जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे,
वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ),
आज थामने का वक्त आया है,
आपकी जिम्मेदारी उठाने का पिता जी,
आज मैंने भी मन बनाया है,
मेरे मन में हलचल होने लगी है,
आपके कांपते हाथ देखकर,
दिन तो आराम से गुजर जाता है,
आप डर से जाते हैं काली रात देखकर,
आपकी मुस्कान क़ायम रखनें का,
आज मैंने भी बेडा उठाया है,
जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे,
वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ),
आज थामने का वक्त आया है,
* * * * *
रातें गुजरती हैं जाग-जागकर,
आप कुछ ज्यादा ही थक गए है पिता जी,
सारी उम्र परिवार के लिए भाग-भागकर,
पिता का सहारा जैसे रब का सहारा,
रख दीजिए लकडी की छडी को,
अपनी चारपाई के पास,
एक लंबी सांस लीजिए पिता जी,
उपर की ओर देखिए जरा,
कितना प्यारा लग रहा है,
चमकते सितारों से भरा आकाश,
मैं कितना सौभाग्यशाली हूँ
आज पिता की सेवा करने का मौका आया है,
जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे,
वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ),
आज थामने का वक्त आया है,
आपकी जिम्मेदारी उठाने का पिता जी,
आज मैंने भी मन बनाया है,
* * * *
आप मुझसे सांझा कर सकते हैं
अपनी जिंदगी की सुनहरी यादों को,
शुक्र कीजिए ऊपरवाले का,
अपनी उठाकर दोनों बांहों को,
आप भूल जाएं सब परेशानियों को,
आँखों में मीठे सपनों को आने दो,
आप सब जिम्मेदारियों से आजाद हैं,
अब ये ज़िम्मेदारियों मुझको उठाने दो,
इन जिम्मेदारियों से लडने,
आज आपका रक्त आया है,
जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे,
वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ),
आज थामने का वक्त आया है,
आपकी जिम्मेदारी उठाने का पिता जी,
आज मैंने भी मन बनाया है,
* * * *
अपने दिल में दबाकर मत रखिए,
आप किसी भी बात को,
निःसंकोच होकर कह दीजिएगा,
आप अपने जज्बात को,
घर में पूरा सम्मान होगा,
आपकी इच्छाओं का,
मेरे जीवन पर गहरा असर है,
आपकी दी हुई शिक्षाओं का,
मैंने आप की थी हुई शिक्षा को,
अपने जीवन में अपनाया है,
जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे,
वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ),
आज थामने का वक्त आया है,
आपकी जिम्मेदारी उठाने का पिता जी,
आज मैंने भी मन बनाया है,
* * * *
पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ) : बूढ़े पिता

आ जाओ पिता जी मैं सुखा दूं,
आपके पाँव को गुनगुने पानी से धोकर,
खुद को तरोताजा महसूस करोगे,
जब सुबह उठोगे तुम सोकर,
जो बहता है आपकी रगों में,
मेरी रगों में भी वो ही रक्त है,
आज फिर से थम-सा गया है,
वो ही पुराना वक्त है,
श्रवण के जैसे मैंने भी ख़ुद को,
मात-पिता का भक्त बनाया है,
जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे,
वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ),
आज थामने का वक्त आया है,
आपकी जिम्मेदारी उठाने का पिता जी,
आज मैंने भी मन बनाया है,
* * * * *
मैंने माँ को वचन दिया है,
उनके पाँव की मिट्टी को छूकर,
मैं सदा रखुगा आप दोनों को,
अपने दिल से लगाकर,
अपने कांपते हाथों को पिता जी,
रख दीजिए इस अपने लाल के सर पर,
ये भोली सी सूरत इस दिल में,
पिता जी,बसी रहेगी उम्रभर,
इस नन्ही सी जान पर पिता जी,
आपने पूरा जीवन लुटाया है,
जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे,
वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ),
आज थामने का वक्त आया है,
आपकी जिम्मेदारी उठाने का पिता जी,
आज मैंने भी मन बनाया है,
* * * *
इन चमकती आँखों में पिता जी,
मैं खुशी की लहरें देखना चाहता हूँ,
मैं आपके जूतों में अपना,
अब पाँव रखना चाहता हूँ,
मात-पिता के कदमों में रहने का मौका,
हर किसी को नहीं मिलता है,
ये प्यार का वो सूरज है,
जो हर आंगन में निकलता है,
माँ को नर्म दिल बोला जाता है,
पिता को हर कहानी में सख़्त बताया है,
जिस हाथ को थामकर बचपन में चलते थे,
वो ही पिता के कांपते हाथ ( kanpte hath ),
आज थामने का वक्त आया है,
आपकी जिम्मेदारी उठाने का पिता जी,
आज मैंने भी मन बनाया है,
* * * * *
creation -राम सैणी
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