी बोलकर, प्यार से बोलना मेरा स्वभाव है