Last updated on April 21st, 2026 at 06:00 pm
माँ,मेरे सपनों को पंख ( sapnon ko pankh ) लगा दो आज,
मै भी पहनना चाहती हूँ कामयाबी का ताज,
मेरे पैरों में ना डालो तुम बेड़ियां,
मुझे एक बेटी समझकर,
छोड़ दो ये सोचना क्या बोलेगा समाज,
तुम दिल पर लेना छोड दो,
पीठ पीछे बोलने वालों की बातों को,
तुम मेरी ओर देखो माँ,
नए-नए सपनें सजाए इन आँखों को,
तुम छोटी-छोटी बातों को माँ,
शुरू करना सीख लो नजरअंदाज,
माँ,मेरे सपनों को पंख ( sapnon ko pankh ) लगा दो आज,
मै भी पहनना चाहती हूँ कामयाबी का ताज,
* * * * * *
मुझे भी दो माँ पड-लिखने का अधिकार,
मुझ पर करना भरोसा बेटों के जैसे माँ,
मेरे अंदर भी बोलते हैं तुम्हारे दिए संस्कार,
कौन क्या कहेगा जरा ये सोचना बंद कर दो,
जिन गलियों में होती है बेटी की बुराई,
तुम उन गलियों की ओर देखना बंद कर दो,
तुम्हारी सहमति से ही होगा माँ,
मेरी खुशियों का आगाज,
माँ,मेरे सपनों को पंख ( sapnon ko pankh ) लगा दो आज,
मै भी पहनना चाहती हूँ कामयाबी का ताज,
मेरे पैरों में ना डालो तुम बेड़ियां,
मुझे एक बेटी समझकर,
छोड़ दो ये सोचना क्या बोलेगा समाज,
* * * * * *
तुम मेरी चिंता करती हो दिन-रात,
ये तुम्हारा हक है माँ,
तुम मरती हो मुझ पर दिलो-जान से,
इस बात में कोई शक नहीं है माँ,
मुझे तुम्हारी सहमती का है इंतजार,
तुम साथ खड़ी हो हर पल मेरे,
मुझे भी है इतना एतबार,
कमजोर नहीं है माँ बेटी तुम्हारी,
मैं शेरनी के जैसे हूँ जांबाज,
माँ,मेरे सपनों को पंख ( sapnon ko pankh ) लगा दो आज,
मै भी पहनना चाहती हूँ कामयाबी का ताज,
मेरे पैरों में ना डालो तुम बेड़ियां,
मुझे एक बेटी समझकर,
छोड़ दो ये सोचना क्या बोलेगा समाज,
* * * * * *
मेरे पंखों में उड़ान भरना माँ,
ये आज से तुम्हारा काम है,
आपकी शेरनी बेटी ऊँचा करेगी,
एक दिन माँ तुम्हारा नाम है,
नया जमाना नई सोच है,
मुझे चाहिए बस माँ का साथ,
मुझे उडान भरना है एक दिन,
आसमान से ऊँचा है मेरा आत्मविश्वास,
एक बेटी अगर पढ़-लिख जाए,
वो दो परिवारों को संवारती है,
माँ-बेटी का रिश्ता है कुछ ऐसा की,
बेटी हर पल माँ-माँ पुकारती है,
तुम हो मेरी सच्ची सहेली,
तुम ही हो मेरी हमराज़,
माँ,मेरे सपनों को पंख ( sapnon ko pankh ) लगा दो आज,
मै भी पहनना चाहती हूँ कामयाबी का ताज,
* * * * * *
मेरे सपनों को पंख ( sapnon ko pankh ) लगा दो माँ : नई सोच

मेरे सीने में धडकती हर सांस को,
माँ तुम अच्छे से पहचानती हो,
मेरे दिल में छुपी हर बात को,
माँ तुम अच्छे से जानती हो,
मुझे पता है घर की मान-मर्यादा का,
माँ मेरे ऊपर है एक जिम्मेदारी,
हर पाँव रखुंगी देखभाल कर,
हर काम में दिखाऊंगी समझदारी,
मैं ना कभी अपनी हद से आगे बढ़ूंगी,
मैं सदा तेरे दिखाएं रास्ते पर चलूंगी,
माँ तेरी बेटी तुझसे ये वादा करती हैं आज,
माँ,मेरे सपनों को पंख ( sapnon ko pankh ) लगा दो आज,
मै भी पहनना चाहती हूँ कामयाबी का ताज,
मेरे पैरों में ना डालो तुम बेड़ियां,
मुझे एक बेटी समझकर,
छोड़ दो ये सोचना क्या बोलेगा समाज,
* * * * * *
बेटी जब तक तुम रहोगी घर से बाहर,
मेरी सांसें सीने में अटकी रहेंगी,
इस दुनिया का काम है कहना,
ये कुछ ना कुछ तो कहेगी,
इस दुनिया के तीखे बाण शब्दों के,
मैं सह लूंगी हंस-हंसकर,
मेरी बेटी के सपने हैं गुरुर मेरा,
तुम रहोगी मेरे दिल में धड़कन बनकर,
तुम्हारी जीवन की डोर है तुम्हारे हाथों में,
तुम ना रहो किसी की मोहताज,
माँ,मेरे सपनों को पंख ( sapnon ko pankh ) लगा दो आज,
मै भी पहनना चाहती हूँ कामयाबी का ताज,
मेरे पैरों में ना डालो तुम बेड़ियां,
मुझे एक बेटी समझकर,
छोड़ दो ये सोचना क्या बोलेगा समाज,
* * * * * *
तेरे लिए तेरी माँ हर दुख -दर्द सहेगी,
ये दुनिया लाख बोले कुछ भी,
तेरी माँ कभी कुछ ना कहेगी,
मैं करूंगी सम्मान तेरा,
तूं भी रखना मान मेरा,
मेरे सर को सदा उठाए रखना,
मन में मात-पिता को बिठाए रखना,
मैं खुद से भी ज्यादा करती हूँ,
बेटी तुझ पर नाज,
माँ,मेरे सपनों को पंख ( sapnon ko pankh ) लगा दो आज,
मै भी पहनना चाहती हूँ कामयाबी का ताज,
बेटी समझकर पैरों में ना डालो तुम बेड़ियां,
छोड़ दो ये सोचना क्या बोलेगा समाज,
* * * * *
creater-राम सैणी
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