पीपल की घनी छाँव (ghani chhanv) : मिट्टी की खुशबू
कुएं का ठण्डा जल भी, शहद के जैसे मीठे-मीठे फल भी, आज भी मिलते हैं मेरे गाँव में, बेटे […]
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कुएं का ठण्डा जल भी, शहद के जैसे मीठे-मीठे फल भी, आज भी मिलते हैं मेरे गाँव में, बेटे […]
माँ कैसी थी (maa kaisi thi ) कब हंसती-मुस्कुराती थी, मुझे कुछ तो बताओ ना पापा, हमारे साथ माँ क्यों
माँ बाजार से एक गुड़िया (ek gudiya ) ला दो ना, रंग-बिरंगे कपड़ों से उसको सजा दो ना, उसके संग
दिल छोटा ना कर माँ, छोटी-छोटी खुशियों को, हाथों से ना जाने दो, मैं खोल दूंगी शिकायतों का पिटारा (shikayaton
खुशियों का आधार (khushiyon ka aadhar ) बेटियां, बेटियों से कर दिल से प्यार, खुल जाएंगे तेरे किस्मत के
मात-पिता हैं दूध के जैसे, फिर तेरा रंग क्यों अंधियारा-सा, क्यों उदास-सा मुख है तेरा, तेरे मात-पिता का मुख (maat-pita
कौन कहे माँ के पास काम नहीं है, माँ को तो एक पल का भी आराम नहीं है, हर
दो रोटी बैलों को डालें, एक रोटी चिड़ियों को खिलाता है, रोटी का आदर (roti ka adar ) करे सर
हमारे घर का बादशाह ( ghar ka badsha ) हैं वो, जो पिता प्यार से बोले मुझे राजकुमारी, उसको शायद
रंग सांवला है तो क्या हुआ, मैं पापा की लाडली हूँ , कद छोटा है तो क्या हुआ, मैं अपने