मेरे पास आओ बड़ी माँ,
थोडा नीचे झुक जाओ बड़ी माँ,
मैं कुछ कहना चाहती हूँ आपसे अकेले में,
मेरी सब सखियां जा रही हैं सज-धजकर,
उनके साथ मैं भी जाऊँगी मेले में (main bhi jaungi mele mein),
बड़ी दीदी भी जा रही है,
छोटा भाई भी जा रहा है,
उनको मेले में जाते हुए देखकर,
मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है,
मेरे नए कपड़े लेकर आओ ,
जल्दी-जल्दी मुझे पहनाओं ,
अब नई-नई कहानियां मत सुनाओ बड़ी माँ,
मेरे पास आओ बड़ी माँ,
थोडा नीचे झुक जाओ बड़ी माँ,
मैं कुछ कहना चाहती हूँ आपसे अकेले में,
मेरी सब सखियां जा रही हैं सज-धजकर,
उनके साथ मैं भी जाऊँगी मेले में (main bhi jaungi mele mein),
* * * * * *
माँ ने भी हाँ में सर हिलाया है,
अपना पर्स खोलकर दिखाया है,
कुछ हरे रंग के नोट मेरी जेब में डाले हैं,
पापा ने हंसकर टाल दिया है,
मुझे बांहों में उठाकर हवा में उछाल दिया है,
मेरे दोनों हाथों में डाल दिए हैं,
पापा ने धागे काले रंग के,
मुझे नए कपड़े पहना दिए हैं,मेरी पसंद के,
अब आप भी हाँ में सर हिलाओ,बड़ी माँ,
मेरे पास आओ बड़ी माँ,
थोडा नीचे झुक जाओ बड़ी माँ,
मैं कुछ कहना चाहती हूँ आपसे अकेले में,
मेरी सब सखियां जा रही हैं सज-धजकर,
उनके साथ मैं भी जाऊँगी मेले में (main bhi jaungi mele mein),
* * * * * *
पापा ने कहा है ध्यान से जाना,
बात-बात पर रूठ मत जाना,
परेशान मत करना अपनी बड़ी माँ को,
अपनी बड़ी दीदी की उंगली पकडना,
छोटे भाई को साथ लेकर चलना,
पीछे -पीछे चलना अपनी बड़ी माँ के,
तुम्हारी बड़ी माँ का स्वभाव थोड़ा गर्म है
वो कुछ भी बोलनें में नहीं करती शर्म है,
मेरे साथ चलना है बड़ी माँ या घर पर रहना है,
आपको कुछ कहना है,
थोड़ा-सा अपनी जुबान को हिलाओं बड़ी माँ,
मेरे पास आओ बड़ी माँ,
थोडा नीचे झुक जाओ बड़ी माँ,
मैं कुछ कहना चाहती हूँ आपसे अकेले में,
मेरी सब सखियां जा रही हैं सज-धजकर,
उनके साथ मैं भी जाऊँगी मेले में (main bhi jaungi mele mein),
* * * * * *
तुम्हारे पापा को कुछ पता नहीं है,
वो जानता नहीं है दुनियादारी,
उसे क्या पता है कैसे उठाते हैं,
छोटे बच्चों की जिम्मेदारी,
मेले में जाना छोटे बच्चों का काम नहीं है,
मेले में घूमती-फिरती तुम थक जाओगी,
वहाँ एक पल का भी आराम नहीं है,
हर बार अपनी बात बड़ी करना ठीक नहीं है,
बचपन की जिद्द अब नहीं चलेगी,
हर बार जिद्द पर अडना ठीक नहीं है,
मुझे ज्यादा मत समझाओ बड़ी माँ,
मेरे पास आओ बड़ी माँ,
थोडा नीचे झुक जाओ बड़ी माँ,
मैं कुछ कहना चाहती हूँ आपसे अकेले में,
मेरी सब सखियां जा रही हैं सज-धजकर,
उनके साथ मैं भी जाऊँगी मेले में (main bhi jaungi mele mein),
* * * * * *
मैं भी जाऊँगी मेले में (main bhi jaungi mele mein) : मुझे भी सजाओ आज

मेले में भीड़ बहुत होती है,
जब कोई छोटी बच्ची रोती है
अपने पास बिठा लेते हैं,मेले के अधिकारी,
मक्खियां भिनभिनातीं रहती हैं,
धूल-मिट्टी पड़ती रहती है ,
खाने-पीने के सामान पर,
हर सामान महंगे दामों पर मिलता है,
वहाँ चलती नही बिलकुल भी उधारी,
लाल सेब काले पड़ जाते हैं,
दुर्गंध आने लगती है पके हुए केले से,
मेरे पास आओ बड़ी माँ,
थोडा नीचे झुक जाओ बड़ी माँ,
मैं कुछ कहना चाहती हूँ आपसे अकेले में,
मेरी सब सखियां जा रही हैं सज-धजकर,
उनके साथ मैं भी जाऊँगी मेले में (main bhi jaungi mele mein),
* * * * * *
मेरी सहेली भी जा रही है कविता,
उसके साथ जा रही है बड़ी दीदी निकिता,
मेले की ख़ुशी,मेले की मस्ती,
सखियों संग जाउंगी हंसती-मुस्कराती,
मेरा भी मन है जाने का बड़ी माँ,
ये जो घर में छोटा भाई है,
इसके चेहरे पर भी मुस्कान छाई है,
मेले का नाम सुनकर,
हम सब ने मेले में जाने की खुशी में,
अपने मन में नए-नए सपने रखें हैं बुनकर,
चलो अब एक गुलाबी नोट की,
सूरत दिखलाओ बड़ी माँ,
मेरे पास आओ बड़ी माँ,
थोडा नीचे झुक जाओ बड़ी माँ,
मैं कुछ कहना चाहती हूँ आपसे अकेले में,
मेरी सब सखियां जा रही हैं सज-धजकर,
उनके साथ मैं भी जाऊँगी मेले में (main bhi jaungi mele mein),
* * * * * *
मुझे भी मेले में जाना पसंद है बड़ी माँ,
मेरे सब्र का बांध टूटा जा रहा है,
मुझे धीरे-धीरे गुस्सा आ रहा है,
तुम हाँ बोलो चाहें ना बोलो,
मैं तो जाऊंगी बड़ी माँ,
आप नहीं जाना चाहती तो,
माँऔर पापा को साथ लेकर जाऊंगी ,
चल तूं जीती मैं हारी,
बड़ी तेज-तर्रार है मंझली बेटी हमारी,
उम्रभर करेगी अपनी बड़ी माँ को याद,
चल मैंने सुन ली तेरी प्यारी फरियाद ,
मेरे साथ-साथ चलना,
मत घूमना वहाँ अकेले में,
मेरे पास आओ बड़ी माँ,
थोडा नीचे झुक जाओ बड़ी माँ,
मैं कुछ कहना चाहती हूँ आपसे अकेले में,
मेरी सब सखियां जा रही हैं सज-धजकर,
उनके साथ मैं भी जाऊँगी मेले में (main bhi jaungi mele mein),
* * * * * *
creation -राम सैणी
read more sweet poetry
click here –> माँ का जन्मदिन ( maa ka janmdin ) : एक त्योहार
click here –> घर में अनचाही बेटी (anchahi beti) : मैं बोझ नहीं



