Last updated on March 12th, 2026 at 08:14 pm
पैरों में गिरकर अपनी जन्मदाती के ,
पकड़कर बोला माँ की कलाई ,
इस अनाथ-आश्रम में अब तुमको ना रहने दुंगा,
चलो माँ वो ही अपने घर पुराने,
बेटे के मुख से सुनकर ये मीठे बोल ,
एक माँ की मुस्कान ( maa ki muskan ) फिर लौट आई
कुछ पल के लिए भटक गया था,
मैं एक बेटे के फर्ज से ,
अब तुमको और दुख ना सहने दुंगा।
तूं ही है मेरी सच्ची कमाई ,
बेटे के मुख से सुनकर ये मीठे बोल ,
एक माँ की मुस्कान ( maa ki muskan ) फिर लौट आई
* * * * *
मैं इस नए ज़माने की चमक में,
कुछ पल के लिए हो गया था ऐसा दीवाना,
मैं मान बैठा था बोझ तुमको,
करके तुम्हें इस अनाथ-आश्रम के हवाले,
मैं हो गया था तुम से बेगाना,
मुझसे पूछती हैं,घर की दीवारें,
वो हंसता-मुस्कराता साया कहाँ है,
जो बरसाती थी अपने प्यार के बादल,
वो घर की माया कहाँ है,
मैं खुद की नजरों में गिर गया हूँ माँ,
अब खुद को और ना गिरने दूंगा,
इन नयनों में ज्योति तेरे नयनों से है आई ,
पैरों में गिरकर अपनी जन्मदाती के ,
पकड़कर बोला माँ की कलाई ,
इस अनाथ-आश्रम में अब तुमको ना रहने दुंगा,
चलो माँ वो ही अपने घर पुराने,
बेटे के मुख से सुनकर ये मीठे बोल ,
एक माँ की मुस्कान ( maa ki muskan ) फिर लौट आई
* * * * *
मैं भूलकर फर्ज अपना कुछ पल के लिए ,
चला था अनजान राहों पर,
मैं भूल बैठा था वो बचपन की यादें,
माँ कैसे तुम प्यार करती थी मुझको,
उठाकर अपनी बांहों पर,
माँ के जैसा कोई प्यार करे,
ये तो खाली एक सपना है,
माँ के संग बांटेंगे हर ग़म,
इस जहान में माँ का आँचल ही घर अपना है,
मैं तेरी कोख का जाया हूँ ,
तूं है मेरी परछाई ,
पैरों में गिरकर अपनी जन्मदाती के ,
पकड़कर बोला माँ की कलाई ,
इस अनाथ-आश्रम में अब तुमको ना रहने दुंगा,
चलो माँ वो ही अपने घर पुराने,
बेटे के मुख से सुनकर ये मीठे बोल ,
एक माँ की मुस्कान ( maa ki muskan ) फिर लौट आई
* * * * *
माँ तुम्हारा दिल बहुत बड़ा है,
तुम कंई बार अकेले में रो देती हो,
मैं कितने भी करूं गुनाह मगर,
तुम एक पल में मेरे सब गुनाह धो देती हो,
अपनी जड़ों से कटकर पेड कैसे रह सकता है,
मात-पिता का दिल दुखाकर,
एक बेटा कैसे सुखी रह सकता है,
माँ तुम्हारी आँखों के आंसू हैं,
गंगा माँ के पानी के जैसे,
अब इनको धरती पर और ना बिखेरने दूंगा,
मैं कैसे भूल गया तेरे बलिदान को ,
जो ख्याबों में भी करती है मेरी भलाई ,
पैरों में गिरकर अपनी जन्मदाती के ,
पकड़कर बोला माँ की कलाई ,
इस अनाथ-आश्रम में अब तुमको ना रहने दुंगा,
चलो माँ वो ही अपने घर पुराने,
बेटे के मुख से सुनकर ये मीठे बोल ,
एक माँ की मुस्कान ( maa ki muskan ) फिर लौट आई
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माँ की मुस्कान ( maa ki muskan ) : बेटे का पश्चाताप

मैं आगे से इनको रखुंगा संभाल कर ,
तुम्हारे दिए संस्कारों पर मैं चलूंगा सदा,
जीवन की राहों में हर कदम रखुंगा देखभाल कर,
मैं अपनी ग़लती पर माँ बहुत शर्मिन्दा हूँ,
मुझे सदा दुख रहेगा हमेशा अपनी गलती का ,
मैं कैसे चुकाऊंगा ऋण,
जो रातें मेरे लिए तुम ने माँ ,
सारी-सारी रात जागकर है बिताई ,
पैरों में गिरकर अपनी जन्मदाती के ,
पकड़कर बोला माँ की कलाई ,
इस अनाथ-आश्रम में अब तुमको ना रहने दुंगा,
चलो माँ वो ही अपने घर पुराने,
बेटे के मुख से सुनकर ये मीठे बोल ,
एक माँ की मुस्कान ( maa ki muskan ) फिर लौट आई
* * * * *
बेटे की टूटी झोपड़ी में भी,
माँ खुश होकर रह लेती है,
उसे नहीं चाहत हैं ऊँचे मकानों की,
माँ रहती है उनकी अनाथ-आश्रम में,
बहुत लम्बी कतार है इस दुनिया में,
ऐसे ऊँचे धनवानों की,
मेरी सबसे प्रार्थना है ये ही,
हम-सबका जीवन गुजरे ,
माँ के चरणों में ही,
इन चरणों में धूल गमों की,
अब मैं ना लगने दूंगा,
पैरों में गिरकर अपनी जन्मदाती के ,
पकड़कर बोला माँ की कलाई ,
इस अनाथ-आश्रम में अब तुमको ना रहने दुंगा,
चलो माँ वो ही अपने घर पुराने,
बेटे के मुख से सुनकर ये मीठे बोल ,
एक माँ की मुस्कान ( maa ki muskan ) फिर लौट आई
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माँ के मुस्कराने से घर में,
खुशियों की हवाएं बहती है,
रब का पहरा होता है उस घर में,
जहाँ औलादें माँ के पाँव में,
दिन-रात सर झुकाए खड़ी रहती हैं,
रब की माया माँ का साया ,
हर घर में कायम रहे,
माँ है सौगात रब की,
माँ जन्मदाती है हम सब की ,
मेरी कोशिश रहेगी माँ सदा,
तेरी सेवा में कोई कमी अब ना रहने दुंगा,
तेरे चेहरे की रंगत से ,
मेरे चेहरे पर है रंगत आई ,
पैरों में गिरकर अपनी जन्मदाती के ,
पकड़कर बोला माँ की कलाई ,
इस अनाथ-आश्रम में अब तुमको ना रहने दुंगा,
चलो माँ वो ही अपने घर पुराने,
बेटे के मुख से सुनकर ये मीठे बोल ,
एक माँ की मुस्कान ( maa ki muskan ) फिर लौट आई
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creater-राम सैणी
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