(papa ka seena)

पापा का सीना (papa ka seena) : सबसे सकून भरा ठिकाना

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पापा के सीने पर मैं बचपन में,
बेख़ौफ़ होकर सो जाया करती थी,
पापा का सीना (papa ka seena)था,
मेरे लिए मखमल का बिस्तर,
उस बिस्तर पर मीठी-मीठी नींद में,
मैं सपनों की दुनिया में खो जाया करती थी,
पापा के सीने पर सोने का,
आनंद ही सबसे न्यारा है,
पापा के सीने पर सोने का,
सबसे पहला हक हमारा है,
ये कोमल कली अपने पापा का,
प्यारा चेहरा देखकर खिल जाया करती थी,
पापा का सीना (papa ka seena)था,
मेरे लिए मखमल का बिस्तर,
उस बिस्तर पर मीठी-मीठी नींद में,
मैं सपनों की दुनिया में खो जाया करती थी,
* * * *
कोई मतलब ना था हमें इस दुनिया से ,
हम अपनी धुन में मस्त रहते थे,
हमारी बेटी है हीरे के ‌जैसी,
पापा हमेशा ये ही कहते थे,
हम पापा के हाथों में हाथ डाले,
उसके साथ-साथ चलते थे,
हमें पापा की शेरनी बुलाते थे,
आने-जाने वाले जो भी राहों में मिलते थे,
हम पापा का हाथ पकड़ कर,
अपने सपनों की दुनिया में ले जाया करते थे,
पापा के सीने पर मैं बचपन में,
बेख़ौफ़ होकर सो जाया करती थी,
पापा का सीना (papa ka seena)था,
मेरे लिए मखमल का बिस्तर,
उस बिस्तर पर मीठी-मीठी नींद में,
मैं सपनों की दुनिया में खो जाया करती थी,
* * * * * * *
मेरे कोमल-कोमल हाथों का स्पर्श,
पापा को बडा प्यारा लगता था,
आज भी हम याद करके हंसते हैं,
सच में वो वक्त हमारा लगता था,
मै रोते हुए चुप नहीं होती थी,
जब तक पापा गोद में ना उठाले,
मेरे चेहरे पर मुस्कान नहीं आती थी,
जब तक पापा मुझे सीने से ना लगालें,
मैं पापा की एक प्यारी सी जफ्फी से,
खुश हो जाया करती थी,
पापा के सीने पर मैं बचपन में,
बेख़ौफ़ होकर सो जाया करती थी,
पापा का सीना (papa ka seena)था,
मेरे लिए मखमल का बिस्तर,
उस बिस्तर पर मीठी-मीठी नींद में,
मैं सपनों की दुनिया में खो जाया करती थी,
* * * * * * *
पापा के सीने से लग कर यूं लगता था,
जैसे ये सारा जहां अपना है,
मैंने मन में ये ठान लिया है की,
मुझे भी अपने पापा जैसा बनना है,
पापा मुझे अपने कांधे पर बिठाकर,
गाँव की गलियों में घुमाते थे,
मुझे मुस्कराते हुए देखकर,
पापा खुद भी मुस्कराते थे,
मेरा खिलोनों से मन बहलाते थे,
जब मैं गुस्सा हो जाया करती थी,
पापा के सीने पर मैं बचपन में,
बेख़ौफ़ होकर सो जाया करती थी,
पापा का सीना (papa ka seena)था,
मेरे लिए मखमल का बिस्तर,
उस बिस्तर पर मीठी-मीठी नींद में,
मैं सपनों की दुनिया में खो जाया करती थी,
* * * * * * *

पापा का सीना (papa ka seena) : पापा के सीने की गर्माहट

 

 (papa ka seena)
(papa ka seena)

 

उनके साथ ही खाना,
उनके साथ ही सोना,
वो दिखाते थे मुझे रात को चमकते तारे,
पापा बोलते थे ये सब मित्र हैं तुम्हारे,
मुझे तारों से बातें करना,आज भी भाता है,
जब भी कभी मन परेशान होता है,
मुझे पापा का वो ही जोश दिलाना याद आता है,
मै पापा का हाथ पकड़ कर,
सारे आंगन में घुमाया करती थी,
पापा के सीने पर मैं बचपन में,
बेख़ौफ़ होकर सो जाया करती थी,
पापा का सीना था मखमल का बिस्तर,
उस बिस्तर पर मीठी-मीठी नींद में,
मैं सपनों की दुनिया में खो जाया करती थी,
* * * * *
एक जादू-सा लगता है पापा के हाथों में,
वो एक खुली किताब के जैसे हैं,
मुझे डर नहीं लगता है अब रातों में,
मेरे पापा एक पहरेदार के जैसे है,
पापा मुझे जिद्दी गुड़िया बुलाते हैं,
वक्त के साथ-साथ कैसे चलना है,
वो मुझे हर घड़ी समझाते हैं,
कभी घर के कोने में,
कभी बिस्तर के अंदर ढूंढ़ते रहते थे,
जब में चुपके से छुप जाया करती थी,
पापा के सीने पर मैं बचपन में,
बेख़ौफ़ होकर सो जाया करती थी,
पापा का सीना (papa ka seena)था,
मेरे लिए मखमल का बिस्तर,
उस बिस्तर पर मीठी-मीठी नींद में,
मैं सपनों की दुनिया में खो जाया करती थी,
* * * * * * *
मैं पंख फैलाकर उड़ जाऊं,
इस नीले आसमान में,
मेरे पापा से प्यारा नहीं है,
कोई भी इस जहान में,
मुझे दिल में जगह देने के लिए,
पापा आपका शुक्रिया,
आपके मान-सम्मान का ध्यान रखेगी,
पापा आपकी ये गुडिया,
बचपन में आपके बिना,
मैं एक पल में बेचैन हो जाया करती थी,
पापा के सीने पर मैं बचपन में,
बेख़ौफ़ होकर सो जाया करती थी,
पापा का सीना (papa ka seena)था,
मेरे लिए मखमल का बिस्तर,
उस बिस्तर पर मीठी-मीठी नींद में,
मैं सपनों की दुनिया में खो जाया करती थी,
* * * * * * *
creation -राम सैणी
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