खिल-खिलाकर हंसना मना है,
क्यों शोर मचाया बेवजह है,
बेटी हो,रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ),
मर्यादा में रहो बेटी की तरह
घर से बाहर भी नहीं जाना है,
अपनी बड़ी माँ की आज्ञा के बिना,
मेरा स्वभाव है कितना गर्म,
मैं बातें नहीं करती नरम-नरम,
ज्यादा अक्ल मत बांटना बेवजह
बेटी हो,रहो बेटी की तरह,
मर्यादा में रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ),
घर से बाहर भी नहीं जाना है,
अपनी बड़ी माँ की आज्ञा के बिना,
* * * * *
मैं बेटी हूँ पापा की नीड़र शेरनी,
डरना मेरा काम नहीं है,
चुप-चुप रहना आंसू बहाना,
ये चुटकी का काम नहीं है,
अपनी सरकार है खुले विचार हैं,
मैं आज में जीने वाली हूँ,
आदेश नहीं मुझे प्यार चाहिए,
जहाँ हो बेटी का सम्मान,
मुझे ऐसा परिवार चाहिए,
जिस परिवार में हर दिल में,
बेटियों के लिए जगह है,
खिल-खिलाकर हंसना मना है,
क्यों शोर मचाया बेवजह है,
बेटी हो,रहो बेटी की तरह,
मर्यादा में रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ),
* * * * *
जिस घर में बेटियां हंसती हैं,
वहाँ खुशियों की नदियां बहती हैं,
जिस घर में बेटियां फुलों की तरह खिलती हैं,
उस घर की ध्वजा आसमान में लहराती है,
मेरे पास आओ जरा मुझे बताओ,
किस किताब में लिखा है बड़ी माँ,
बेटियों का हंसना मना है,
खिल-खिलाकर हंसना मना है,
क्यों शोर मचाया बेवजह है,
बेटी हो,रहो बेटी की तरह,
मर्यादा में रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ),
घर से बाहर भी नहीं जाना है,
अपनी बड़ी माँ की आज्ञा के बिना,
* * * * *
मैं ना जानूं कोई हिसाब-किताब,
मेरा खुद पर काबू नहीं रहता है,
जब कोई मुझे पलटकर देता है जवाब,
बेटियों को ज्यादा लाड़-प्यार ठीक नहीं है,
उसको ज्यादा अधिकार ठीक नहीं है,
चुल्हा-चौंका है काम तुम्हारा,
तभी तो ऊंचा होगा नाम हमारा,
बेटी को दिए यदि अच्छे संस्कार तो,
सम्मान करेगा सारा परिवार,
प्यार देना है प्यार लेना है,
प्यार से हर घड़ी जीना है,
खिल-खिलाकर हंसना मना है,
क्यों शोर मचाया बेवजह है,
बेटी हो,रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ),
मर्यादा में रहो बेटी की तरह
* * * * *
बेटी की तरह ( beti ki tarah ) रहो : बेटी की सीमाएं

जुबां पर लगाम जरूरी है,
खुशियां तमाम जरूरी है,
सर हो पल्लू से ढका हुआ,
ना चेहरा लगे कभी थका हुआ,
खुला आंगन हो,मन निर्मल हो,
फिर चेहरे पर लाली बनी रहेगी,
सूरज की लाली की तरह,
खिल-खिलाकर हंसना मना है,
क्यों शोर मचाया बेवजह है,
बेटी हो,रहो बेटी की तरह,
मर्यादा में रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ),
घर से बाहर भी नहीं जाना है,
अपनी बड़ी माँ की आज्ञा के बिना,
* * * * *
इस उम्र में गुस्सा ठीक नहीं है,
ये उम्र है राम जप करने की,
थोडा खाओ,प्रभु के गुण गाओ,
ये उम्र नहीं है हट करने की,
जो हो रहा है उसको होने दो,
व्यर्थ की चिंता को जाने है,
अब सर मेरे प्यार का हाथ रख दो ना
मुझे गर्व है इस घर की बेटी होने का,
खुशियां बांटनी है बेशुमार,
सुख-दुख दुःख तो आना-जाना है,
खिल-खिलाकर हंसना मना है,
क्यों शोर मचाया बेवजह है,
बेटी हो,रहो बेटी की तरह,
मर्यादा में रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ),
* * * * *
सब की जुबां पर मेरा नाम है,
घर की पहरेदारी करना बड़ी माँ,
अब तुम्हारा काम है,
हर बेटी को पड़ने दो,
घर में खुलकर हंसने है,
वो पंख फैलाना चाहती है,
उन्हें नीले आसमान में उड़ने दो,
तुम हो जड इस घर की तो ,
मैं इस घर की तना हूँ,
खिल-खिलाकर हंसना मना है,
क्यों शोर मचाया बेवजह है,
बेटी हो,रहो बेटी की तरह,
मर्यादा में रहो बेटी की तरह ( beti ki tarah ),
घर से बाहर भी नहीं जाना है,
अपनी बड़ी माँ की आज्ञा के बिना,
* * * * *
creater- राम सैमी
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